सब कुछ पहले से नियोजित जैसा था:
1) आमिर खान ने पूछा की आप कानूनी अधिकारिक हो? मैं होता तो पूछता कि कोनसी मस्जिद या फ़तवा कानूनी अधिकारिक होता है? कौनसा हिन्दू मंदिर या गुरुद्वारा कानूनी अधिकारिक है? मेरे लिए तो उसका उनसे ये प्रश्न पूछना ही गलत था. हानर किल्लिंग की बात थी उसपे बात करता| देश की अदालतों या ऐसा समाज जो ऑनर किल्लिंग से मुक्त हो, के सिवा ये पूछने का अधिकार कि आप अधिकारिक हो या नहीं किसी व्यक्ति या समुदाय को कैसे दिया जा सकता हैं|
2) खाप, इंग्लैंड का उदाहरण दे के ये कहना चाहती थी जब हम हर बात और फैशन पे अंग्रेजों का अनुसरण करते हैं तो जैसे उनके वहां के कानून उनकी अपनी परम्पराओं के अनुसार बने हुए हैं वैसे ही हमारे यहाँ क्यों नहीं परन्तु कोई अपनी बात पूरी करने दे तो ना, उससे पहले ही आमिर महाशय दुसरे प्रश्न पे कूद पड़े| यहाँ पर उनका दोगलापन किसी को नहीं दिखा की वैसे तो हर चीज इंग्लिश की अनुसरण करनी लेकिन उनमे से एक चीज का अनुसरण खाप करने को बोल रही है तो उसपे कन्नी काट जानी| इस वक्तव्य से ये कदापि ना समझा जाए कि मैं ऑनर किल्लिंग के पक्ष में हूँ नहीं मैं इसके धुर-विरोधियों में हूँ और अपनी परम्पराओं के अनुसार भी कानून देश का बने तो भी उसमे ऑनर किल्लिंग को सख्त कानून के तहत रखा जाए| परन्तु 1200 वर्ष के गौरवशाली इतिहास की खापों को, जैसे आपके अंग में काँटा चुभ जाए तो आप पूरा शरीर काट नहीं फेंक सकते वैसे ही खापों में कोई बुराई है तो भी उनके अस्तित्व पे सीधा अधिकारिकता का प्रश्न नहीं डाला जा सकता | और डालना ही है तो सबसे पहले यह प्रश्न डालने वाले अपने खुद के समाज पे डालें|
काम की बात:
1) इस एपिसोड से ये चीज तो सामने आई कि हमारी खापों के पास अच्छे प्रवक्ता नहीं सो हमें ही अपनी खापों के प्रवक्ता बनना होगा|
2) उसके लिए हमें अपने बुजुर्गों और खापों से सीधी बात करनी होगी|
3) खापों को अपने इतिहास को एकत्रित करके उसको आधुनिक तरीके से संजो के लाना होगा| फिर अपनी आज की पीढ़ी के साथ बैठ, आज के अनुसार के समाज की रचना करनी होगी| अगर खापें ये कर पाती हैं तो सही, नहीं तो अब वो दिन दूर नहीं जब राजे और रजवाड़ों के दिन लदने के बाद अब उनका भी लदने का वक़्त आ पहुंचेगा और वो वक़्त दस्तक दे रहा है या तो उसको उलटे-कदम वापिस भेजने पे कार्य हो वरना होनी तो हुई बैठी है|
4) खापों के प्रतिनिधियों को भी उनकी जिम्मेदारी की गंभीरता को समझना चाहिए और इसका आभास रहना चाहिए की वो भारत के कानून और अपने खुद के समाज को छोड़ किसी भी ऐसे कार्यक्रम में किसी को जवाबदेह नहीं हैं| और उसपे भी अगर जवाब देने के इच्छुक बनते हैं तो पूरी तैयारी से जाएँ और सामने वाले से सुनिश्चित करवाएं की उनको उनकी बात पूरी कहने दी जाएगी|