vijaykajla1
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मसर्रत पे रिवाजों का सख्त पहरा है,
ना जाने कौन सी उम्मीद पे दिल ठहरा है
तेरी आँखों में झलकते हुए इस गम की कसम,
ऐ दोस्त! दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा है...
ना जाने कौन सी उम्मीद पे दिल ठहरा है
तेरी आँखों में झलकते हुए इस गम की कसम,
ऐ दोस्त! दर्द का रिश्ता बहुत ही गहरा है...