Shayri (Part 1)

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आप तो...मोहोब्बत कर के...बैठ गएं...
मुझे...बस मेरे खोएं हुए...दिल की तलाश हैं...

यूँ तो हर बात का जवाब मैं नहीं देता,
पर...प्रश्न तुम्हारा है तो मुझे सोचना पड़ेगा.
आदमी शरीफ़ सा हूँ, जानते हैं सभी,
पर...तुम्हारे वास्ते रास्ता मोड़ना पड़ेगा.
 
ہم شرن انکے دوار لیتے کاش
اپنی قسمت سنوار لیتے کاش

آسمانوں سے کچھ حسیں غزلیں
اس زمیں پر اتار لیتے کاش
 
ہم شرن انکے دوار لیتے کاش
اپنی قسمت سنوار لیتے کاش

آسمانوں سے کچھ حسیں غزلیں
اس زمیں پر اتار لیتے کاش


भाई यो के स अब उर्दू भी सीखनी पड़ेगी के
 
बिखरी बिखरी सी अब जिंदगी हो गयी है
शायद किसी की अब कमी हो गयी है |

चैन ओ सुकून खो गया हैं कही पर
दिल में एक अजीब सी बेकली हो गयी है |

गम में भी मुस्कुराया करते थे मेरे लब
उनकी मुस्कराहट अब जाने कहा खो गयी है |

टूट कर यू रोया आज मुद्दतों के बाद में
जैसे हर उम्मीद अब खत्म हो गयी है |

वक्त का तकाजा था या यही किस्मत में था ‘संदीप’
हर एक मेरी चीज जाने कही गुम हो गयी है |
 
Ha mera har lamha chura liya aapne ,,
Aakho ko ek chand dekha deya aapne ,,
Hume zindagi de kisi aur ne ,,
Par pyaar itna dekar jeena sikhaya aap ne…
 
Samjha Na Koi Dil Ki Baat Ko,
Dard Duniya Ne Bina Soche Hi De Diya,
Jo Sah Gaye Har Dard Ko Hum Chupke Se,
To Humko Hi Patthar-Dil Kah Diya…
 
शायद इश्क उतर रहा है सिर से,

मुझे अल्फाज नहीँ मिलते शायरी के लिए...!!
 
होटो को छुआ उसने अहसाह अब तक है
आंखे नम ओर सांसो में आग अब तक है
वक्त गुजर गया पर उसकी याद नहीं गई
"उफ्फ" उस हरी मिर्च का स्वाद अब तक है
 
हम उसकी याद में इतनी दूर निकल आये यारो
के रिक्शा आला वापसी के १०० रुपे मांग रहा है
 
सख्त सच सी कभी ,
ख्वाब सी मखमली
कभी,
कुछ हकीकत लगी , कुछ भरम जिंदगी..!!
रूठ कर और ज्यादा सलोनी लगी ,
बेवफा है, मगर है सनम जिंदगी ..!!
 

ना कम हो कभी गुलाबी रंग बहार का
खुदा और बढ़ाए नूर तेरे रुखसार का

पड़ते रहे हमेशा हंसते वक्त डिम्पल
यूं ही जले जी तुझे देखकर गुलज़ार का
 
मंजिले इन्सान के होसले आजमाती है,
सपनो के परदे आँखों से हटाती है,
किसी भी बात से हिम्मत ना हारना,
ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है
 
"राणा का ठीकाना .......ठेका र थाना". ..nahi .."राणा का ठीकाणा .......ठेका र थाणा". jab jamega.....nahi to pahchan liya jayega
 
वो आये मेरी कब्र पर दीया बुझा के चल दिए.
दीये में जितना तेल था सर पे लगा के चल दिए..
 
वो आये मेरी कब्र पर दीया बुझा के चल दिए.
दीये में जितना तेल था सर पे लगा के चल दिए..

hahhahahahaha kasuta sher likh diya bhai....
दीये में जितना तेल था सर पे लगा के चल दिए.
ya line to kasuti likh di............
 
वो आये मेरी कब्र पर दीया बुझा के चल दिए.
दीये में जितना तेल था सर पे लगा के चल दिए..

डॉक्टर साब ये तो शेर नहीं , बब्बर शेर था हाहाहा !!
 
अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबो में मिले
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबो में मिले

ढूंड उजड़े हुए लोगो में वफ़ा की खुशबू
ये खजाने तुझे मुमकिन है खराबो में मिले

तू खुदा है न मेरा इश्क फरिश्तो जैसा
दोनों इंसा है तो क्यों इतने हिजाबो में मिले

ग़म ऐ दुनिया भी गम ऐ यार में शामिल कर लो
नशा बहता है शराबो में तो शराबो में मिले
 
[h=5]दिल नाज़ुक है, हसरतो से भरा है, कभी पत्थर बन जाता है
बहुत सख्त जान भी है, जाने क्या क्या कर जाता है
जगह भी पायी जिस्म में तो वो भी पेट के ऊपर
फिर भी ये कमबख्त , इक खाली पेट से हार जाता है....[/h]
 
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