Successfull Marriage

The times are changing brothers !!
the roles are reversing. Jat community has not witnessed it much but the winds of change are upon us.
A recent article in TOI gave out the changing scenario where in Girls are getting more independent and Boys are looking to settling down in marriages with a child at the earliest.
But what was even interesting read was the dependency of the girl's changing habits with the men(husband) in their support.
They cant take it alone all the way !!
 
Successful marriage,compromize ka doosra naam hai.jitna jyada compromise karoge marriage utni hi jyada successful rahegi.
mene jo bhi dekha hai is chhoti si life mai.usme bas itna jaana hai ki apne ko 1 gift pack ki tarah present karo.gift pack me kya hai ye matter nahi karta doosro ke liye(including ur wife/husband).bas bahar se pack sundar hona chahiye.bahar se sundar nahi hai to ander chahe kitna bhi acha rahe.wo bekar hi hai.iner part aapke liye matter karta hai but for rest of the world,it is outer part which matter most.So apne pack ko maintain karke rakkho.decorate karte raho.marriage kya,sab relation successful rahenge.

Ache ya bure ki bahut baate hoti hai.acha kon hai????wahi acha hai jisne apni buraiyo ko jyada chhupa liya.agar kisi mai 1 hi kami hai aur usne wo bta di to wo bura ho jata hai in 100 kamiyo waale se bhi.
some says love jaruri hai.love se to aur jyada prblm hi hoti hai.love yourself.kisi doosre se kroge to attachment ban jayega.aur attachment sb prblms ki jad hai.


Now for Upendra ji..

upendra ji jaisa aapne likha hai.wesa to nahi hai abhi tak.ye sab dikhta jyada hai.haa kuchh % to hai hi aise.wo pahle bhi the,ab bhi hai aur aage bhi rahenge.ye wesa hai hai jaise kisi Bag mai 100 ball ho(80 light color and 20 dark color).to hume lagta hai ki saara bag dark color ki balls se bhara hua hai.1 Vishwamitra ki tapasya bhang hui thi ladki ki wajah se.wo sabko yaad hai but kitne laakh Rishi muni hue jo successful hue.unhe koi yaad naa karta.
First to itni buri condition aayi nahi hai.agar aa bhi jaye to Atom bomb ki need nahi hogi.west is also a part of earth.waha to bahut pahle se ye sab hai.aur kahi jyada hai.ab tak to Atom bomb ka use ho gya hota :) :) :) :)

mera conclusion hai ki apni pasand naa thopo kisi par.apne liye Gift pack ke iner part ko acha rakkho and doosro ke liye outer ko.
 
उपेन्द्र भाई, आपने जो लिखा है, उसमे आज के लोगो में बढते हुए दानव का वास्तविक चित्रण है. सदियों से समाज में चलती आ रही इन दानवता को कम करने के लिए कठोर नियम रहे है !! हर इंसान को लाचारी से रोकने के लिए उसे भगवान् और दंड के भय का सहारा लिया गया है .. और ये बातें आज कहा .. स्वछंदता तो आज इस कदर हावी होती जा रही है, आगे की स्तिथि और भी बयावाह हो सकती है !!

बिलकुल ठीक कही भाई आपने. इंसान का नैतिक और चारित्रिक पतन अपने शीर्ष पर है.

आज भी योगी है जो समाज के हर हिस्से में शामिल है, जो लाचार नहीं है और उन्होंने साबित किया है की नेतृत्व करने के काबिल केवल वही व्यक्ति है जो सबसे पहले अपने आप को नेतृत्व कर सके और जिंदगी के हर पल में अनुशाषित रहे.

भाई, मैं आपकी बात को काटना तो नहीं चाहता, लेकिन यकीन मानो कहीं कोई योगी नहीं है ऐसा. यदि हैं तो बस उंगलियों पर गिनने योग्य, वो भी आधे-अधूरे, 'मतलब 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली' जैसा कुछ. बाबा रामदेव है इस तरह का, लेकिन ये कब से ऐसा है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. ये जितने भी साधू-संत, ऋषि-मुनि होते हैं, इनकी सोच ये होती है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही जीवन का उद्देश्य है. ऐसे में जो साध्वियां होती हैं, उनसे ये संबंध बना लेते हैं, नहीं तो अन्य स्त्रियों को अपने प्रेम जाल में फंसा लेते हैं.

बुराई के रास्तें पे चलने वाले तो हजारो मिल जायेगे, नहीं मिल पाएंगे तो वो जो लोगो को सच्चाई बताकर लोगो को सही दिशा में मोड़ सके.

