Sweet collection

amritameerut01

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Hello Friends ,

Here are few lines by a well known poet.....(Hope u'll get it ) :)


बस्ती बस्ती घोर अँधेरा ,
पर्वत पर्वत खालीपन ,
मन हीरा बेमोल लुट गया ,
घिस घिस रीता तन चन्दन I
इस धरती से उस अम्बर तक ,
दो ही चीज़ गज़ब की हैं ,
एक तो तेरा भोलापन है ,
एक मेरा दीवानापन I


जिसकी धुन पर दुनिया नाचे ,
दिल ऐसा एक तारा है ,
जो हमको भी प्यारा है ,
और जो तुमको भी प्यारा है I
झूम रही है जबकि दुनिया ,
आज हमारे गीतों पर ,
तब कहती हो , प्यार हुआ है ,
क्या एहसान तुम्हारा है I
 
बहुत भिखरा बहुत टूटा ,
थपेडे सह नहीं पाया ,
हवाओं के इशारों पर ,
मगर मै बह नहीं पाया i
अधूरा अनसुना ही रह गया ,
ये प्यार का किस्सा ,
कभी तुम सुन नहीं पायी ,
कभी मै कह नहीं पाया i
 
फेर लेते हो नजर, दिल से भुला दिया हमको,
क्या युहीं तुम वफ़ा का सिला दिया करते हो,
वादा किया था मेरी मझार पे आने का तुमने,
हमने यूँ ही जान दी अपनी हम्नफ़ज़ सोच कर तुमको!
 
फेर लेते हो नजर, दिल से भुला दिया हमको,
क्या युहीं तुम वफ़ा का सिला दिया करते हो,
वादा किया था मेरी मझार पे आने का तुमने,
हमने यूँ ही जान दी अपनी हम्नफ़ज़ सोच कर तुमको!
bhai kitti maja de dia .........ek do or aan de issi issi
 
मै जब भी तेज़ चलता हूँ , नज़ारे छूट जाते हैं ,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ , तो सपने टूट जाते हैं i
मै रोता हूँ तो आकर लोग , कन्धा थपथपाते हैं ,
मै हँसता हूँ , तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं i
 
तेज चल चल कर वो तेरे पास जाना,
ना मिलने पैर वो धीमे कदमो से वापिस आना,
याद आता है आज भी मुझे वो तेरा तडपाना,
पैर ऐ मेरे हुम्नाफज़ कोई गिला नहीं तुझसे
हमने मुनासिब समझा तुमसे दूर चले जाना
 
तेज चल चल कर वो तेरे पास जाना,
ना मिलने पैर वो धीमे कदमो से वापिस आना,
याद आता है आज भी मुझे वो तेरा तडपाना,
पैर ऐ मेरे हुम्नाफज़ कोई गिला नहीं तुझसे
हमने मुनासिब समझा तुमसे दूर चले जाना
Jazbaaton ka samandar roke nahi rukta....
Sambhalne se dil hamara bhi nahi samhbalta.
Ati nahi hume shayari... magar eye Ghalib,
jazbaaton peh zor kisi ka nahi chalta
 
Aankho ki zooban woo samajh nahi paate,
honth hain magar hum kuch kah nahi paate.
Apni bebasi kis tarah kahe,
koi hai jis ke bina hum rah nahi paate.
 
1. Teri mohabat me mein khuda k sajde karta raha
tujhe paane par na kho du kahin isliye bas darta raha
tu na mili par is baat ka gam nai hai mujhe ratti bhar
gam ye hai ki tujhe pane ki khawahish aur koshish hardam karta raha



2. Mujhe dard e ishq ka mazaa malom hai
dard e dil ki inteha malom hai
zindagi bhar muskurane ki dua naa dena
mujhe pal bahar muskurane ki sazaa malom hai
 
some copy paste matrial...but i like these lines....

Mohhabat Ka gum hota bahut Hai,
Ke ab Ye Lafz Bhi Ruswa bahut Hai,

Udasi Ka Sabab Main Kya Bataun?
Gali Kochon Mein sannata bahut Hai,

Na milne Ki qasam Kha Ke Bhi Main Ne,
Tujhe Har Raah Mein dhunda bahut Hai,

Ye Aankhein Aur Kya Dekhein Kisi Ko,
Inn Aankhon Ne tujhe Dekha bahut Hai,

Na Jaane Kyun Bacha Rakhe Hain Aanso,
Shayid mujhe Rona bohut hai,

Tujhe maloom To hoga mere humdum,
Tujhe Aik Shakhs Ne Chaha bahut hai
 
1. Teri mohabat me mein khuda k sajde karta raha
tujhe paane par na kho du kahin isliye bas darta raha
tu na mili par is baat ka gam nai hai mujhe ratti bhar
gam ye hai ki tujhe pane ki khawahish aur koshish hardam karta raha



2. Mujhe dard e ishq ka mazaa malom hai
dard e dil ki inteha malom hai
zindagi bhar muskurane ki dua naa dena
mujhe pal bahar muskurane ki sazaa malom hai
waw bhai waw
har hasi ke baad gum jarur ata hai
 
amrita ji the name of well known poet is Kumar Viswas. Right??
i m posting some lines by Kumar Viswas....


