Shayri (Part 1)

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ये महोब्बत की कहानी नहीं मरती
लेकिन
लोग किरदार निभाते हुए मर जाते है !!!!!!​
 
तू नहीं हे तो क्या हुआ ,तेरी तस्वीर तो हे ,
मेरे सिने में तेरी दी हुई दर्द की लकीर तो हे|
 
कब तलक घुल पाएगी ये मायूसी इस स्याही में
कि आज अपनी कलम को फिर आजमाने की तमन्ना हुई
 
वो अक्सर हमे कहते है कि
तुम रंग बदलते हो
पर उन्हे कौन समझाए कि
टूटे हुए पत्तों का रंग बदल ही जाता है
 
ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब है
कमबख्त गुजरता वही से है
जहाँ रास्ते नहीं होते
 
मुश्तकिल रही मंजिल हमेशा
कम्बखत ज़िन्दगी आरजी हो गई
सारी तालीम तो हुई हिंदी में, और
इम्तिहान की भाषा फ़ारसी हो गई
 
एक अरसे बाद मिले, तो मेरा नाम पूछ लिया उसने,
बिछड़ते वक़्त जिसने कहा था ,तुम्हारी बहुत याद आएगी...​
 
"हर बात हर सवाल की काट रखता है,
गर्दिश में हिम्मत विराट रखता है,
जाटों ने कई बार बताया ज़माने को,
शेर का जिगर तो बस जाट रखता है..."​
 
में ढुंढने निकला था ,खुशियों का खाजाना ,
गम की दौलत हाथ लगी ...........​
 
Dil ki dahleez par dastak ab na de,,, दिल की दहलीज़ पर दस्तक अब न दे !
Koi naya zakham naya fareb ab na de,,, कोई नया ज़ख्म नया फरेब अब न दे !!
Baawafa the to kyon gaye the rooth ke,,, बावफा थे तो क्यों गए थे रूठ के....
Tu bewafa hai wafa ka bharam ab na de,,,तू बेवफ़ा हैं वफ़ा का भरम अब न दे !!​
 
अफसाना नहीं बस इतना सुनो

उसने छोड़ दिया, हम बिखर गए​

बेवफ़ा की सच्चाई तो बस इतनी है
वो आये ही कब थे जो चले जायेंगे
 
ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब है
कमबख्त गुजरता वही से है
जहाँ रास्ते नहीं होते

ज़िन्दगी रुबरू जजबात से है
लडाई तो अपने हालात से है
 
Dil hua zakhmi magar kisi ko khabar nahin,,, दिल हुआ जख्मी मगर किसी को खबर नहीं,,,
Meri chaahton ka us par koi asar nahin,,,, मेरी चाहतों का उस पर कोई असर नहीं,,,
Ho ke juda tumse koi mar jaayega,,, हो के जुदा तुमसे कोई मर जाएगा,,,
Sun ke usne kaha ye koi badi khabar nahin,,, सुन के उसने कहा ये कोई बड़ी खबर नहीं,,,


 
गिरते को गिराना तो उनकी फितरत है यारो ,
गिरते को उठाना तो हमारी फितरत है यारो ,
तुम भी उधर चल पड़े नाराज होकर के हमसे .
रूठों को मनाना तो हमारी फितरत है यारो |​
 
वक्त से की थी तकरार हमने ,
]क्यूँ छिना जिनको चाहा हमने ,
वक्त ऩे कहा.....
जो मिला हे उस्सी में सबर कर | ​
 
"रंग, दुनिया ने दिखाया है निराला देखूं ,
है अँधेरे में उजाला तो उजाला,देखूँ ,
आइना रख दे मेरे सामने आखिर मैं भी ,
कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ......"
 
नज़र मिली और उनकी आँख झुकी ..

बस इतनी बात थी और हम बर्बाद हो गए ..!!​
 
वो मेरा सब कुछ था बस मेरा मुक़दर नहीं बन सका |

काश वो मेरा कुछ ना होकर सिर्फ मेरा मुक़दर होता ||​
 
मुझ पर जब सितम करो तो तरस मत खाना ........

मुझ पर हर सजा जाएज़ है क्योंकि मैने "महोब्बत" की है..​
 
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