आज देखा जाये तो कोई भी व्यक्ति अपने विचारो के विरोध में जाने वाले समूह में रहना पसंद नहीं करता. क्यूँ आजकल कबीर और रहीम के वो शिक्षा परख उपदेश भूलते जा रहे है ...

निंदक नियरे राखिये आँगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुभाय.

हर तरफ लालच, मोह, मद का आलम है .. हर कोई अपने छोटे-मोटे कर्मो का गुणगान करते हुए नहीं थकता !!

सादी का प्रारभ तो बिज़नस से सुरु होता है , और बस समझोतों पे रह जाता है !!!

ऋतू जी ने बहुत सच्ची बात कही है, जब तक आपस-में प्यार, विश्वास और समझदारी नहीं होगी .. सादी की सफलता पे संदेह उठते रहेंगे ..

कुछ यूँ देखा है हमने भी....

जिंदगी यूँ समझोतों में बदलती जाएगी, एहसास-ए तकदीर ना हुआ कभी,
लाचारी यूँ इस कदर झुकाती जायेगी, ईमान-ए धर्मं ना हुआ कभी,
हर पल एक लड़ने की क्वाहिश थी हमारी सब बुराईयों से,
अपनो की ही मजबूरी यूँ दबाती जाएगी, हिम्मत-ए दर्द ना हुआ कभी !!

बहुत सही कहा आपने और बहुत ही अच्छा लिखा.
 
Upender ji,
आपने काफी तीखे शब्दों में जो तथ्य लिखे है ,,कोई भी उन को पढ़ कर असमंजस की स्तिथि में पहुँच सकता है ..!! मुझे लगता है की ऐसी ज्यादातर बातें बड़े शहरों में होती हैं जहाँ लोग cosmopolitain culture के रखवाले हो गए हैं ..!!

भाई ऐसी बातें आजकल हर जगह हो रही हैं और बहुत ही ज्यादा हो रही हैं. इसके बावजूद मैं ये भी तो कह रहा हूं कि कुछ अच्छी लड़कियां भी हैं, लेकिन केवल 22-23 साल तक की.
पहले होती थीं चरित्रवान स्त्रियां, लेकिन यदि वर्तमान में कोई 40 साल से ज्यादा उम्र की विवाहिता स्त्री ये कह दे कि उसके जीवन में आज तक बस एक पुरुष आया है और वो उसका पति है तो मैं तो उसे देवी मान लूंगा और उससे बहुत ही ज्यादा प्रभावित हो जाऊंगा. अपने आस-पास नजरें तो दौड़ाओ.
मैं आपको ये जरूर कहूंगा कि यदि हम यह कहते हैं कि कोई इस फलां लड़की या लड़के की उम्र 20 साल से ज्यादा है, लेकिन मजाल है इसने कभी चरित्रहीनता जैसा कुछ किया हो तो फिर हम ये कहते हैं कि इस फलां लड़की या लड़के ने कभी भोजन नहीं किया या पानी नहीं पिया. कहने का मतलब यह कि 15 साल की उम्र के बाद लड़की हो या लड़का, इंसान में विपरीत लिंग का जो आकर्षण बनता है, सेक्स संबंधी जो दबाव बनता है, उसे झेलना लगभग असंभव है. तो ये सोचना ही अपने आपको ग़लतफ़हमी में रखना है कि ऐसी बातें केवल शहरों में होती हैं. वैसे सबके अपने-अपने विचार हैं.

और अगर ये तथ्य सभी जगहों के है तो स्वत: ही परमाणु बोम्ब की आवशयकता है ..लगता है की सारा समाज ही गर्त में जा रहा है...!!

जब -जब भी इस संसार में सारा समाज गर्त में जाने लगता है तो इतिहास गवाह है कि यहां भारी तबाही मचती है. इंसान को इंसान से गुस्सा आने लगता है.

मैं ये मानता हु की पहले भी ये सब होता था (लेकिन छुपा रहता था )..अब भी ये होता है,,और आगे भी ये होता रहेगा ,,क्यूंकि "Human is still an animal ,so what if evolved a bit "
परन्तु अगर आप इसे generalize fact बता रहे हैं तो मैं असहमत हूँ ..!! क्युकी इस प्रकार तो आप सारे समाज पर ऊँगली उठा रहे हैं ..और फिर कोई भी अछूता नहीं रह जाता ..!!

