भाई, इस अटैचमेंट से कोई कहां-कहां बचेगा? दुनियादारी में रहने पर अटैचमेंट से बचना नामुमकिन है. क्या बच्चों से अटैचमेंट नहीं होता? क्या परिवार के अन्य सदस्यों से अटैचमेंट नहीं होता? अटैचमेंट से बचने ले लिए ही तो बहुत-से लोग सब घर-बार छोड़कर जंगलों की ख़ाक छानते फिरते हैं, इसके बावजूद अधिकांशतः माया-मोह नहीं छोड़ पाते. जीवन साथी के महत्व को समझने का प्रयास करो. कोई भी इंसान हमेशा जवान नहीं रहता. 35-40 साल की उम्र के बाद कभी भी कोई बड़ी बीमारी का आक्रमण हो सकता है. ऐसे में अगर जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो कौन अस्पताल में लेकर जाएगा, कौन वहां देखभाल करेगा? अपने आस-पास के जो लोग 35-40 से ज्यादा उम्र के हैं, उनके जीवन पर ध्यान दो. क्या उन्हें कोई बीमारी लगी थी और अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था? यदि हां तो किसने उनकी देखभाल की थी? यदि जीवन साथी से प्यार नहीं करोगे तो क्या उसे इसका अहसास नहीं हो जाएगा?
ऐसा काम ही क्यों करो, जो छुपाना पड़े? शरीर की भूख को शांत करने के लिए जीवन साथी मिला हुआ है तो फिर इधर-उधर मुंह मारना क्या जरूरी है? शादी होने से पहले ही पति-पत्नी को आपस में ये वादा करना चाहिए कि हमें एक-दूसरे की बीती जिंदगी से कोई मतलब नहीं है, लेकिन हम आने वाले समय में हमेशा एक-दूसरे के प्रति वफादार रहेंगे. जब दोनों को काफी साल इस तरह से बीत जाएंगे, तब देखना इस बाकी दुनिया को और एक-दूसरे को वे कितने अच्छे लगते हैं.
जिस तरह से 70% या इससे ज्यादा नंबर लाने वाले को होशियार समझा जाता है, उसी तरीके से हम इस मामले को समझ सकते हैं. ये शख्स अच्छा तो है, लेकिन पूरी तरह से अच्छा नहीं है. नंबर होशियारों वाले तो है, लेकिन 100 में 100 नहीं हैं. यदि मैं अच्छा हूं, लेकिन दुनिया मुझे बुरा समझती है तो वो स्थिति उस स्थिति से अच्छी है कि दुनिया मुझे अच्छा समझती है, लेकिन मैं बुरा हूं. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत को तो पता है मैं अच्छा हूं. जब मैं एकांत में अपने बारे में विचारूंगा तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा तो नहीं. दुनिया में लगभग 30,000 बीमारियां हैं, जिनमें से लगभग 7000 जटिल हैं. ये सब इस दुनिया को बुरे कर्मों का सबक सिखाने के लिए हैं. जो अच्छे इंसान होंगे वे ज्यादा दुखी नहीं होंगे, लेकिन जो बुरे होंगे, वे ज्यादा दुखी होंगे. पूरी तरह से दुखों से दूर रहने के लिए यहां कुछ ऐसा करना जरूरी है, जैसा न तो पहले किसी ने किया हो और न ही कभी कोई कर सके. वो इंसान होगा अमर, चिर युवा, हर तरह से प्रसन्न. ऐसा आज तक कोई नहीं हो सका है, क्योंकि ऐसा होने का मतलब है इस पूरी दुनिया का मालिक होना, ईश्वर, खुदा, अल्लाह होना.
33% नंबर से कम लाने वालों को बुद्धिहीन कहा जाता है. इनमें 32% वाला भी आ गया और 5% वाला भी. ये जो ऊपर हैं, ये ज्यादा बुरे हैं. कुछ लोग कम बुरे होते हैं, कुछ ज्यादा. जो भी इंसान यहां दुःख झेलकर, बूढा होकर मरता है, समझ लो वो पूरी तरह से अच्छा नहीं है. उससे कहीं न कहीं गलतियां हुई हैं. कोई इंसान कितना अच्छा है या कितना बुरा, इसका पता उसके अंजाम से चलेगा. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत से थोड़े ही कोई बच पाएगा. वो तो कण-कण में विद्यमान है.
यदि कोई लड़की शादी से पहले पूरी तरह से चरित्रवान रही है और उसके सामने 2 विकल्प हैं. एक धनवान, आकर्षक, लेकिन चरित्रहीन लड़का और दूसरा कम कमाने वाला, आकर्षक, लेकिन चरित्रवान लड़का. मैं नहीं समझता कि वो लड़की पहले वाले को पसंद करेगी, बशर्ते कि उस पर घरवालों का कोई दबाव न हो. मानो या न मानो शादी-ब्याह में बाह्य और आंतरिक व्यक्तित्व भी काफी मायने रखता है. जैसी लड़की होती है, उसके लिए वैसा ही लड़का ढूंढने का प्रयास किया जाता है. हां, यदि कोई लड़की चरित्रहीन है तो फिर तो वो धनवान, चरित्रहीन को ही चुनेगी और फिर वे दोनों जिंदगी-भर एक-दूसरे को धोखा देते रहेंगे.
नोट : ये सब लिखने का उद्देश्य केवल हल्की-फुल्की बातचीत है.