Tips for skin and hair health.

VP ji we also used to write on Takhti....Due to poor financial position at that time.....we had no option just to study at Govt. Primary school....saanj nai takhti dhoni ar pher us par multaani mitti pot kai sukhani aur pher tadke tadke us pai pencil tai sattar(Line) maarne........kalam chholni... 1 rupaye ki do kalam aaya karti us time pai....ar dwat me syahi banani ar pher us mai kalam gili karkai takhti likhni..... etc . etc..... Oho we bhi ke din the.....ek aadh bai ladaayi mai sar bhi phod diya karti yaa takhti..........we takhti aale din tai kuchh aur hi the.........beshak us time pai mhari financial position poor thee par Golden days the we

Urmila ji aap dhanya ho.......pichhle thread me aapne gandase ki yaad dwai thee......ar eb Takhti ki....kise nai theek hi kahi hai aapke thread mai jadoo hai........baat kuchh aur howe sai par poche kitai aur hai........

i am glad that you think of the memories as GOLDEN!
 
noooo!!! just want to enjoy running my fingers through them!

अच्छा , अगर इन महान हजामो की सलाह त बाल बढ़ गए तो फिर एक नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी और आपने एक और थ्रेड शुरू करनी पड़ेगी के " मेरी जुल्फे इतनी लम्बी हैं की इनको सहलाने के लिए मेरे हाथ अर्र उंगलिया छोटी पड़ जाती हैं तो कृप्या करके हाथ और उंगली बढाने के कोई उपाय सुझाये " | फिर हमारे जाटलैंड वालो के लिए एक और समस्या खड़ी हो जाएगी , बाल तो के बेरा ये बढवा भी दे पर इस नई समस्या का हल नहीं पावेगा इन धोरे :)
 
you think i am old ?

ना इबे कित बूढ़े हो लिए , वि.पि.सिंह भाईसाहब वाले हिसाब किताब त तो लागे स के इबे आपके रिश्ते आण की उमर हुई स ;)
 
And after a thorough research, I have come to the conclusion that "jealousy thy name is woman". A woman can never give a genuine advice to another woman out of jealousy. A beautiful woman would never share the secrets of her beauty with other women.

The arguments in this thread leads one to say that your research conclusion is right!
 
I wish I could travel back in time to fulfill the unaccomplished tasks left behind and to realize the dreams cherished in my twenties.

भाईसाहब एक बार सोनीपत आल्ली ने और पढ़ा दो या पोस्ट फेर पाछली विशा न तो छोडो इब आल्ली विशा का भी देखो के हश्र करे स .......सो पाछ्लिया न तो जान दो इब आल्लिया न तो पूरी कर लो कदे उनके चक्कर में ये भी विश ऐ रह जावे न |
 
किसी ने कहा है कि जिंदगी एक फूल की तरह होती है, जो बचपन में एक कली की तरह होती है, जवानी में फूल बनकर खिलती है और फिर मुरझाकर ठूंठ होने लगती है. समस्या बस एक थोड़े ही है. आंखों की रोशनी का जाना भी एक समस्या है, कहीं दिल संबंधी कोई मुसीबत न हो जाए, कहीं दांत न हिलने लगें, कहीं शरीर थुलथुल, बेडौल न होने लगे...कहने का मतलब ये कि ये बाल-वाल की समस्या तो कोई मायने ही नहीं रखती...कई साल पहले मेरे ऑफिस में मेरे पीछे एक ग्राफिक डिजाइनर लड़की बैठती थी...वो देखने में बहुत ही सुंदर थी...लेकिन उसे पेट की समस्या थी...बेचारी हर घंटे टॉयलेट में जाकर बैठ जाती थी...जैसे लड़कों को तरह-तरह की समस्या होती है, वैसा ही लड़कियों के साथ भी है...मुझे तो सही-सलामत लड़की बहुत ही कम दिखी हैं. हमारे जैसे साधारण इंसानों को बस अपने कर्म बढ़िया रखने चाहिए, क्योंकि इन कर्मों का फल ही हमारे शरीर और मस्तिष्क को झेलना पड़ता है...मेरा मानना है कि दुबारा जवानी वापस आ जाना, बाल आ जाना...बूढ़ा न होना...अमर होकर सीधे स्वर्ग विदा हो जाना...यह इनाम उस स्त्री-पुरुष के लिए सुरक्षित रखा गया है, जो यहां कुछ ऐसा करके दिखा दे, जैसा न तो पहले कभी किसी ने किया हो और न ही कभी कोई कर सके...यानी कि 100/100 नंबर वाला...यानी कि खुदा...जो कि आज तक कोई नहीं हो सका है...हमारे जैसे साधारण इंसानों को चिर यौवन और अमरत्व किस आधार पर दिया जा सकता है? यदि ऐसा किया जाता है तो फिर यदि यहां कोई 100/100 नंबर जैसा कुछ कर दे तो उसे क्या मिलेगा? शरीर की देखभाल रखना अच्छा है, लेकिन सच्चाई यह है कि यदि कर्म ठीक नहीं हैं तो फिर उसका दंड शरीर को ही भुगतना पड़ता है...कर्म भी ठीक रहें तथा शरीर और व्यक्तित्व के लिए भी मेहनत होती रहे...मेरे ख्याल से तो यही ठीक है...
 