भाई, आपने बहुत ही बढ़िया बात कही. ये इंसानी जीवन का हिस्सा है. इस दुनिया को इस ढंग से बनाया गया है कि बिना मेहनत कुछ भी अच्छा नहीं होगा. यदि चरित्रवान बच्चे चाहिए तो उन पर मेहनत करनी पड़ेगी. चरित्रवान जीवनसाथी चाहिए तो उसके लिए मेहनत करनी होगी.
भाई, लड़कियों में तो मैंने 20-25 प्रतिशत पर कोई उंगली नहीं उठाई और लड़कों के लिए भी 'लगभग' लगा दिया. मैंने केवल अपने विचार जाहिर किए हैं. हो सकता है वैसा ना हो, लेकिन बहुत मुश्किल है. सच बताऊं तो मैं ऐसे इंसान देखना चाहूंगा, जो सेक्स के सामने लाचार ना हों और जिन्होंने शादी से पहले सेक्स को ठुकरा दिया हो. ऐसे लोगों से मिलना तो मैं अपने जीवन की विशेष घटना मानूंगा. अभी तक जितने भी इंसान आपके संपर्क में आए, उन्हीं को देख लो. सब जगह ऐसे ही इंसान हैं.
 
Successful marriage,compromize ka doosra naam hai.jitna jyada compromise karoge marriage utni hi jyada successful rahegi.
mene jo bhi dekha hai is chhoti si life mai.usme bas itna jaana hai ki apne ko 1 gift pack ki tarah present karo.gift pack me kya hai ye matter nahi karta doosro ke liye(including ur wife/husband).bas bahar se pack sundar hona chahiye.bahar se sundar nahi hai to ander chahe kitna bhi acha rahe.wo bekar hi hai.iner part aapke liye matter karta hai but for rest of the world,it is outer part which matter most.So apne pack ko maintain karke rakkho.decorate karte raho.marriage kya,sab relation successful rahenge.

भाई, वैसे तो ये आपने निजी विचार हैं, लेकिन जो परामर्श आपने दिया है, वैसा ही तो अधिकतर लोग करते हैं. उनके अंदर क्या है, वे कहां बताते हैं? अधिकतर इंसान अंदर से कुछ और होते हैं और बाहर से कुछ और. ऐसा करना मैं नहीं समझता कि एक सफल विवाह के लिए कारगर और प्रभावी है. यदि कोई इंसान अंदर से भ्रष्ट है तो वो उसे कैसे छुपा पाएगा? शराबी है तो तो उसका नशे में होना भला कैसे छुपेगा? ऐयाश है तो भी नहीं छुप सकेगा. अब आप ही बताओ कि जो परामर्श आपने दिया है, वैसा किया कैसे जाए?

Ache ya bure ki bahut baate hoti hai.acha kon hai????
अच्छा वो है, जिसने दूसरों के साथ ऐसे काम ना किए हों, जो वो अपने साथ नहीं चाहता कि दूसरे करें. अच्छा वो है जिसने समाज के लिए कुछ ऐसा किया हो, जिससे सबका भला हुआ हो और सबका जीवन बेहतर बना हो. बुरे काम क्या हैं, अच्छे काम क्या हैं, ये इस सारी दुनिया को बहुत अच्छी तरह से पता है. आपका ये सवाल तब प्रासंगिक होता, जब इंसान असभ्य था और अपने शुरुआती दौर में था.

wahi acha hai jisne apni buraiyo ko jyada chhupa liya.agar kisi mai 1 hi kami hai aur usne wo bta di to wo bura ho jata hai in 100 kamiyo waale se bhi.

बुराई या अच्छाई कभी ना कभी सामने आ ही जाती है. जिन लोगों के साथ बुराई की हैं, वे ही भेद खोल देते हैं. इंसान तो अपनी बुराइयों के बारे में कभी भी बताना नहीं चाहता, लेकिन ये दुनिया ही उसका मुखौटा उतार फेंकती है. कोई अपनी बुराई खुद ही बता दे तो उसे तो दुनिया माफ़ कर देती है. इसी प्रकार अच्छाई सामने आने पर दुनिया उस व्यक्ति की प्रशंसा भी करती है.

some says love jaruri hai.love se to aur jyada prblm hi hoti hai.love yourself.kisi doosre se kroge to attachment ban jayega.aur attachment sb prblms ki jad hai.

प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है. जिस तरह से इंसान को भोजन चाहिए, पानी चाहिए, उसी तरह से प्यार भी चाहिए.

