Shayri (Part 1)

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धूप मैं खो गया वो हाथ छुडा कर
घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर |​
 
मेरी जागी हुयी रातों को उसी की हे तलाश
सो रहा है मेरी आँखों मैं जो सपना बनकर |​
 
sandarbh badalte hi mayne badal jate hain...
gardish me log to kya aa-e-ne bhi badal jate hain...
धूप मैं खो गया वो हाथ छुडा कर
घर से जो साथ चला था मेरा साया बनकर |​
 
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बहुत मुशकिल हो गया है खुद को संभाल रखना ,

मगर वो कह गई है की , अपना ख्याल रखना !!!​
 
खुबसूरत आँखों को पढने का अभी तक शौक है मुझे

महोब्बत में उजड़ के भी मेरी आदत नहीं गयी​
 
छलकती है निग़ाहों से, झलकती है अदाओं से ..

फिर कौन कहता है के मोहोब्बत पहचानी नहीं जाती !!​
 
खुद को बहुत अधुरा सा महसूस करता हूँ

जाने कौन छोड़ गया मुझे तामीर करते-करते ........​
 
हम महोब्बत करने वाले वो मरीज़ हैं ..

जिन्हें मर्ज़ तो मालूम है, मगर इलाज नही !!!..​
 
मेरी महोब्बत भी अजीब थी,
मेरे जलवे भी थे कमाल पर !!
कभी सब कुछ मिला बिना तलब,
कभी कुछ ना मिला सवाल पर .!!​
 
ये अदाएं, ये तबस्सुम, ये मस्त निगाहें !

अजी छोड़ो ! इनके चक्कर में कहीं हम फिर ना उजड़ जाएँ ..​
 
होती है लाख गम की दवा नींद भी

मगर कुछ गम भी है, जो सोने नहीं देते !!​
 
कोई मिल जाए तुम जैसा,. ये ना-मुमकिन है ..

पर तुम ढूँढ लो हम जैसा.. इतना आसान ये भी नहीं ..​
 
आ जाये तू किसी दिन, ऐसा भी नहीं लगता !,

लेकिन वो तेरा वादा झूठा भी नहीं लगता !​
 
मिलती ही नहीं मुझे ग़म-ऐ-दुनिया के लिए फुर्सत !!

सोयें तो ख्वाब उनके, जागें तो ख्याल उनके !!.​
 
फिर नहीं बस्ते वो दिल जो एक बार उजड़ जाते हैं ,
कब्रें जितनी भी संवारो , वहां रोनक नहीं होती .......:​
 
तेरा रंग ऐसा चढ़ गया ...
कोई और रंग न चढ़ सके ..
तेरा नाम सीने पे लिखा ....
हर कोई आके पढ़ सके ​
 
Ansoon tere nikle aur aankhein meri ho,
Dil tera dhadke aur dhadkane meri ho,
Khuda kare hamaari dosti itni gehri ho,
Ki naukri tum karo aur salary meri ho.....​
 
Agar Sabko Mil Jaata Apna Humdum
Toh Yeh Ulfat Na Itne Uche Makam Hoti
Na Hota Zikr Aashiqon Ka Sadiyon
Mohabbat Fir Cheez Badi Hi Aam Hoti
.....!!
 
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