Shayri (Part 1)

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हम लबों से कह न पाए उनसे
हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं
ये ख़ामोशी क्या चीज़ है ....​
 
Jindagi ki asli udaan abhi baaki hai
Jindagi ke kai imtehan abhi baaki hai
Abhi to naapi hai mutthi bhar zamin humne
Abhi to sara aasman baaki hai…

[FONT='Trebuchet MS', Georgia, Times, 'Times New Roman', sans-serif]
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Chehre ki hansi se har gam chhupao,
Bahut kuch bolo par kuch na batao,
Khud na rootho kabhi par sabko manaao,
Raaz hai ye zindgi ka bas jeete chale jao..


​
 
Na yaad karna hai usko na bhool jaana hai,,,ना याद करना है उसको ना भूल जाना है,,,
Tamaam umar hamain dil ko aajmaana hai,,,तमाम उम्र हमें दिल को आजमाना है,,,
Chirag shab main jahan aansunon ke jalte hain,,,चिराग शब् में जहाँ आंसुओं के जलते हैं,,,
Usi gali main hamara gareebkhana hai...उसी गली में हमारा गरीबखाना है....

 
Geele kagaz ki trah hai zindgi apni,,,गीले कागज कि तरह है जिंदगी अपनी,,,
Koi jalata bhi nahin,or koi bahata bhi nahin,,,कोई जलाता भी नहीं,और कोई बहाता भी नहीं,,,
Is kadar raahon main akela hai dil,,,इस कदर राहों में अकेला है दिल,,,
Ki koi sataata bhi nahin,or koi manata bhi nahin....कि कोई सताता भी नहीं,और कोई मनाता भी नहीं....

 
Do kadam to sab chal lete hain,,,दो कदम तो सब चल लेते हैं,,,
Par zindgi bhar ka saath koi nahin nibhaata,,,पर जिंदगी भर का साथ कोई नहीं निभाता,,,
Agar ro kar bhulaai jaati yaadain,,,अगर रो कर भुलाई जाती यादें,,,
To hans kar koi gam nahin chupaata...तो हंस कर कोई गम नहीं छुपाता....




 
एक वक्त था वो हमसे बिछड़ के बर्बाद हो जाने का दावा करते थे,,,
एक वक्त ये भी है कि हमसे बिछड़ के वो जिंदगी की खुशियों में मशगूल हो गए,,,
एक वक्त वो भी था जब वो एक पल के लिए भी हमसे दूर नहीं रह सकते थे,,,
एक वक्त ये भी है कि उनको हमसे दो बात करे जमाने हो गए...
 
समेट कर लेजा अपने झूठे वादों के अधूरे किस्से
अगली चाहत में तुम्हे फिर इनकी जरुरत पडेगी
 
हम तो सारी जिंदगी गम उठाते चले गए
लोगो के चेहरे चंद दिनों मे ही उतर गए
खुदखुशी के साथ गए जो खुदा के घर
वो जिंदगी पर कोन सा एहसान कर गए
 
एक ही दर पे सजदे में सर झुके तो सुकून मिलता है ए खुदा

भटक जाते है वो लोग जिनके हजारों खुदा होते हैं !!!
 
कभी लफ्ज़ भूल जाऊं कभी बात भूल जाऊं !
तुझे इस क़दर चहुँ के अपनी ज़ात भूल जाऊं
उठ के तेरे पास से जो में चल दूँ
जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊं​
 
जिन्दगी सवाल
है जिन्दगी जवाब है .......

तल्खियाँ हकीकतें
और थोड़े ख्वाब है,

रात,दिन की फ़िक्र क्या.जो मिले वो खूब है

थोड़ी जन्नतें
यहाँ और कुछ अजाब है,.

याद कोई क्या
करे किसी को इस जहान में.

सबके अपने फलसफे,अपनी ही किताब है,
​
 
बहुत तडपे हैं तब कहीं आराम आया हैं

मौत का ये पल बड़ी मिन्नत के बात पाया हैं.....!! —​
 
मेरी हिम्मत है तू हमकदम बनके चल
कामयाबी को मैं बाँहों में भर जाऊंगा

अपनी आँखों में मुझको झाँकने तो दे
मेरा दावा है मैं भी संवर जाऊंगा
 
तेरे हिस्से की लामणी भी मैं कर देता
वक्त गर साथ काम करण का बहाना देता
 
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रिश्तों की अपनी दुनियाँ हैं, दास्तां हैं
यह समझाना मुश्किल हैं, क्या दरमियाँ हैं
खामोशी हैं लब पे, बात भी हैं
लम्हा लम्हा लम्हा जिंदगी हैं................​
 
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