Now for Upendra ji..
upendra ji jaisa aapne likha hai.wesa to nahi hai abhi tak.ye sab dikhta jyada hai.haa kuchh % to hai hi aise.wo pahle bhi the,ab bhi hai aur aage bhi rahenge.ye wesa hai hai jaise kisi Bag mai 100 ball ho(80 light color and 20 dark color).to hume lagta hai ki saara bag dark color ki balls se bhara hua hai.1 Vishwamitra ki tapasya bhang hui thi ladki ki wajah se.wo sabko yaad hai but kitne laakh Rishi muni hue jo successful hue.unhe koi yaad naa karta.
First to itni buri condition aayi nahi hai.agar aa bhi jaye to Atom bomb ki need nahi hogi.west is also a part of earth.waha to bahut pahle se ye sab hai.aur kahi jyada hai.ab tak to Atom bomb ka use ho gya hota :) :) :) :)

mera conclusion hai ki apni pasand naa thopo kisi par.apne liye Gift pack ke iner part ko acha rakkho and doosro ke liye outer ko.
भाई, अभी जीवन का आपका तजुर्बा कम उम्र होने की वजह से पर्याप्त नहीं है. जो बातें आपने कही हैं, यदि वे ही बातें जो यहां के कुछ वरिष्ठ और उम्रदराज सदस्य हैं, वे कहते तो शायद मैं थोड़ा चिंतन करता. जैसे-जैसे आपकी उम्र बढती जाएगी और जीवन का आपका तजुर्बा बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे इस संसार की कालिमा आपके सामने स्पष्ट होती जाएगी.
 
Last edited:
Upendra ji mene ye nahi kaha ki Love glat hai.Love to sabse achi feeling hoti hai.lekin tabhi tak jab tak wo attachment na ho jaye.attachment se expectation badh jaati hai.

Chhupate to hai log.aur kisi se chhupe ya nahi bas us person se chhupa rahe jisko jyada prblm hogi ya jisko pta chalne se hume jyada prblm ho.
Ache bure ko defined karna itna aasan bhi nahi.1 exp btata hu aapko.mein 1 person ko jaanta hu.charity works bhi karta hai.milansaar bhi hai.apni wife ki care bhi karta hai.sabhi gun hai usme 1 ache insan ke(including good job).But uske shadi se pahle bhi girls se relation the and shadi ke baad bhi hai.aap use acha kahega ya bura.jo uski kami jaanta ahi uske liye bura hai wo but for rest of the world bahut acha hai.
upendra ji exp itna kam bhi nahi hai.mene aapse bas ye kaha tha ki in sab baato ko generlise nahi kar sakte.ache and bure,dono type ke log hote hai.ab aap ye btaye ki agar mene 1 family aisi bhi dekhi hai jo socialy reputed hai.usi reputed family mai mother and daughter ke relation same person se hai.to kya mai sab mother and daughter ke relation ko usi najar se dekhne lagu.
aisa nahi hota hai.
Jin pre-mariatal and extra mariatal affair ki bata aapne ki thi.hote hai bahut log aise but not all.
Aap kisi se bhi poochhiye wo yahi kahega ki ladka/ladki ache ho shadi ke liye.money matter nahi karti itna.
but jab karte hai tab shayad yahi sabse jyada matter karta hai.agar ladki ko 2 ladko mai se choose karne ko kaha jaye.jinme se 1 ka koi affair na raha ho but rich na ho and doosra rich ho but affair rahe ho.to jyadatar girls ki pasand 2nd waala hoga.
isi se encouragement milta hai doosro ko bhi.sochte hai ki pta chal bhi jayega to kya hai.money se ye sab hide ho jayega.



भाई, वैसे तो ये आपने निजी विचार हैं, लेकिन जो परामर्श आपने दिया है, वैसा ही तो अधिकतर लोग करते हैं. उनके अंदर क्या है, वे कहां बताते हैं? अधिकतर इंसान अंदर से कुछ और होते हैं और बाहर से कुछ और. ऐसा करना मैं नहीं समझता कि एक सफल विवाह के लिए कारगर और प्रभावी है. यदि कोई इंसान अंदर से भ्रष्ट है तो वो उसे कैसे छुपा पाएगा? शराबी है तो तो उसका नशे में होना भला कैसे छुपेगा? ऐयाश है तो भी नहीं छुप सकेगा. अब आप ही बताओ कि जो परामर्श आपने दिया है, वैसा किया कैसे जाए?


