ravinderjeet;272920]
चाहो ना उससे जिससे तुम पा ना सको
ऐ काश इस मनचले दिल को काबू करना होता मुमकिन
यह कमबख्त उसी पे आता है जिसे पाना हो नामुमकिन
उम्र खुशियों में बसर जाए कोई जरूरी तो नहीं
फिर शब्-ए- गम की सहर हो ये कोई जरूरी तो नहीं
नींद तो दरद भरे बिस्तर पर भी आ सकती हे
उनके आगोश में ये सर हो ये कोई जरुरी तो नहीं
मोहब्बत लो लोगों ने खेल समझ रखा हे
हर दुआ में मांगते हैं हम तो बस उन्हें
हमारी हर दुआ में हो असर ये जरुरी तो नहीं
हमारी जिंदगी में बस उनकी कमी हे
उन्हें भी हमारी कमी का एहसास हो
ये जरुरी तो नहीं
ha ha ha ha ha!!!! jee sa aa gya padh k
Regards,
Urmila.
औरों को ही कहा तुमने औरों को ही सुना तुमने
कभी हमसे भी कहा होता कभी हमें भी सुना होता !
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