Supernatural Powers

Devar ne to bhabhi aacha ghee mein dabo dabo parothe khuwaya karein. Ar gelya "aan o devar tere to Rani ne bihaywange teri mere tein bhi badhiya sewa karegi". Ya bichari nyu e ek adh word bagawe hai Haryanvi ka tu wo bhi band karwa de.

arr fer Dever k kahya kare," Bhabhi ri, tu itni chinta kare meri.....apni bhahn ne bhiwah de ne mere"
 
Devar ne to bhabhi aacha ghee mein dabo dabo parothe khuwaya karein. Ar gelya "aan o devar tere to Rani ne bihaywange teri mere tein bhi badhiya sewa karegi". Ya bichari nyu e ek adh word bagawe hai Haryanvi ka tu wo bhi band karwa de.

ये तोह भाभी - देवर के बीच मे flirtation हुई - devar kae saath extra time spend karna, ussae meethi chupdee baatein karna. In western countries, such behavior between an unmarried man and a woman would be considered 'romantic' but is accepted in a much more conservative society such as Indian. Ironically, such 'sweet talking' between जेठ and his younger brother's wife is considered 'taboo'. Is there any logic here?

Regards,

Urmila.
 
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नया थ्रेड चालू कर दयो आड़े घपडचोथ मत मचाओ आड़े हम सिर्फ भूता की बतलावांगे
 
rakeshsehrawat;268681;[/QUOTE said:
राकेशजी - चाललं दो- बाता मे तह बात निकलती हें तोह thread interesting रहता है - अच्छा flow हो रा है बातें का. भूतां की बातन नए भी आन दो

Regards,

Urmila.
 