अच्छा वो है, जिसने दूसरों के साथ ऐसे काम ना किए हों, जो वो अपने साथ नहीं चाहता कि दूसरे करें. अच्छा वो है जिसने समाज के लिए कुछ ऐसा किया हो, जिससे सबका भला हुआ हो और सबका जीवन बेहतर बना हो. बुरे काम क्या हैं, अच्छे काम क्या हैं, ये इस सारी दुनिया को बहुत अच्छी तरह से पता है. आपका ये सवाल तब प्रासंगिक होता, जब इंसान असभ्य था और अपने शुरुआती दौर में था.



बुराई या अच्छाई कभी ना कभी सामने आ ही जाती है. जिन लोगों के साथ बुराई की हैं, वे ही भेद खोल देते हैं. इंसान तो अपनी बुराइयों के बारे में कभी भी बताना नहीं चाहता, लेकिन ये दुनिया ही उसका मुखौटा उतार फेंकती है. कोई अपनी बुराई खुद ही बता दे तो उसे तो दुनिया माफ़ कर देती है. इसी प्रकार अच्छाई सामने आने पर दुनिया उस व्यक्ति की प्रशंसा भी करती है.



प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है. जिस तरह से इंसान को भोजन चाहिए, पानी चाहिए, उसी तरह से प्यार भी चाहिए.


भाई, अभी जीवन का आपका तजुर्बा कम उम्र होने की वजह से पर्याप्त नहीं है. जो बातें आपने कही हैं, यदि वे ही बातें जो यहां के कुछ वरिष्ठ और उम्रदराज सदस्य हैं, वे कहते तो शायद मैं थोड़ा चिंतन करता. जैसे-जैसे आपकी उम्र बढती जाएगी और जीवन का आपका तजुर्बा बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे इस संसार की कालिमा आपके सामने स्पष्ट होती जाएगी.
 
