सारे ग्राफ अच्छी तरह देखे पर इंडियन एक्सप्रेस के लेख में उठाये गए सवालों जवाब नहीं मिला |
महंगाई का स्तर क्या रहा इसका ग्राफ नज़र ही नहीं आया | क्या कृषि क्षेत्र और MSME (Micro, Small, Medium Enterprises) पर बढ़ता कर्ज भी खुशहाली का पैमाना होता है सरकार की नज़र में ? बेरोजगारी कितनी बढ़ी है इसका भी ग्राफ नहीं है और भ्रष्टाचार के आंकड़े सरकार देगी ऐसी उम्मीद करना ही बेमानी है | अल्पसंख्यक वर्ग ( minorities) पर कितना खर्च किया इसकी तो जानकारी दी है ग्राफ के माध्यम से, परन्तु बहुसंख्यकों पर कितना खर्च किया इसकी जानकारी नहीं दी गयी है, सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग के लिये किये गए खर्च को दिखाना साम्प्रदायिकता के दायरे में नहीं आता है?
मनरेगा में कितने जॉब कार्ड जारी किये ये तो बताया है लेकिन मनरेगा का कितना पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ जाता है ये नहीं बताया| mid day meal का खर्च कितना बढ़ा इसका तो ग्राफ है किन्तु कुपोषण कितना कम हुआ इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया |
आप की उन सब बातो का जवाब इस रिपोर्ट कार्ड मैं ही था अगर ढूँढना चाहे तो
रही बात महंगाई की तो इसमें कोई शक नहीं महंगाई बढ़ी है और खतरनाक तरीके से बढ़ी है पर उसी हिसाब से सैलरी भी बढ़ी है और चूँकि आप ने माँगा तो ये रहा उसका ग्राफ
https://twitter.com/PankajPachauri/status/354215782059741186/photo/1
रही ब्रश्ताचार की बात तो इसका जवाब मुझे किसी के पास नहीं दीखता, चाहे कांग्रेस हो या भाजपा
मैं आप के सामने एक और ग्राफ पेश करता हूँ - भारत की समर्त्थ्था का विश्व और BRIC के मुकाबले, आगे आप खुद समझदार है https://twitter.com/PMOIndia/status/354607381537251328/photo/१
एक कहावत तो इन पर ठीक बैठती है - राम राज मैं ढूढ़ मिला कृष्णा राज मैं घी- कलयुग मैं सत्ता मिली घोट घोट के पी
जवाब खोजने की कोशिश तो बहुत करी पर क्या करूँ भाई तेरे वाला चश्मा कोनी था मेरे पास| BRICS देशो और अंतर्राष्ट्रीय कारकों की चर्चा कांग्रेस पार्टी अक्सर करती है| world bank के database में से एक रिपोर्ट यहाँ attach कर रहा हूँ | कोई भी बिना चश्मे के भी पढ़ सकता है इसे|
ये कहावत लिखने के लिये मैं आपकी दाद देता हूँ और आपके अन्तर्मन की पीड़ा को समझा जा सकता है|