Shayri (Part 1)

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रब्ब दा रुत्बा अपणी ठां ते यार दा रुत्बा वख
रब्ब नू तरसे आत्मा, यार नूं तरसे अंख
दुनिया दे विच वधमूल्ले दोनहा दे दिदार
पर सब तों ओखा लबणा लोको एक खुदा ते एक यार
 
ना इश्क बा अदब रहा ना हुस्न बा हया रहा

हवस की धूम धाम है नगर नगर गली गली !!
 
उस शख्स से बस इतना सा ताल्लुक है ,

वो परेशान हो तो हमें नींद नहीं आती !!
 
[h=5]जब वो लौटा ...तो घर पर कोई न था...
कभी वो भी दिन थे...जब इंतज़ार दरवाज़ा खोला करता था..[/h]
 
[h=5]धागा जब टूटा ...तो रेशा रेशा ज़ख़्मी हुआ...
वो बात और ...की कभी डोर हुआ करता था...[/h]
 
एक गुजारिश है तुझसे जरा थम के बरसना
आ जाए जब मेरा महबूब तो जरा झम से बरसना
यूं पहले ना बरसना की वो आ ना सके
आ जाए मेरे पास तो इतना बरसना की वो जा ना सके
 
Unse milne ka bahana na aaya,
Ruthe piya to manana na aaya,
Unhe to hume yaad karane ka waqt nahi,
Or hum hai ki unhe bhulana na aaya.
 
Wo pass hi na aaye to izhaar kya karte
Khud bane nishana to shikar kya karte
Marne par bhi khuli rahe humari aankhien
Isse jyada kisi ka intezaar kya karte
 
gum mila to ro na ske
khushi mili to hans na ske
zindgi ka hi khwab tha
jise chaha use pa na ske

गम मिला तो हंस लिए ,
ख़ुशी मिली तो रो लिए ,
जिन्दगी में कोई ख्वाब ही नहीं था ,
जो मिला उस्सी के हो लिए |---रवि"अतृप्त"
 
वो रोया तो बहुत पर मुझसे मुह मोड़ के रोया
कोई मजबूरी होगी उसकी जो दिल तोड़ के रोया ||
मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकड़े
पता लगा मेरे पीछे वो उन्हें जोड़ के रोया ||
 
हादसे इंसान के संग, मसखरी करने लगे
लफ़्ज़ क़ागज़ पर उतर, जादूगरी करने लगे
क़ामयाबी जिसने पाई, उनके घर तो बस गये
जिनके दिल टूटे वो आशिक़, शायरी करने लगे........
 
आंसुओ को लाया मत करो,
दिल की बात बताया मत करो,
लोग मुठ्ठी मे नमक लिये फिरते है,
अपने जख्म किसी को दिखाया मत करो।.......
 
मौत तों बाद याद आ रया है कोई
मिट्टी मेरी कबर तों उठा रया है कोई
ए खुदा दो पल की जिंदगी होर दे दे
मेरी कबर तों उदास जा रया है कोई
 
तू लख भूला के वेख ले
असी यारी फेर वी निभावांगे
तू पानी पी पी वेख ले
असी हिचकी बण बण आवांगे
 
[h=5]किसी ने तोड़ डाले सारे सपने
कोई सपने संजोता जा रहा है
किसी के तंज़ थमते ही नहीं हैं
कोई दामन भिगोता जा रहा है[/h]
 
[h=5]"ये वो ही इरादें हैं ये वो ही तबस्सुम है,
हर एक मोहल्लत में बस दर्द का आलम है,
इतनी उदास बातें, इतना उदास लहजा ,
लगता है की तुम को भी,हम सा ही कोई गम है ...."[/h]
 
[h=5]है यकीं सब को कि इस बार चली जाएगी,
आप के हाथ से पतवार चली जाएगी ,
आम इंसान के ज़ज्बों को कुचलने वाले ,
इस इलेक्शन में ये सरकार चली जाएगी......!
[/h]
 
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