बागपत। बेशक सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ देने लिए निशुल्क इलाज कराने की घोषणाएं कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। गरीब अपने उपचार के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन उपचार तो दूर उन्हें सहानुभूति के दो शब्द भी नसीब नहीं हो रहे हैं।
भट्ठे पर मजदूरी कर परिवार का भरण भोषण करने वाली रामफली आज बहुत बुरे दौर से गुजर रही है। मूल रूप से जिला प्रबुद्धनगर के भैंसवाल गांव की रहने वाली है। वह दो वर्ष से बागपत के एक भट्ठे पर दो बेटी और दो बेटों के साथ मजदूरी कर परिवार का भरण भोषण कर रही है। रामफली ने बताया कि दो साल पहले पति सतवीर के गले में अचानक दर्द हुआ था। उसका प्राइवेट अस्पताल में चेकअप कराया तो डाक्टरों ने गले में कैंसर का फोड़ा बताया। चेकअप कराने में ही उसका हजारों रुपया खर्च हो गया। जब रिश्तेदाराें से सहयोग मांगा तो सभी ने मदद से हाथ पीछे खींच लिए। आखिर में थक हारकर बागपत भट्ठा मालिक के पास पति के इलाज के लिए पैसे मांगे तो मालिक ने भी कह दिया कि मजदूरी दिन रात करो उसी में तुम्हें पति का इलाज कराना होगा।
रेहड़े में बैठाए पति को सड़कों की धूल फांकती रामकली को प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन आजतक किसी अधिकारी ने मदद नहीं की। रामकली ने बताया कि बागपत के अस्पतालों में पति का ठीक इलाज नहीं हो रहा, अब रेहड़े में बैठाकर पति को दिल्ली ले जाऊंगी।