क्या होता है
जड़ो से दूर होने का दर्द,
इनसे पूछो ?
सब कुछ होकर भी
अधूरे से नजर आते है.
अपने गाँव,
अपनी संस्कृति
से बिछुड़ कर,
ख्वाबो के मजबूत
महल भी बिखर जाते है.
जिसे कहते हो
तुम तरक्की,
वो बड़ी बेबुनियाद सी है.
जड़ो से कटे दरख्त भी
क्या कभी पनप पाते है. यायावर