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sau baato ki ek baat type post.well explained upender.
किसी ने कहा है कि जिंदगी एक फूल की तरह होती है, जो बचपन में एक कली की तरह होती है, जवानी में फूल बनकर खिलती है और फिर मुरझाकर ठूंठ होने लगती है. समस्या बस एक थोड़े ही है. आंखों की रोशनी का जाना भी एक समस्या है, कहीं दिल संबंधी कोई मुसीबत न हो जाए, कहीं दांत न हिलने लगें, कहीं शरीर थुलथुल, बेडौल न होने लगे...कहने का मतलब ये कि ये बाल-वाल की समस्या तो कोई मायने ही नहीं रखती...कई साल पहले मेरे ऑफिस में मेरे पीछे एक ग्राफिक डिजाइनर लड़की बैठती थी...वो देखने में बहुत ही सुंदर थी...लेकिन उसे पेट की समस्या थी...बेचारी हर घंटे टॉयलेट में जाकर बैठ जाती थी...जैसे लड़कों को तरह-तरह की समस्या होती है, वैसा ही लड़कियों के साथ भी है...मुझे तो सही-सलामत लड़की बहुत ही कम दिखी हैं. हमारे जैसे साधारण इंसानों को बस अपने कर्म बढ़िया रखने चाहिए, क्योंकि इन कर्मों का फल ही हमारे शरीर और मस्तिष्क को झेलना पड़ता है...मेरा मानना है कि दुबारा जवानी वापस आ जाना, बाल आ जाना...बूढ़ा न होना...अमर होकर सीधे स्वर्ग विदा हो जाना...यह इनाम उस स्त्री-पुरुष के लिए सुरक्षित रखा गया है, जो यहां कुछ ऐसा करके दिखा दे, जैसा न तो पहले कभी किसी ने किया हो और न ही कभी कोई कर सके...यानी कि 100/100 नंबर वाला...यानी कि खुदा...जो कि आज तक कोई नहीं हो सका है...हमारे जैसे साधारण इंसानों को चिर यौवन और अमरत्व किस आधार पर दिया जा सकता है? यदि ऐसा किया जाता है तो फिर यदि यहां कोई 100/100 नंबर जैसा कुछ कर दे तो उसे क्या मिलेगा? शरीर की देखभाल रखना अच्छा है, लेकिन सच्चाई यह है कि यदि कर्म ठीक नहीं हैं तो फिर उसका दंड शरीर को ही भुगतना पड़ता है...कर्म भी ठीक रहें तथा शरीर और व्यक्तित्व के लिए भी मेहनत होती रहे...मेरे ख्याल से तो यही ठीक है...
 
i am glad that you think of the memories as GOLDEN!

