जिब हाम नोमी - दसमी म पढ्या करते आर दुसरे गाम म जाया करते पढ़ण | स्कूल थोड़ी दूर थी डेड - दो किलोमीटर होया करती | हाम खेता-ऐ-खेत जाया करते | आर राह मऐ फराड. मार दिया करते, म्हारा १३-१४ बालका का टोळ होया करता | अर तास खेल के सिरसम म टेमपास कर लिया करते आर जिब छुट्टी होया करती, बालक आते दीखते तो हाम उनमे मिल के घरा आ जाया करते | तो एक दिन के होया भाई हमने प्लान (जो म्हारे गुरुप के थे उनने ) बनाई आक न्यू सुक्की ताश कोन्या खेली जाती किम्मे खाण-पीण का जुगाड़ बी होणा चाहिए साथ म | तो आगले दिन, कोए नुण लाया, कोए मिर्च लाया, कोए चून लाया,कोए तेल लाया, आर न्यू करके हाम सारे कुछ न कुछ लेगे आर पकोड़ी तारण का जुगाड़ कर लिया | आर मार दिया उस दिन स्कूल तै फर्ला | आर इशारा इशारा म म्हारा टोळ बालका तै अलग हो गया | आर सिरसम म लुकगे | इब हमने पकोड़ी तारण का विचार करा | इब एक बर्तन बी चाहिए पकोड़ी तारण ताहि तो खेत के डोळे धोरे एक माट पड़ा था उने आधा फोड़या आर आंच बाळ दी और उसकी साईंडा म भाठे धर के चूल्हा सा बणा दिया | इब सारा सोदा त्यार कर दिया था घोळ के आर तेल चढ़ा दिया था | इनके घर बी धोरे ऐ थे खेत आला के | हमने काम चालू करा ऐ था की उनकी बुडली न देख लिया धूमा उठता | बुडली न रोला ठा दिया म्हारी सिरसम म आग लाग गी रे- म्हारी सिरसम म आग लाग गी रे | इब हाम भाजे सारे लिकड़-लिकड़ के सारा ताम-झाम छोड़ के, फेर उण न बेरा पाट्या आक यो ते और किम्मे सोदा सै, म्हारा बेरा बी कोणी पाट्या आक ये थे कुण | फेर हाम तो बिना पकोड़ी खाए रहगये |