अलौकिक शक्तियों का वजूद है. क्यों है, इसके लिए सबसे पहले तो इस दुनिया को समझने का प्रयास करते हैं.
ये दुनिया क्या है? ये दुनिया एक ट्रेनिंग सेंटर है. यहां हम कुछ हुनर कमाने के लिए आते हैं. एक निश्चित समय यहां बिताने के बाद हम सब स्वर्ग चले जाते हैं और इस दौरान जो हुनर यहां कमाए होते हैं, वहां उनका सुख लेते हैं. स्वर्ग में हम केवल यहां धरती पर कमाए हुनरों का आनंद ले सकते हैं, लेकिन वहां कोई नया हुनर नहीं कमा सकते. इसलिए यह कहा जा सकता है कि चूंकि हम यहां धरती पर हैं, इसलिए हमारे पास यह मौका है कि हम स्वर्ग का ज्यादा से ज्यादा आनंद लेने के लिए यहां ज्यादा से ज्यादा हुनर कमाएं और यहां अपनी परफोर्मैंस बढ़िया से बढ़िया रखें. जिस तरह से यह पृथ्वी है, उसी प्रकार से स्वर्ग है, एक ग्रह. वो ग्रह धरती से कहीं ज्यादा सुंदर है. वहां कोई बीमार नहीं होता, कोई बूढ़ा नहीं होता. वहां उम्र बहुत-बहुत लंबी होती है. जब तक भी वहां जीवन चलता है, बहुत ही आनंद में चलता है. जो यहां कम मेहनत करते हैं, वे स्वर्ग में जाकर पछताते हैं कि हम स्वर्ग का ज्यादा मजा नहीं ले पा रहे हैं. इसका कारण होता है यहां धरती पर कुछ अच्छा न करना. स्वर्ग में खिलाड़ी भी हैं, योद्धा भी हैं, किसान भी हैं, वैज्ञानिक भी हैं, सभी हैं. ये उड़न तश्तरियां, यू.एफ.ओ. वगैरह सब वहीं से आते हैं. जिस तरह से यहां धरती पर स्वर्ग के बारे में कयास लगाए जाते हैं, उसी प्रकार वहां धरती के बारे में चर्चा होती है.
एक पृथ्वी है, एक स्वर्ग है. नरक कहीं नहीं है. एक तय संख्या में आत्माएं हैं. जो पुरुष है वो स्त्री नहीं बनता, जो स्त्री है, वो पुरुष नहीं बनती. दुनिया को संचालित करने के लिए अदृश्य नियम हैं. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत का न तो कोई मित्र है, न कोई शत्रु. आत्मा का सफ़र इस धरती पर एक सूक्ष्म जीव से शुरू होता है. फिर परफोर्मैंस के आधार पर वो विभिन्न जीवों के रूप में परफोर्मैंस देता हुआ मानव शरीर तक का सफ़र तय करता है. इस दुनिया में सैकड़ों तरह के बंदर हैं, सैकड़ों तरह के कुत्ते हैं. सभी योनियां 84 लाख हैं, लेकिन किसी एक ही आत्मा को इन सभी 84 लाख योनियों में से गुजरना नहीं होता. अगर बंदर बने तो फिर बंदरों की सभी नस्लों में से गुजरना नहीं होता. इंसान बनने के बाद कोई भी वापस पशु-पक्षी नहीं बनता. इंसान को अपनी गलतियों, कम मेहनत, बुरे कर्मों इत्यादि का खामियाजा दुखों-बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ता है.
जीवन एक ही नहीं है. आत्मा केवल शरीर बदलती है, वो न मरती है, न नष्ट होती है. इस धरती पर कौन कम हुनर कमाएगा और कौन ज्यादा, कौन अच्छा बनेगा और कौन बुरा, यह काफी हद तक परिस्थितियों पर निर्भर करता है. किसी-किसी के साथ ऐसे हालात बन जाते हैं कि वो कोई बहुत ही भीषण परफोर्मैंस दिखा डालता है. ऐसे लोगों को अलौकिक शक्ति का अहसास करवाना इस दुनिया को चलाने वाली ताकत की मजबूरी बन जाता है. उदाहरण के लिए : एक पुरुष है. उसकी शादी होती है, बच्चा होता है. उसकी पत्नी चरित्रहीन निकलती है और किसी और के साथ चली जाती है. वह पुरुष टूट जाता है और अपने बेटे को यही शिक्षा देता है कि तू इन स्त्रियों से दूर रहना. बेटा भी अपने पिता की बात को मानने का भरोसा दिलाता है. इसी दौरान एक दिन वह पुरुष अपने बेटे को अकेला छोड़कर मर जाता है. पिता तो चला जाता है, लेकिन वो बात उस बेटे के दिमाग में रहती है. यदि वो किसी स्त्री की तरफ बढ़ता है तो उसे ऐसा लगता है कि वो अपने पिता को धोखा दे रहा है और वो स्त्रियों से दूर भागने लगता है. 20 साल बीतते हैं, 40 साल बीतते हैं, ऐसे में यदि वो मन में ऐसी इच्छा कर ले कि उसे मौत आ जाए तो उसे मौत आ जाएगी, लेकिन वो तो आखिर तक यह इच्छा करता ही नहीं और 127 साल लंबा जीवन बिना स्त्री के बिता जाता है, वो भी पहले ही जन्म में. ऐसा किसी स्त्री के साथ भी हो सकता है. स्त्री के लिए यह अवधि 118 वर्ष है. इस दुनिया को चलाने वाली ताकत सबका इंसाफ करती है. उसकी वो तपस्या व्यर्थ नहीं जाएगी. यह इस दुनिया की सबसे बड़ी तपस्या है, जो ईश्वर का दर्जा हासिल करवाती है. अब इस तपस्या की पृष्ठभूमि के साथ यदि कोई इस धरती पर आएगा तो उसका जीवन संचालित करने के लिए, उसे उसकी तपस्या का फल देने के लिए उसे अलौकिक शक्तियों का सकारात्मक अहसास करवाना जरूरी हो जाएगा. दूसरे शब्दों में कहें तो यदि किसी ने पूर्व जन्म में कोई बहुत ही भीषण परफोर्मैंस दिखाई होती है तो उसे वर्तमान जन्म में अलौकिक शक्तियों का सकारात्मक अहसास करवाया जाता है. यह अहसास कितना कम होगा, या कितना ज्यादा, यह पूर्व जन्म की परफोर्मैंस पर निर्भर करता है. बहुत से लोगों को अहसास करवाया जाता है, लेकिन यह भी कहा जाता है कि इस बारे में किसी को भी बताना नहीं. जिन्हें भी अलौकिक शक्तियों का अहसास होता है, अधिकांशतः वे बहुत ही महान शख्सियत बनते हैं. भूत-प्रेत इत्यादि का अहसास भी कोई झूठ बात नहीं है. यह इस दुनिया के सिस्टम का एक हिस्सा है. ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि यहां लोग आत्महत्या करने से पहले झिझकें.
अब प्रश्न यह उठता है कि मैं कौन हूं? मैं भी यह दावा कर रहा हूं कि मुझे अलौकिक शक्तियों का अहसास हुआ है. इसका सबूत यह है कि मुझे बहुत ही अच्छी-अच्छी बातें बताई गई हैं. तो क्या मैं आने वाले समय में कोई महान शख्सियत बनने जा रहा हूं? तो इसका जवाब यह है कि इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता. उम्मीद है, लेकिन किसी से कोई वादा नहीं है. क्या पता कुछ भी न हो...लेकिन इसके बावजूद मुझे बड़ी ख़ुशी है कि चाहे जो कारण रहा हो, किसी अदृश्य शक्ति द्वारा मुझे जो ज्ञान दिया गया, वो बहुत बढ़िया है और ऐसा नहीं है कि केवल मुझे ही वे बातें बताई गईं...मुझे इस ज्ञान की झलक कई ग्रंथों में मिली है. अष्टावक्र गीता में ये स्वर्ग जाने वाली बात लिखी है, जिसे पढ़कर मुझे बड़ी हैरानी हुई थी कि यह बात तो मुझे भी किसी ताकत ने बता रखी है. हाल-फिलहाल तो मैं एक मामूली आदमी हूं...कभी कुछ बनने की शुरुआत हुई तो बता दूंगा...अपने देश-धर्म-जाति और पूरी दुनिया का मैं कुछ भला कर सका तो मुझे बड़ी ख़ुशी होगी, नहीं तो दिन बीत ही रहे हैं जैसे-तैसे...सबको अपना जीवन अपनी मर्जी से जीने का अधिकार है. किसका रास्ता अच्छा था, किसके विचार अच्छे थे, यह उसका अंजाम बताएगा. किसी को ऊपर वर्णित बातें अर्थहीन लगी हों तो कोई समस्या वाली बात नहीं है. सबके अपने-अपने विचार हैं.
 
