ravinderjeet
New member
भाई साहब आप जाट की बात कह रहे है या हरयानवी भाषा की। क्योंकि जाट तो कई प्रान्तों मैं हैं । ओर उनकी भाषा भी अलग अलग है। तो सभी हरयानवी कैसे बोले।
कुछ भाई नोकरी करते हैं । उनको तो अपने बॉस की भाषा बोलनी पड़ेगी। कुछ भाई बिज़नस करते हैं उन्हें कस्टमर के भाषा ही बोलनी पड़ेगी नहीं तो धंधा बंद हो जाएगा। हम तो तमिलनाडू मैं कम केर रहे है ओर हमें तमिल ही बोलनी पड़ती है।
हमें अपनी जाट की पहचान बनाकर रखनी है। हरयानवी तो सारे हरयाणा के लोगों की भाषा है न केवल जाटों की भाषा है।
दूसरी जाती ओर समुदायों के लोग तो सबसे ज्यादा यूनाइटेड जाटों को ही समझते हैं।
बजरंग भाई , आड़े बात हरयाणा के जाट्टां की चाल री स | राजस्थानी जाट आपणी बागड़ी बोली बोलें सें आपस में ,चाहे कित्ते भी चाले जाओ | पंजाबी जाट अपणी पंजाबी बोलें सें आपस में | या मुस्किल जट्टू (हरयाणा ,दिल्ली ,पश्चमी उत्तर परदेश )बोलण आल्याँ की स | जो पढ़ लिख जावें सें वे ना बोलदे इह तागे पे-ए देख ल्यो आप | "मन्ने आपणी बोली प्यारी लागे स" या भी अंग्रेजी में बताई स , इब्ब सारे आपस में बतलावें सें आपणी बोली जरुर बोलणी चाहिए |हामने बड़ी प्यारी लागे स पर अंग्रेजी में बतावें सें या बात भी | केरा इब्ब आप समझगे होंगे | हाथ कंगन को आरसी क्या |