Upendra ji mene ye nahi kaha ki Love glat hai.Love to sabse achi feeling hoti hai.lekin tabhi tak jab tak wo attachment na ho jaye.attachment se expectation badh jaati hai.
भाई, इस अटैचमेंट से कोई कहां-कहां बचेगा? दुनियादारी में रहने पर अटैचमेंट से बचना नामुमकिन है. क्या बच्चों से अटैचमेंट नहीं होता? क्या परिवार के अन्य सदस्यों से अटैचमेंट नहीं होता? अटैचमेंट से बचने ले लिए ही तो बहुत-से लोग सब घर-बार छोड़कर जंगलों की ख़ाक छानते फिरते हैं, इसके बावजूद अधिकांशतः माया-मोह नहीं छोड़ पाते. जीवन साथी के महत्व को समझने का प्रयास करो. कोई भी इंसान हमेशा जवान नहीं रहता. 35-40 साल की उम्र के बाद कभी भी कोई बड़ी बीमारी का आक्रमण हो सकता है. ऐसे में अगर जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो कौन अस्पताल में लेकर जाएगा, कौन वहां देखभाल करेगा? अपने आस-पास के जो लोग 35-40 से ज्यादा उम्र के हैं, उनके जीवन पर ध्यान दो. क्या उन्हें कोई बीमारी लगी थी और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था? यदि हां तो किसने उनकी देखभाल की थी? यदि जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो क्या उसे इसका अहसास नहीं हो जाएगा?
Chhupate to hai log.aur kisi se chhupe ya nahi bas us person se chhupa rahe jisko jyada prblm hogi ya jisko pta chalne se hume jyada prblm ho.
ऐसा काम ही क्यों करो, जो छुपाना पड़े? शरीर की भूख को शांत करने के लिए जीवन साथी मिला हुआ है तो फिर इधर-उधर मुंह मारना क्या जरूरी है? शादी होने से पहले ही पति-पत्नी को आपस में ये वादा करना चाहिए कि हमें एक-दूसरे की बीती जिंदगी से कोई मतलब नहीं है, लेकिन हम आने वाले समय में हमेशा एक-दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे. जब दोनों को काफी साल इस तरह से बीत जाएंगे, तब देखना इस बाकी दुनिया को और एक-दूसरे को वे कितने अच्छे लगते हैं.
Ache bure ko defined karna itna aasan bhi nahi.1 exp btata hu aapko.mein 1 person ko jaanta hu.charity works bhi karta hai.milansaar bhi hai.apni wife ki care bhi karta hai.sabhi gun hai usme 1 ache insan ke(including good job).But uske shadi se pahle bhi girls se relation the and shadi ke baad bhi hai.aap use acha kahega ya bura.jo uski kami jaanta ahi uske liye bura hai wo but for rest of the world bahut acha hai.
जिस तरह से 70% या इससे ज्यादा नंबर लाने वाले को होशियार समझा जाता है, उसी तरीके से हम इस मामले को समझ सकते हैं. ये शख्स अच्छा तो है, लेकिन पूरी तरह से अच्छा नहीं है. नंबर होशियारों वाले तो है, लेकिन 100 में 100 नहीं हैं. यदि मैं अच्छा हूं, लेकिन दुनिया मुझे बुरा समझती है तो वो स्थिति उस स्थिति से अच्छी है कि दुनिया मुझे अच्छा समझती है, लेकिन मैं बुरा हूं. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत को तो पता है मैं अच्छा हूं. जब मैं एकांत में अपने बारे में विचारूंगा तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा तो नहीं. दुनिया में लगभग 30,000 बीमारियां हैं, जिनमें से लगभग 7000 जटिल हैं. ये सब इस दुनिया को बुरे कर्मों का सबक सिखाने के लिए हैं. जो अच्छे इंसान होंगे वे ज्यादा दुखी नहीं होंगे, लेकिन जो बुरे होंगे, वे ज्यादा दुखी होंगे. पूरी तरह से दुखों से दूर रहने के लिए यहां कुछ ऐसा करना जरूरी है, जैसा न तो पहले किसी ने किया हो और न ही कभी कोई कर सके. वो इंसान होगा अमर, चिर युवा, हर तरह से प्रसन्न. ऐसा आज तक कोई नहीं हो सका है, क्योंकि ऐसा होने का मतलब है इस पूरी दुनिया का मालिक होना, ईश्वर, खुदा, अल्लाह होना.
upendra ji exp itna kam bhi nahi hai.mene aapse bas ye kaha tha ki in sab baato ko generlise nahi kar sakte.ache and bure,dono type ke log hote hai.ab aap ye btaye ki agar mene 1 family aisi bhi dekhi hai jo socialy reputed hai.usi reputed family mai mother and daughter ke relation same person se hai.to kya mai sab mother and daughter ke relation ko usi najar se dekhne lagu.
aisa nahi hota hai.
Jin pre-mariatal and extra mariatal affair ki bata aapne ki thi.hote hai bahut log aise but not all.
33% नंबर से कम लाने वालों को बुद्धिहीन कहा जाता है. इनमें 32% वाला भी आ गया और 5% वाला भी. ये जो ऊपर हैं, ये ज्यादा बुरे हैं. कुछ लोग कम बुरे होते हैं, कुछ ज्यादा. जो भी इंसान यहां दुःख झेलकर, बूढा होकर मरता है, समझ लो वो पूरी तरह से अच्छा नहीं है. उससे कहीं न कहीं गलतियां हुई हैं. कोई इंसान कितना अच्छा है या कितना बुरा, इसका पता उसके अंजाम से चलेगा. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत से थोड़े ही कोई बच पाएगा. वो तो कण-कण में विद्यमान है.
Aap kisi se bhi poochhiye wo yahi kahega ki ladka/ladki ache ho shadi ke liye.money matter nahi karti itna.
but jab karte hai tab shayad yahi sabse jyada matter karta hai.agar ladki ko 2 ladko mai se choose karne ko kaha jaye.jinme se 1 ka koi affair na raha ho but rich na ho and doosra rich ho but affair rahe ho.to jyadatar girls ki pasand 2nd waala hoga.
isi se encouragement milta hai doosro ko bhi.sochte hai ki pta chal bhi jayega to kya hai.money se ye sab hide ho jayega.
यदि कोई लड़की शादी से पहले पूरी तरह से चरित्रवान रही है और उसके सामने 2 विकल्प हैं. एक धनवान, आकर्षक, लेकिन चरित्रहीन लड़का और दूसरा कम कमाने वाला, आकर्षक, लेकिन चरित्रवान लड़का. मैं नहीं समझता कि वो लड़की पहले वाले को पसंद करेगी, बशर्ते कि उस पर घरवालों का कोई दबाव न हो. मानो या न मानो शादी-ब्याह में बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व भी काफी मायने रखता है. जैसी लड़की होती है, उसके लिए वैसा ही लड़का ढूंढने का प्रयास किया जाता है. हां, यदि कोई लड़की चरित्रहीन है तो फिर तो वो धनवान, चरित्रहीन को ही चुनेगी और फिर वे दोनों जिंदगी-भर एक-दूसरे को धोखा देते रहेंगे.

