Shayri (Part 1)

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[h=5]तू ही रेत की तरह हाथों से फ़िसल गया
वरना जिंदगी तो तेरे कदमों में ही थी .......[/h]
 
Saath bitaaye inn lamhon ki yaad bahut aayegi
tanhaayi ke phir har pal mein ik tasveer ubhar aayegi
khayaalon mein mere tufaan hoga bichadta hua woh jahaan hoga
phir bhi kahin andheron mein ik kiran si dikh jayegi
himmat haarna to gunaah hoga jo ruk gaya woh fana hoga
chalte chalte phir in rahon par manzil khud hi saamne aayegi
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ज़िन्दगी एक गिफ्ट है..
कबूल कीजिये
ज़िन्दगी एक एहसास है..
महसूस कीजिये
ज़िन्दगी एक दर्द है..
बाँट लीजिये
ज़िन्दगी एक प्यास है..
प्यार दीजिये
ज़िन्दगी एक मिलन है..
मुस्कुरा लीजिये
ज़िन्दगी एक जुदाई है..
सबर कीजिये
ज़िन्दगी एक आंसू है..
पी लीजिये
ज़िन्दगी आखिर ज़िन्दगी है
जी लीजिये !
 
Mohabbat rooth jaye to Usay baahon main
le lena
Bohat hi paas kar ke tum... Usay jane nahi
dena
Woh daaman bhi churaye to Usay tum
qasam de dena
Dilon ke maamlon main to khatayen ho hi
jati hain
Tum in khataon ko, bahana mat bana lena
Mohabbat rooth jaye to Usay jaldi mana
lena.....
 
बेहतर है ....

दिल तो दिल है दिल की बातें समझ सको तो बेहतर है
दुनिया की इस भीड़ में ख़ुद को अलग रखो तो बेहतर है
मोड़ हज़ारों मिलेगें तुमको, कई मिलेगें चौराहे
मंज़िल तक पहुँचाने वाली राह चुनो तो बेहतर है
क़दम क़दम पर यहाँ सभी को बस ठोकर ही मिलती है
थाम के मेरा हाथ अगर तुम संभल सको तो बेहतर है
ख़ामोशी भी एक सदा है अकसर बातें करती है
तुम भी इसको तनहाई में कभी सुनो तो बेहतर है
जाने कैसा ज़हर घुला है इन रंगीन फ़िज़ाओं में
प्यार की ख़ुशबू से ये मंज़र बदल सको तो बेहतर है ....
 
Jate huye us ne sirf itna he kha tha muj se ........

O PAGAL.........!!!


Apni zindgi G lena..........waisy pyaar achaa karty ho....
 
hum maante hai humhe pyar karna aata ni,
hum maante hai humhe pyar karna aata ni,
par hum ye bhe jaante hai humhe kisse ka dil dukhana aata ni.
 
जरुरी काम है लेकिन रोजाना भूल जाता हूँ,
मुझे उससे मोहब्बत है बताना भूल जाता हूँ।
उस की गलियों में फिरना इतना अच्छा लगता है,
मैं रास्ता याद रखता हूँ ठिकाना भूल जाता हूँ।
बस इतनी बात पर लोगों को मैं अच्छा नहीं लगता,
मैं नेकी कर तो देता हूँ पर जताना भूल जाता हूँ।
शरारत ले के आँखों में, वो उस का देखना तौबा तौबा,
मैं नज़रों पर जमी नज़रें झुकाना भूल जाता हूँ।
मोहब्बत कब हुई, सब याद है मुझे क्योंकि,
मैं गलती करके गलती को भूलना भूल जाता हूँ।।
 
ना मिलता गम तो बरबादी के अफसाने कहाँ जाते
दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते
चलो अच्छा अपनों में कोई गैर तो निकला
सभी अगर होते अपने तो बेगाने कहाँ जाते
तुम्ही ने गम-ऐ-दौलत दी बड़ा एहसान फ़रमाया
ज़माने भर के आगे हाथ फैलाने कहाँ जाते
 
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