रंग दुनिया ने दिखाया है निराला, देखूँ,
है अँधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ
आईना रख दे मेरे हाथ में,आख़िर मैं भी,
कैसा लगता है तेरा चाहने वाला देखूँ
जिसके आँगन से खुले थे मेरे सारे रस्ते,
उस हवेली पे भला कैसे मैं ताला देखूँ





Hello Friends ,

Here are few lines by a well known poet.....(Hope u'll get it ) :)


बस्ती बस्ती घोर अँधेरा ,
पर्वत पर्वत खालीपन ,
मन हीरा बेमोल लुट गया ,
घिस घिस रीता तन चन्दन I
इस धरती से उस अम्बर तक ,
दो ही चीज़ गज़ब की हैं ,
एक तो तेरा भोलापन है ,
एक मेरा दीवानापन I

जिसकी धुन पर दुनिया नाचे ,
दिल ऐसा एक तारा है ,
जो हमको भी प्यारा है ,
और जो तुमको भी प्यारा है I
झूम रही है जबकि दुनिया ,
आज हमारे गीतों पर ,
तब कहती हो , प्यार हुआ है ,
क्या एहसान तुम्हारा है I
 
पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ?
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर अधिकार क्या करना ?
मुहब्बत का मज़ा तो डूबने की कशमकश में हैं,
जो हो मालूम गहराई, तो दरिया पार क्या करना ?

 
ओ कल्पव्रक्ष की सोनजुही!
ओ अमलताश की अमलकली!
धरती के आतप से जलते..
मन पर छाई निर्मल बदली..
मैं तुमको मधुसदगन्ध युक्त संसार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

तुम कल्पव्रक्ष का फूल और
मैं धरती का अदना गायक
तुम जीवन के उपभोग योग्य
मैं नहीं स्वयं अपने लायक
तुम नहीं अधूरी गजल शुभे
तुम शाम गान सी पावन हो
हिम शिखरों पर सहसा कौंधी
बिजुरी सी तुम मनभावन हो.
इसलिये व्यर्थ शब्दों वाला व्यापार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||

तुम जिस शय्या पर शयन करो
वह क्षीर सिन्धु सी पावन हो
जिस आँगन की हो मौलश्री
वह आँगन क्या व्रन्दावन हो
जिन अधरों का चुम्बन पाओ
वे अधर नहीं गंगातट हों
जिसकी छाया बन साथ रहो
वह व्यक्ति नहीं वंशीवट हो
पर मैं वट जैसा सघन छाँह विस्तार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||


मै तुमको चाँद सितारों का
सौंपू उपहार भला कैसे
मैं यायावर बंजारा साँधू
सुर श्रंगार भला कैसे
मैन जीवन के प्रश्नों से नाता तोड तुम्हारे साथ शुभे
बारूद बिछी धरती पर कर लूँ
दो पल प्यार भला कैसे
इसलिये विवष हर आँसू को सत्कार नहीं दे पाऊँगा|
तुम मुझको करना माफ तुम्हे मैं प्यार नहीं दे पाऊँगा||


 
मिले हर ज़ख्म को मुस्कान से सीना नहीं आया
अमरता चाहते थे पर गरल पीना नहीं आया
तुम्हारी और मेरी दास्ताँ में फर्क इतना है
मुझे मरना नहीं आया , तुम्हे जीना नहीं आया i
 
ये दिल बर्बाद करके क्यूँ इसमें आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अलाहाबाद रहते हो
ये कैसी शोहरतें मुझको अदा करदी मेरी मौला
मै सब कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो i



मेरी प्रतिमान आंसूं में भीगोकर गढ़ लिया होता
अकिंचन पाँव तब आगे तुम्हारा बढ़ लिया होता
मेरी आँखों में भी अंकित समर्पण की ऋचाएं थी
उन्हें कुछ अर्थ मिल जाता जो तुमने पढ़ लिया होता i



मै तुम्हे ढूँढने स्वर्ग के द्वार तक गया
रोज़ जाता रहा , रोज़ आता रहा
तुम ग़ज़ल बन गयी , गीत में ढल गयी
मंच से मै तुम्हे गुनगुनाता रहा i



मै उसका हूँ वो इस एहसास से इंकार करता है
भरी महफ़िल में भी रुसवा मुझे हर बार करता है
यकीं है सारी दुनिया को खफा है मुझसे वो लेकिन
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है i
 
रिश्तों में अब आदर्शों का कोई काम नहीं
वह भी राधा नहीं रही और हम भी श्याम नहीं
सीतायें बंदी हैं अब तक उसके महलों में
रावण से जा के टकराये अब वो राम नहीं
 
Sochta hun apna makaan badal dun,
Gum ho jaun, naa koi jaane mujhe,
Aise Jahan k naam khud ko kardun,

Jo Khat naa ayenge,
Unki aas naa lagaun ab,

Mera apna naa ho koi pata,
Harr zehen apni baat mitaun ab..

Likh jo diyen hain Chand Alfaaz yahan,
Fakat Kaghaz pe kuch andaaz hain,
Bohot chhota hai inka kadd,
Aur naa inpe hum utna naaz hai… !!

​
 
Hum apni deewangi se jaane jaate hain
Wo apni berukhi se pehchaane jaate hain

Roz miltey hai lekin, kuchh kehte sunte nahi
Mere saamne wo meri dhadkan badhaane aate hain
 
जब एक प्रेम का धागा जुड़ता है,
दिल का कमल तब ही खिलता है

देखता है खुदा भी आसमान से जमीन पर
जब एक दिल दूसरे से बेपनाहा मोहब्बत करता है

सुलगने लगता है तब धरती का सीना भी
जब कोई आसमान बन के बाहो में पिघलता है

लिखी जाती है तब एक दस्तान-ए -मोहब्बत
तब कही जा कर अमर-प्रेम लोगो के दिलों में उतरता है!!




 
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