नोट : ये सब लिखने का उद्देश्य केवल हल्की-फुल्की बातचीत है.
 
upendra ji, ye to sabko pta hai ki kya sahi and kya galat.fir bhi ye sab kyo ho raha hai.aisa dekha jaye to life bahut hi simple hai.
kisi ka bura na karo.khush raho.fir bhi world mai ye sab hota hai.
jaha tak ladki ki choice ki baat hai to characterless ko to bhale hi na pasand kare.but poor and good character wale se bhi nahi karegi.haa blindly kisi rich se jarur shadi kar legi.jiske baare mai pta na ho jyada.
aap dekh hi rahe honge ki aajkal jhoot bolkar shadi karne ka fasion aa gya hai.pahle sab 1-2sre ko jyada jaante the.so pta chal jata tha.aajkal to pdosi ko na jaante.isiliye pta na chal pata ki kisne kya jhoot bola hai.
ye sab aise hi chalta rahega.Bcos kahi na kahi money jyada haavi ho gayi hai.aur fir courage nahi hai logo mai ab.saara courage board-room tak hi simat kar rah gya hai.1 jagah aur dikhta hai courage.kam salary hote hue bhi jyada loan lene mai :) :)



भाई, इस अटैचमेंट से कोई कहां-कहां बचेगा? दुनियादारी में रहने पर अटैचमेंट से बचना नामुमकिन है. क्या बच्चों से अटैचमेंट नहीं होता? क्या परिवार के अन्य सदस्यों से अटैचमेंट नहीं होता? अटैचमेंट से बचने ले लिए ही तो बहुत-से लोग सब घर-बार छोड़कर जंगलों की ख़ाक छानते फिरते हैं, इसके बावजूद अधिकांशतः माया-मोह नहीं छोड़ पाते. जीवन साथी के महत्व को समझने का प्रयास करो. कोई भी इंसान हमेशा जवान नहीं रहता. 35-40 साल की उम्र के बाद कभी भी कोई बड़ी बीमारी का आक्रमण हो सकता है. ऐसे में अगर जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो कौन अस्पताल में लेकर जाएगा, कौन वहां देखभाल करेगा? अपने आस-पास के जो लोग 35-40 से ज्यादा उम्र के हैं, उनके जीवन पर ध्यान दो. क्या उन्हें कोई बीमारी लगी थी और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था? यदि हां तो किसने उनकी देखभाल की थी? यदि जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो क्या उसे इसका अहसास नहीं हो जाएगा?

ऐसा काम ही क्यों करो, जो छुपाना पड़े? शरीर की भूख को शांत करने के लिए जीवन साथी मिला हुआ है तो फिर इधर-उधर मुंह मारना क्या जरूरी है? शादी होने से पहले ही पति-पत्नी को आपस में ये वादा करना चाहिए कि हमें एक-दूसरे की बीती जिंदगी से कोई मतलब नहीं है, लेकिन हम आने वाले समय में हमेशा एक-दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे. जब दोनों को काफी साल इस तरह से बीत जाएंगे, तब देखना इस बाकी दुनिया को और एक-दूसरे को वे कितने अच्छे लगते हैं.

जिस तरह से 70% या इससे ज्यादा नंबर लाने वाले को होशियार समझा जाता है, उसी तरीके से हम इस मामले को समझ सकते हैं. ये शख्स अच्छा तो है, लेकिन पूरी तरह से अच्छा नहीं है. नंबर होशियारों वाले तो है, लेकिन 100 में 100 नहीं हैं. यदि मैं अच्छा हूं, लेकिन दुनिया मुझे बुरा समझती है तो वो स्थिति उस स्थिति से अच्छी है कि दुनिया मुझे अच्छा समझती है, लेकिन मैं बुरा हूं. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत को तो पता है मैं अच्छा हूं. जब मैं एकांत में अपने बारे में विचारूंगा तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा तो नहीं. दुनिया में लगभग 30,000 बीमारियां हैं, जिनमें से लगभग 7000 जटिल हैं. ये सब इस दुनिया को बुरे कर्मों का सबक सिखाने के लिए हैं. जो अच्छे इंसान होंगे वे ज्यादा दुखी नहीं होंगे, लेकिन जो बुरे होंगे, वे ज्यादा दुखी होंगे. पूरी तरह से दुखों से दूर रहने के लिए यहां कुछ ऐसा करना जरूरी है, जैसा न तो पहले किसी ने किया हो और न ही कभी कोई कर सके. वो इंसान होगा अमर, चिर युवा, हर तरह से प्रसन्न. ऐसा आज तक कोई नहीं हो सका है, क्योंकि ऐसा होने का मतलब है इस पूरी दुनिया का मालिक होना, ईश्वर, खुदा, अल्लाह होना.

