What Happens After Death ?

'स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती' के विचार

नास्तिक जीव एक बार अवश्य पढ़ें !

बाल सत्यार्थप्रकाश ~ स्वामी जगदीश्वरानन्द सरस्वती (प्रकाशक: विजयकुमार गोविन्दराम हासनन्द), से निम्नलिखित विचार प्रस्तुत हैं:

"ईश्वर की आवश्यकता :-

प्रश्न उत्पन्न होता है कि जगत्कर्ता ईश्वर के मानने की आवश्यकता ही क्या है ? यह जगत अनादि काल से जैसे-का-तैसा बना हुआ है | न कभी इसकी उत्पत्ति हुई और ना कभी विनाश होगा | इसका उत्तर यह है कि कर्ता के बिना न कोई क्रिया हो सकती है और न क्रियाजन्य पदार्थ बन सकते हैं | .... देखो ! शरीर में किस प्रकार की ज्ञानपूर्वक सृष्टि रची है कि जिसको विद्वान लोग देखकर आश्चर्य मानते हैं | भीतर हाड़ों का जोड़, नाड़ियों का बंधन, मांस का लेपन, चमड़ी का ढक्कन, प्लीहा, यकृत, फेफड़ा, पंखा-कला का स्थापन, जीव का संयोजन, शिरोरूप मूलरचन, लोम-नखादी का स्थापन, आँख की अतीव सूक्ष्म शिरा का तारवत ग्रन्थन, इन्द्रियों के भोगों का प्रकाशन, जीव के जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति अवस्था के भोगने के लिए स्थान-विशेषों का निर्माण, सब धातु का विभागकरण, कला-कौशल से स्थापनादि अदभुत सृष्टि को बिना परमेश्वर के कौन कर सकता है ? .... "

"बीज पहले या वृक्ष :-

बीज पहले है और वृक्ष पीछे | बीज, हेतु, निदान, निमित्त और कारण इत्यादि शब्द एकार्थवाचक हैं | कारण का नाम बीज होने से वह कार्य के प्रथम ही होता है | जैसे बीज से वृक्ष अंकुरित होता है वैसे ही प्रकृतिरूप बीज से यह संसारवृक्ष अंकुरित होता है | परमात्मा इस बीजरुपी प्रकृति से ही संसाररूपी वृक्ष को उत्पन्न करते हैं |"
 
"When You Meditate, the silence of the Senses illumines the Presence of God within." — Gurumayi Chidvilasananda
 
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