ravinderjeet
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एक बे तीन जने नए-नए मोड़े बणे थे | तीनु जाट | दो जने मेरठ कानी के | उन्ने माड़ी बोलण की तमीज थी एर तीसरा था रोहतक का (समझ गे हो गे )| वे एक घर आगे खड़े हो के माँगन लाग्ज्याँ सें |
पहला------ किम्मे घालिये री माई
दुसरा ------ जिवें तेरे भतीजे भाई
तीसरा ----- बहार खड़े तेरे तीन जमाई
पहला------ किम्मे घालिये री माई
दुसरा ------ जिवें तेरे भतीजे भाई
तीसरा ----- बहार खड़े तेरे तीन जमाई