Shayri (Part 1)

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इसीलिए तो बच्चो पर नूर सा बरसता है
शरारते तो करते है पर साज़िशे नहीं करते
 
बैठ जाता हूँ खाक पर अक्सर
अपनी औकात अच्छी लगती है
 
रिश्ते कभी मरते नहीं, क़त्ल होते हैं
कुछ कातिलों से मैं भी वाकिफ हूँ ...
 
जितने भी दोस्त मिले तजुर्बे में शुमार हो गए
पर कोई भी शख्स दोस्तों में शुमार न हो सका
 
गर रखने से रोज़े व्रत कुछ माँगा पूरा होता

फाके करता हर समय,वो ना सड़कों पर सोता !!
 
सोचता हूँ आज मेरा हाल क्या है
ढूंढ रहा हूँ जिसका जवाब
आखिर वो सवाल क्या है
 
Rehne de aasamaan.,zameen ki talash kar
Sab kuch yahin hai,kahin aur na talassh kar
har aarzoo puri ho, to jeene ka kya maja
jenne ke liye bas.. ek Ek khubsurat wajah ki talash kar..................
 
हादसे इंसान के संग, मसखरी करने लगे
लफ़्ज़ क़ागज़ पर उतर, जादूगरी करने लगे
क़ामयाबी जिसने पाई, उनके घर तो बस गये
जिनके दिल टूटे वो आशिक़, शायरी करने लगे
 
मेरी आवारगी भी कम नहीँ इबादत से,
जब मैँ पी लेता हूँ होटों पे ख़ुदा होता है,
उम्र भर साथ निभाएँगे सभी कहते हैँ,
ऐसा दिखलाओ हक़ीकत मेँ कहाँ होता है..
 
मेरी खुशियों को जमाने की नजर लग गई
लगता है मुझे मुस्कुराने की सजा मिल गई
 
ये तेरी खुशबू ही तो है...जो गुलाबों में बस्ती है...
वर्ना बागों में ...फूलों की क्या हस्ती है...
 
इतने बड़े शहर में कोई मयकदा नहीं,
लगता है इस शहर में कोई बेवफा नहीं!
 
दिन को कर लें जितनी भी सूरज की जी हजूरी
रात को चरागों के आगे ही सर झुकाते हैं लोग...
 
कौन किसको दिल में जगह देता है,
पेड़ भी सूखे पत्ते गिरा देता देता है|
वाकिफ़ हैं हम भी दुनिया के रिवाजों से,
रुक जायें सांसें तो अपना ही कोई जला देता है................
 
इस क़दर आँखों से दरिया की रवानी ही गई
दर्द के बादल उठे, धरती भी पानी हो गई
हाथ पीले कर नहीं सकती ग़रीबी क्या करे
बाप बूढ़ा ही गया, बिटिया सयानी हो गई
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is qadar aanhkon se dariya ki ravani ho gai
dard ke baadal uthe, dharti bhi pani ho gai
hath peele kr nahein sakti ghareebi kya kre
baap boodha ho gaye, bitiya sayani ho gai
 
दुनिया की इस भीड़ में बहुत से यार मिलेंगे,
हम क्या हमसे अच्छे हज़ार मिलेंगे,
इन अच्छो की भीड़ में करते रहना हमे भी याद,
हम भी कहाँ बार बार मिलेंगे...
 
तन्हाई का उसने मंज़र नहीं देखा !
अफ़सोस की मेरे दिल के अन्दर नहीं देखा !!
दिल टूटने का दर्द वो क्या जाने......!
वो लम्हा उसने कभी जी कर नहीं देखा !!
 
ज़िन्दगी औरो की बेवफाई से नहीं खुद के एहसास से चलती है
पतझर की रुत भी एक दिन तो बदलती है
हौसला गर है बुलंद और यकीन खुदा पे
बंज़र ज़मीन पे भी हसरतो की कोपल निकलती है
 
ये खामोस मीजाजी तुम्हे जीने नहीं देगी
इस दोर म जीना ह तो कोहराम मचा दो
 
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