..मेरे गाँव के पास से रेलवे लाइन जाती है ..हम लोग वहां से कोयले उठा के लाते थे और श्याही बनाते थे ,,वैसे तो पुडिया भी आती थी कोयले की ..जिसको पानी में डाल के शयाही बनाते थे ..
..लेकिन मेरी तो हमेशा कलम फस जाती थी दवात में और सारी स्याही खिंड जाती थी ....में जयादा मोटी कलम बनाता था...फेर नीम के पेड़ के नीचे बैठ के पढ़ते थे..और छुटी से पहले गोल गोल बैठ के जोर जोर से पहाड़े गाते थे..
... फेर स्कूल में से आते टाइम बिच में पड़े पानी के धोरे से तख्ती धो लेते थे ..और फिर रेडियो के खाली सैल में से सुरमा निकाल कर उस तख्ती पैर लाइन मारते थे..
..वो भी क्या दिन थे..में आज भी गाँव जाता हूँ तो अपने स्कूल में जाता हूँ और उस पोधे को देखता हूँ जो मैंने स्कूल टाइम में लगाया था ..वो आज बहुत बड़ा पैड है और बहुत फैला हुआ है बिलकुल मेरी तरह....ऐसा लगता है जैसे उसे मुझ पैर थोडा नाज है...
..theN i got scholarship (wazifa) nd got admission in a city school..गाँव से दुसरे गाँव के बस स्टैंड पैर जाता ,almost 2km ,then वहां से बस पकड़ता ..और फिर श्याम को वापिस ..मेरी बड़ी सिस्टर मुझे सड़क पैर ही मिल जाती थी मेरी बाट देखते हुए ...फिर वो सर पैर हाथ रख कर सहलाते हुए बोलती..थक गया मेरा भाई आज..
 
And after a thorough research, I have come to the conclusion that "jealousy thy name is woman". A woman can never give a genuine advice to another woman out of jealousy. A beautiful woman would never share the secrets of her beauty with other women.

I am jealous of all you guys that you have that much time to give valuable inputs here.
 
jyani ji rajpal ji ko confuse mat karo kal hi unhone vp ji se sikha hai ki ye jealousy ki nature aurato me kitni parbal hoti hai.bechaare confusva jaayege
I am jealous of all you guys that you have that much time to give valuable inputs here.
 
I wish I could travel back in time to fulfill the unaccomplished tasks left behind and to realize the dreams cherished in my twenties.[/QUOTE]

They were not dreams VP ji. They were your fantacies. Even if you go back in time you will still need permission of the other person to fulfil them nahi to khatra ho sakta he jaan aur izzat ka.




Its a joke VP ji. That teenage style joke.
 
, लेकिन सच्चाई यह है कि यदि कर्म ठीक नहीं हैं तो फिर उसका दंड शरीर को ही भुगतना पड़ता है...कर्म भी ठीक रहें तथा शरीर और व्यक्तित्व के लिए भी मेहनत होती रहे...मेरे ख्याल से तो यही ठीक है...

उपेंदर, इसका मतलब जिनके छोटी उम्र में बाल झड गे, या सफ़ेद होगे उनने कोए गलत काम कर राखे थे i आपके हिसाब से ये कर्मो का फल है ? फेर तो दुनिया में पापियों की पहचान बहुत आसन हो जाएगी i जिसके सर पर कम बाल वो उतना ही बड़ा पापी i और जिसके सर पर घने और लम्बे बाल वो उतना ही बड़ा धर्मात्मा . या हर्बल की रानी शहनाज़ हुसैन तो फेर घणी बड़ी धर्मात्मा सै, इसके सर पै पूरा झाड उग रह्या सै i उर्मिला जी नै आर मन्नै बताओ किसके खेत मैं भैंस बाड़ दी i इनके बाल घने लम्बे नहीं बढ़ रहे आर मेरे भी काफी सफ़ेद होण लागगे इतनी काची उम्र मैं i
 
jyani ji rajpal ji ko confuse mat karo kal hi unhone vp ji se sikha hai ki ye jealousy ki nature aurato me kitni parbal hoti hai.bechaare confusva jaayege