33% नंबर से कम लाने वालों को बुद्धिहीन कहा जाता है. इनमें 32% वाला भी आ गया और 5% वाला भी. ये जो ऊपर हैं, ये ज्यादा बुरे हैं. कुछ लोग कम बुरे होते हैं, कुछ ज्यादा. जो भी इंसान यहां दुःख झेलकर, बूढा होकर मरता है, समझ लो वो पूरी तरह से अच्छा नहीं है. उससे कहीं न कहीं गलतियां हुई हैं. कोई इंसान कितना अच्छा है या कितना बुरा, इसका पता उसके अंजाम से चलेगा. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत से थोड़े ही कोई बच पाएगा. वो तो कण-कण में विद्यमान है.

यदि कोई लड़की शादी से पहले पूरी तरह से चरित्रवान रही है और उसके सामने 2 विकल्प हैं. एक धनवान, आकर्षक, लेकिन चरित्रहीन लड़का और दूसरा कम कमाने वाला, आकर्षक, लेकिन चरित्रवान लड़का. मैं नहीं समझता कि वो लड़की पहले वाले को पसंद करेगी, बशर्ते कि उस पर घरवालों का कोई दबाव न हो. मानो या न मानो शादी-ब्याह में बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व भी काफी मायने रखता है. जैसी लड़की होती है, उसके लिए वैसा ही लड़का ढूंढने का प्रयास किया जाता है. हां, यदि कोई लड़की चरित्रहीन है तो फिर तो वो धनवान, चरित्रहीन को ही चुनेगी और फिर वे दोनों जिंदगी-भर एक-दूसरे को धोखा देते रहेंगे.

नोट : ये सब लिखने का उद्देश्य केवल हल्की-फुल्की बातचीत है.
 
भाई, मैं आपकी बात को काटना तो नहीं चाहता, लेकिन यकीन मानो कहीं कोई योगी नहीं है ऐसा. यदि हैं तो बस उंगलियों पर गिनने योग्य, वो भी आधे-अधूरे, 'मतलब 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली' जैसा कुछ. बाबा रामदेव है इस तरह का, लेकिन ये कब से ऐसा है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. ये जितने भी साधू-संत, ऋषि-मुनि होते हैं, इनकी सोच ये होती है कि धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष ही जीवन का उद्देश्य है. ऐसे में जो साध्वियां होती हैं, उनसे ये संबंध बना लेते हैं, नहीं तो अन्य स्त्रियों को अपने प्रेम जाल में फंसा लेते हैं.

Main in Yogiyo ki baat nahi kar raha Upendra Ji.

Yogi wo hai, so man, karm aur vachan se pavitra ho. Yogi wo hai jo apni indriyo ko kaabu me rakhe.. jisko "kaam, kridh, mad, lobh, moh" jakad na paye, aur is tarah ke yogi ki pal-2 pariksha hoti hai. Aur aage wo badhata hai jo paar utarata hai.

Successful marriage,compromize ka doosra naam hai.jitna jyada compromise karoge marriage utni hi jyada successful rahegi.
mene jo bhi dekha hai is chhoti si life mai.usme bas itna jaana hai ki apne ko 1 gift pack ki tarah present karo.gift pack me kya hai ye matter nahi karta doosro ke liye(including ur wife/husband).bas bahar se pack sundar hona chahiye.bahar se sundar nahi hai to ander chahe kitna bhi acha rahe.wo bekar hi hai.iner part aapke liye matter karta hai but for rest of the world,it is outer part which matter most.So apne pack ko maintain karke rakkho.decorate karte raho.marriage kya,sab relation successful rahenge

Tomar bhai, aapne jo likha hai wo professional life ke baare me fit baithata hai.

Har waykti me energy ke pool hote hai, Use jab tak saare pools (kund) se energy nahi milegi wo poori tarah swasth nahi hoga aur uska kaam bhi sabhi ko raas na aayega.

Pools like: Emotional Energy, Knowledge energy, experience energy, financial energy etc...
 
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