तीसरे मोर्चे की दिक्कत ये है वी पी जी के इस चक्कर में या कांग्रेस वापस आ ज्यागी. हमने पहला मोर्चा देख लिया ५० साल ताहि, दुसरे मोर्चे ने तो अभी १० साल भी न हुए, क्यूँ न इसने एक मौका और दे दयां, कड़े यो तीसरे के चक्कर में पहला फिर से ५ साल और ले ज्या.

वैसे भी, मने तो कोई आसार ना दिख रहे तीसरे मोर्चे के. तीसरा मोर्चा वी पी सिंह और ताऊ देवीलाल के बाद दिखया ही ना.
अगर भारत में द्विदलीय व्यवस्था होती और आज के हालात होते तो आप कांग्रेस ने चुनते या भाजपा ने?
मैं तो भाजपा ने ही चुनता.

कांग्रेस ने मौके देके देख लिए घनी इ बार.