Shayri (Part 1)

Status
Not open for further replies.
Mil bhi jaate hain to katra ke nikal jaate hain,,, मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,,,
Haaye mausam ki trah log badal jaate hain,,, हाय मौसम की तरह लोग बदल जाते हैं,,,
Wo kabhi apni jafaa par nahin hue sharminda,,, वो कभी अपनी जफा पर नहीं हुए शर्मिंदा,,,
Ham samjhte rahe patthar bhi pighal jaate hain,,,हम समझते रहे पत्थर भी पिघल जाते हैं,,,
Umar bhar jinki wafaon pe bharosa kariye,,, उम्र भर जिनकी वफाओं पे भरोसा करिये ,,,,
Waqt padne par wahi log badal jaate hain,,, वक्त पड़ने पर वही लोग बदल जाते हैं,,,


मिलना बिछडना किस्मत की बात है
अब कौन जाने किसके क्या हालात है

वक्त का मौसम सब के लिये एक नहीं
वहां धूप ओर यहां काली घनी रात है

क्यूं उसके सिवा कोई चेहरा नहीं भाता
वर्ना दिल लगाने को पूरी कायनात है

जाने कहां तन्हा बैठा होगा वो दीवाना
किसी हसीं के घर आई आज बारात है

वफ़ा का मतलब किससे पूछे विजय
हर इंसान के अपने अपने खयालात हैं
 
Last edited:
Nafratain laakh mili koi mohabbat na mili,,, नफरतें लाख मिली कोई मोहब्बत न मिली,,,
Zindgi beet gai par raahat na mili,,, जिंदगी बीत गई पर राहत न मिली,,,
Teri mahfil main har shakhs ko hansta dekha,,, तेरी महफ़िल मैं हर शख्स को हँसते देखा,,,,
Ek main tha jise hansne ki ijaazat na mili.... एक मैं था जिसे हँसने की इजाजत न मिली,,,
 
"खुशशक्ल भी है वो, ये अलग बात है, मगर
हमको ज़हीन लोग हमेशा अज़ीज़ थे"


ज़हीन - Intelligent, समझदार
 
"महफ़िल,मुकाम,रास्ते और गम उदास हैं
खुद में जो जब्त हैं सभी मौसम उदास हैं
किस-किस से पूछियेगा बेहल सवाल ये
सब ही उदास हैं या फ़क़त हम उदास हैं..... "
 
मुझे मोहब्बत है अपने हाथ की सब उँगलियों से

ना जाने किस उंगली को पकड़ के 'माँ ' ने मुझे चलना सिखाया होगा !!
 
Ek raat hui barsat bahut,ham roye saari raat bahut,,,
Har gam tha zamane ka lekin,ham tanha the us raat bahut,,,
Phir ankh se ek sawan barsa,jab sahar hui khayal aaya,,,
Wo baadal kitna tanha tha,jo barsaa saari raat bahut,,,


 
यह बेवफा जिंदगी भी तुम्हारे नाम करते है

सुना है खूब बनती है बेवफा की बेवफा के साथ !!!
 
शीशे से सीखा है मैने मोहब्बत का हुनर
तोड़ने वाले का अक्स भी दिल मे बसा लेता है
 
रोज़ आती है मेरी कब्र पर अपने हमसफ़र के साथ
कौन कहता है कि दफनाने के बाद जलाया नहीं जाता
 
मंज़िल भी नही,ठिकाना भी नही,

वापिस मुझे घर जाना भी नही,

मैने ही सिखाया था उन्हे तीर चलाना,

अब मेरे सिवा उनका कोई निशाना भी नहीं

 
उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है जान अपनी

खुदा जाने अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता !!
 
"दोस्ती में, दुश्मनी भी खूब की
दिल चुराया और चुरा कर रह गए"
 
एक ख्वाब हो के रह गई है तेरी महोब्बत ,
एक वहम सा है अब, मेरे साथ तुम भी थे कभी ​

!!​
 
बुरा हाल, बहर-हाल कोई हाल तो है ,,

वो दिन भी तो थे जब कोई हाल ना था ,तुम्हारे बिना !!!!​

 
कहता है बता दर्द तेरा कैसे मैं समझूँ ???

मैंने कहा इश्क कर .......! और करके हार जा !!!!​
 
सुलगती जिदगी से मौत आ जाये तो बहतर है

हमसे दिल के अरमानो का अब और मातम नही होता !!!​
 
ज़रा खामोश तुम बैठो तो दम आराम से निकले,,

इधर हम हिचकी लेते हैं उधर तुम रोने लगते हो .​
 
मैं जिनको पढ़ के अपने प्यार में खो जाऊं

ऐसे अशार ना लिखा करे कोई !!!!!!!!....​
 
याद आते हो तो कुछ भी नही करने देते,

अच्छे लोगों की यही बात बुरी लगती है ,​
 
वो अच्छा है तो अच्छा है, बुरा है तो भी अच्छा है

मिज़ाज-ऐ-इश्क में ऐब-ऐ-यार देखे नहीं जाते ..​
 
Status
Not open for further replies.
Back
Top