ravinderjeet
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rajesh huda ki albaad
भाई एक बामण रोज रात नै ९ बजे घुमन फिरन जाया करता . एक दीन हाम ४-५ छोरा ने मिलके एक तसला लकडिया के
कोले ( अंगार ) भर लिए और रस्ते में एक पुराने कुंवे पै बैठ गए .
वो बामण आया तो उसके ऊपर गेर दिए . वो सोचा भुत अंगार
बरसावे सै . उल्टा ही भाज लिया . उस के १० दिन तक तगड़ा
बुखार चढ़ गया . और उस दिन बाद दिन छिपे पाछे कदे भी घुमन
फिरन नही गया .
भाई एक बामण रोज रात नै ९ बजे घुमन फिरन जाया करता . एक दीन हाम ४-५ छोरा ने मिलके एक तसला लकडिया के
कोले ( अंगार ) भर लिए और रस्ते में एक पुराने कुंवे पै बैठ गए .
वो बामण आया तो उसके ऊपर गेर दिए . वो सोचा भुत अंगार
बरसावे सै . उल्टा ही भाज लिया . उस के १० दिन तक तगड़ा
बुखार चढ़ गया . और उस दिन बाद दिन छिपे पाछे कदे भी घुमन
फिरन नही गया .