samarkadian
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हमारी प्रतिदिन की दौड़ भाग में हम अनेक व्यक्तियों से कई प्रकार का व्यव्हार करते हैं ! प्रत्येक व्यव्हार का केंद्रबिंदु होता है - वार्तालाप ! इसी वार्तालाप यानी कि बातचीत में कोई व्यक्ति बार बार एक शब्द या वाक्य दोहराता है ! इसे तकिया - कलाम कहा जाता है ! हम चलचित्रों यानी कि फिल्मो में भी देखते हैं कि कई हास्य कलाकार तकिया-कलाम के प्रयोग से हास्य उत्पन्न करते हैं !
मेरा एक मित्र है जो हर वाक्य के साथ ''जो है न '' का प्रयोग करता है ! वो इसका प्रयोग इतना करता है कि उसका नाम जो-ह-न पड़ गया है ! इसी तरह से एक फिल्म में शक्ति कपूर हर सवांद के बाद बोलता है - ''पोर की पय्याँ '' ! मुझे आज तक समझ नहीं आया कि इसका अर्थ क्या है ! अर्थ जो भी हो लेकिन हर बार सुनने में मज़ा आता है !
आइये इस धागे के माध्यम से हम देखे - सुने हुए तकिया -कलाम को साझा करे !
मेरा एक मित्र है जो हर वाक्य के साथ ''जो है न '' का प्रयोग करता है ! वो इसका प्रयोग इतना करता है कि उसका नाम जो-ह-न पड़ गया है ! इसी तरह से एक फिल्म में शक्ति कपूर हर सवांद के बाद बोलता है - ''पोर की पय्याँ '' ! मुझे आज तक समझ नहीं आया कि इसका अर्थ क्या है ! अर्थ जो भी हो लेकिन हर बार सुनने में मज़ा आता है !
आइये इस धागे के माध्यम से हम देखे - सुने हुए तकिया -कलाम को साझा करे !
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