ओहो, अब जाने भी दो ऋतू जी, क्यों आप लोग तकरार बढ़ाते हो I आओ ना हम सब मिलकर कुछ और नया अनुसंधान करें बाल और त्वचा की सुरक्षा की दिशा में I अब देखिये ना हमारी दादी परदादी भी तो कितनी conscious थी अपनी जुल्फों के बारे में I हर महीने एक पाव देशी घी लगवा कर गाँव के Beautician यानि नाण से कितनी प्यारी प्यारी गुथ और परांदे बनवाती थी I मैं खुद कितनी बार दादी जी या माँ का चुंडा बनवाने के लिए 'नाण ताई' को बुलाने जाता था बचपन में I और मैं देखता हूँ की आज की महिलाएं भी अपने बालों और त्वचा के बारे में उनसे कहीं ज्यादा conscious रहती हैं I मेरी जानकारी के अनुसार अधिकांश पढी लिखी और संभ्रांत महिलायें अक्सर hair styling , colouring , bleaching , facial, eye -brows , waxing और threading करवाने पार्लर पर जाती हैं I आपको शायद नहीं मालूम कि जो रसायन वहां पर उपयोग में लाये जाते हैं वो कितने हानिकारक होते हैं I पार्लर पर प्रयोग में लाये गए हानिकारक रासायनिक पदार्थों से कैंसर जैसी असाध्य बीमारियाँ पैदा हो जाती हैं I इसलिए अगर आज कोई महिला इस के बारे में कोई चर्चा करना चाहती है और लोग कुछ देशी और आयुर्वेदिक नुश्खे एक दूसरे को बता दें तो इसमें हमें अपनी खीझ नहीं दिखानी चाहिए I मैंने देखा है कि बहुत जल्द हम पार्टी बाजी पर उतारू हो जाते हैं I उर्मिला जी से मेरे भी कई मामलों में गंभीर मतभेद रहे हैं और आगे भी शायद बदस्तूर जारी रहने के पूरे पूरे इमकानात हैं I परन्तु इसका यह मतलब नहीं कि उनकी अगर कोई जायज़ बात हो तो मै उसकी खिलाफत करना या उसका उपहास उडाना अपना जाट धर्म बना लूं I हम लोग इतने दकियानूसी दृष्टिकोण से कब बाहर निकलेंगे I हम लोग गुड खा लेते हैं और गुलगुले सुहाली खाना फैशन के खिलाफ मानते है I तनिक नारियल का तेल सर में लगा कर ठन्डे दिमाग से सोचिये कि हमारे व्यव्हार में कितना द्वंद्व है I

वैसे चलते चलते एक देशी नुश्खा पेशे नज़र या पेशे खिदमत है :
आंवले का मुरब्बा और चवन प्राश भी अच्छी औषधि हैं बालों और त्वचा के लिए I खूब खाइए और बालों को सुन्दर, घना और त्वचा को स्वस्थ रखिये I क्योंकि अगर बाल और त्वचा स्वस्थ रहेंगे तभी ना हम सब की जोबनिया बरक़रार रहेगी I प्रतिकिर्या लिखते रहिएगा मगर प्यार से I
 
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बालों को इस्त्री करण का राछ भी आवे स आज काल ( straightener कह्य करें शायद) .... चिमटा सा..... जमा प्रेस सी गाड दे स बालां में .... उसके नुक्सान या फायदे का भी बेरा स के किसे ने ? आप ने इस्तेमाल कर के देखा हो ? मेरे ख्याल तें तो लंबे बाल जब भी लगेंगे जब सही प्रेस कर राखे हों....... घुंडी खाए ओड़ छोटे लागेंगे ......... समझ तो थम गए ए होगे.... !!!
 
i am jealous of all you guys that you have that much time to give valuable inputs here.

हाँ भाई, विपिन हम तो होक्का भरके कीकर तलै ठाली बैठे सें i भाई थोड़ा टेम तो आपनै भी काढना चाहिए i हमनै बेरा सें आप धोरे टेम की तो काफी तंगी रहवै सै i पर भाई काम के चक्कर मै जै बाल उड़ ज्यांगे तो फेर के मज़ा रह्ग्यागा जिंदगानी का i शायर ने कहा है "क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया" i अगर वो शायर आज जिंदा होता तो शेयर कुछ यों होता "क्या लुत्फ़ दौलत का, जब बाल ही उड़ गए"
 
TYM PASS K LIYE TOPIC ACHHA HAI
>IS AGE TAK AGAR SKIN CARE N HAIR CARE NA AATI TO
BADAM KHAO
8th std k bachhe body scrubber,conditioners n cleanser,n moisturiser n
so on sab jante hai or bahut se use b karte hai
SIMPLE
HAR ROJ NAHAO
OR DUSRE YA TEESARE DIN BAL DHOLO
OIL LAGAO
JARURAT HO YA SHAUK TO COLOUR LAGAO
*CANTHRAIDINE HAIR OIL*
IS MEANT FOR HAIR LENGHT TREATMENT
N MAHABRINGRAJ FOR QUALITY HAIR
USE HAIR SERUMS N HAIR SPA
TYM TO TYM
desi ideas b bahut hai
jo maa ne sikhaya vo hi apply karo
 
न्यू बेरा ना फायदा के स....... मेरी दादी तो दही तें भी बाल धोया करती...... ख़ास कर जाड्यां में.... !!!!
 
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