[QUOTE=upendersingh;

उपेन्द्र जी - आप ने बहुत honestly अपना experience लिखा है - शाएद इसी लीये पढ़ कर अच्छा लगा. लोगों को अलग अलग तेरेह के experiences होते हैं, अलग अलग तरेह के views रखते हैं. लाइफ challenges को पार करना एक तपस्या के समान है.

Much Regards,

Urmila.
 
sahi kaha jab Insan sharir chodta hai toh woh is sansar se do chiz le jata hai.Pehla toh uska swabhav aur dusra Karm.Uske karmo se uska dusra janm ya mukti ka faisla hota hai.
 
Mukti means he is free from birth and death cycle but he is assigned certain duties by Supreme soul on this lok.Only by bhakti or pious deeds in this human life we get a chance to be free from this mrityu lok where everything is perishable.
 
After death we are assigned our duties according to karma.If a soul is entangled between death and assignment(after natural death) like sudden death,suicide etc,he wanders on this earth without physical form hence called Bhoot,spirit,supernatural force etc which is very much true.Like we experience Positive force ,there exist satainic forces.For proof have a visit to Ghata Mehandipu(Rajasthan) for darshan of Shree BALAJI.
 
I have something to share with You!

Do you believe there is anything like supernatural powers, witches, Ghost do they really exist or its just a Blind Faith, whenever humans don't find a answer in Illogical incident they blame it supernatural, Well I don't have any kind of supernatural experience till yet in my life.If you have then please do share..

Hello Madam,

Well, You seems quite curious about the Supernatural phenomenon. Let's bring-in a little bit of Science as well. I suggest You to please have a look at the web-pages below:

www[dot]near-death[dot]com/experiences/experts101.html

www[dot]near-death[dot]com/experiences/experts103.html

Please replace [dot] by a . (dot); I hope You are getting what I mean to say.

Regards: Hardeep Moar
 
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