Shayri (Part 1)

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दिल के क़िस्से कहाँ नहीं होते हाँ,
वो सब से बयाँ नहीं होते....!!
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दिल के क़िस्से कहाँ नहीं होते हाँ,
वो सब से बयाँ नहीं होते....!!
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सर्वोत्तम कोटि के शिकारी मालूम होते हैं जनाब - आदर, सत्कार, एवं सद्भावनाओं सहित |
 
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'किसको कातिल मैं कहूं किसको मसीहा समझूँ', से कुछ पंक्तियाँ पेश हैं:


"किसको कातिल मैं कहूं किसको मसीहा समझूँ ....
सब यहाँ दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ ....
वो भी क्या दिन थे के हर वहम यकीन होता था ....
अब हकीकत नज़र आये तो उसे क्या समझूँ ....
दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआँ को उठे ....
ऐसे माहौल में अब किसको पराया समझूँ ...."
 
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दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआँ को उठे...
ऐसे माहौल में अब किसको पराया समझूँ..."

wah!! kya baat hai ...............dil ko choo gai ye baat ..................:)
 
खुदगर्ज़ हैं ये उजालों के परस्तार बहुत
सुबह होते ही चिरागों को बुझा देते हैं

#परस्तार = उपासक
 
किस किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम
तुमने तो कह दिया... ना निभा सको तो प्यार मत करो
 
अगर मेरी तरह तेरी जुबान पर भी मिठास चढ जाये
तो यकीन कर तेरी भी शायरी का रंग बदल जाये !
कौन कहता है यहाँ जज्बात चोरी होते हैँ जालिम
तू मेरी नीयत देखले तो मेरा कायल हो जाये !
और जितने जख्म मिले हैं मुझ को मोहब्बत में
तू कतरा भर भी महसूस करे तो घायल हो जाये !
और किस तरह इश्क में हदे पार होती है
तू सुन भी ले मेरी दास्ता तो पागल हो जाये !!
 
पहले कभी खौफ ऩा था , तेरे खोने का ,
और अब कोई जरिया नहीं तुझे पाने का |​
 
खुदा हमारी तरह उनको तन्हाई ना दे
हम जी लेंगे तनहा मगर उनको जुदाई ना दे...
हमारी निगाहों में बसी रहे उनकी सूरत
उनको भले ही हम दिखाई ना दे....!​
 
वो कह रही थी , समंदर नहीं आंखें हैं
और में उन में डूब गया ऐतेबार करते करते ..
वो कह रही थी जल्दी आउंगी लौट कर ,
और में गुजर गया इन्तजार करते-करते .......​
 
नींद से हुआ मेरा तलाक ,तू गई हे जब से ,
छत पर सपने टहलते रहते हैं ........​
 
न जाने किस गम को छुपाने की तमन्ना थी उसको ......
आज हर एक बात पर खवाब में हस्ते हुए देखा उसको .......

ऩा जाने कितनी हसरतें साथ ले जाते देखा उसको .......
आज उसने उन् हसरतों के साथ लिपटे देखा मुझको ......​
 
तेरी यादों में खोये रहते है ,
कभी जागे कभी सोये रहते है
कभी हँसतें कभी रोये से रहते है ​
 
तुम याद आओगे ये जानते थे हम ,
पर इतने याद आओगे इसका अंदाजा न था ...!​
 
मुझ को हैं काम और भी , कुछ तो ख्याल कर ,
आते हो जब ख्याल मैं , जाते नहीं ख्याल से .....​
 
तेरे प्यार में रुसवा होकर जाए कंहा दीवाने लोग
जाने क्या -क्या पूछ रहे है ए जाने पहचाने लोग |​
 
कुछ लोगो के हम से ताल्लुक भी अजीब हे ,
समझती तो अपना है , मगर सुलूक करती हैं गैरों जेसा ...​
 
मय्यत पे मेरी आएय हैं कुछ इस अदा से वो ...
सब उन पे मर मिट्टे मेरी लाश छोड़ कर ........!!!​
 
कहते हैं , बिन मेहनत के कुछ नहीं पा सकते हम खुदा से ,
जाने ग़म पाने के लिए हमने कौन सी मेहनत की थी .........​
 
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