kuldeeppunia25
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दिल ने जुस्तजू एहतियाज की प्यार करने की ,
प्यार में इज्तिरार खुलुशी और जुशुखी से अहज़ान तरने की ,
शीर में इज़ित्राब रहे हमदम चुप के जुस्त्खी करने की ,
दिले बैचेन म हुआ अग्लात रक्स इब्तिदा की जब दिलबर की हिम्मत हुई मिलने की ,
क्या करे ,असरार ग़ालिब हो गये अफ्स्र्दः फासले इतने के इशरार जुस्तजू न हुई करने की ,
प्यार में इज्तिरार खुलुशी और जुशुखी से अहज़ान तरने की ,
शीर में इज़ित्राब रहे हमदम चुप के जुस्त्खी करने की ,
दिले बैचेन म हुआ अग्लात रक्स इब्तिदा की जब दिलबर की हिम्मत हुई मिलने की ,
क्या करे ,असरार ग़ालिब हो गये अफ्स्र्दः फासले इतने के इशरार जुस्तजू न हुई करने की ,
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