ravinderjeet
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हम लबों से कह न पाए उनसे
हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं
ये ख़ामोशी क्या चीज़ है ....
हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं
ये ख़ामोशी क्या चीज़ है ....
समेट कर लेजा अपने झूठे वादों के अधूरे किस्से
अगली चाहत में तुम्हे फिर इनकी जरुरत पडेगी
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