albaadi baalkaan key kissey.

इब्ब मलिक भाई ने खाण पे कमेन्ट कर दिए तो मेरे कई खाण के भी किस्से याद आगे | जब मेरे काका, बाबु हर न्यारे होए तो हेली के कमरे , चोबारे बांड लिए | बाकी तो सारे फोजी , पुलिसये थे पर एक काका हाली अनपढ़ एर रांडा था | ऊ ताहि सारे बोले एक तू एक ओबेरा ले ले एर बाकी घेर बरत लिया कर तेरे के टाबर टींगर सें | एर जाड़ायाँ के दिन थे उने म्हारे साहरे आले ओबेरे में आपना सामान धर लिया एर सुखा हलवा बनवा लिया किसमिस एर बादाम गिरवा कें | एर वो खानदा तो महारा भी बालकां का जी करदा | वो किब्बे -किब्बे दे भी देंदा पर ऊ तें के मन भरे था | उस के ओबरे में ताला ना लाग्र्या था बस उस पिपे के ताला लाया करदा जी में सुखा हलवा था | मन्ने वो गेल तें कुंदे पाड़ कें खोल लिया | एर कुंदे ई ढाल फंसा दिए अक वो ताला खोल के खा लेंदा उने बेरा ना पाटदा | एर में ढक्कन नु दाब कें कुंदे काढ कें खा लेंदा | वो सारा पीपा मन्ने एर मेरे काका ने आधा -आधा खाया पर ऊने कदे बेरा ना पाट्या.| वे जाडे मजे में गए |
 
teraa infiriority complex gayaa koni laage se , ghanaa chidan laagyaa naa to teraa bhee rakesh sehrawat aalaa haal ho jyaa gaa.jo maanas aap kimmey nahi kar sakdaa wo dusryyan me khaam kaa galti kadhtaa haandyaa kare, err ebb to tu meri pitaai ke bhee supney lewan laagyaa.

Jeet mai te sanjay ney rajji karu tha yaar tu te nu e bura maangya....................

mai te nu kehna chahu tha ek thali kacholya me te manganiya k balak leki jaya kare Jaatan k balak te laaduwa aaley obrey me e haath saaf kartey hai sidha k hoya kadey kissey buddi me mar ched kardi ho te.........

Er bhaiya te kisa complex howe tha yaar........
 
Jeet mai te sanjay ney rajji karu tha yaar tu te nu e bura maangya....................

mai te nu kehna chahu tha ek thali kacholya me te manganiya k balak leki jaya kare Jaatan k balak te laaduwa aaley obrey me e haath saaf kartey hai sidha k hoya kadey kissey buddi me mar ched kardi ho te.........

Er bhaiya te kisa complex howe tha yaar........

mebooraa naa maanyaa yo meraa jawaab dewan kaa style se.
 
म्हारे घरां में एक मेरे ताऊ का छोरा सतबीर (वोए जिस पे मढी पे लाडू धरवाए थे) से | जब मेरा काका फौज में लाग्या एर वो पह्ल्डी गेडे छुट्टी आया तो वो ऊताही कहण लाग्या एक तू मन्ने दारु प्या | सतबीर ने कदे दारु ना पि थी पर वो नु बोल्या अक में बोतल की बोतल पि जाया करूँ | आगले दिन मेरे काका ने वो घेर में बुला लिया सांझ सी नु एर एक बोतल में गाँ का मूत एर एक बोतल में दारु घाल ली | एर ऊ ताहि मूत घाल घाल प्याएँ गया एर आप दारु पियें गया | सतबीर ने नशे का तो बेरा ना था पर खाम खा दिखावा करें गया अक जानू तो ऊके नशा होर्या से | आगले दिन ऊ ताहि बताई अक रे तेरे ताहि तो गाँ का मूत प्या दिया तो उका मुंह देखन लायक था | फेर उने कदे किस्से तें दारु ना माँगी | एब्ब ताहि सारी गाळ उका मजाक उडाया करे |
 
रविंदर भाई तू गाम के उन आदमिया का नाम बता दे जिन गेल तेने अल्बाध न करी हो.... कोए एक आध पावेगा कसाई..... फेर उस ने हम इनाम देवांगे आक भाई तू कसूत बच्या .... हा हा हा हा हा हा ..... थ्रेड का नाम चेंज कर दयो मोड्यो... " एक अल्बाधि बालक के किस्से"
 
रविंदर भाई तू गाम के उन आदमिया का नाम बता दे जिन गेल तेने अल्बाध न करी हो.... कोए एक आध पावेगा कसाई..... फेर उस ने हम इनाम देवांगे आक भाई तू कसूत बच्या .... हा हा हा हा हा हा ..... थ्रेड का नाम चेंज कर दयो मोड्यो... " एक अल्बाधि बालक के किस्से"

anil bhai gaam ghanaa baddaa se 99% meri albaadyaan te bach re honge . er me to sabtey sidhey baalkaan me ginyaa jaayaa kardaa.jab mere kisse jo mere yaad sein we khatam ho jayaange fer me auraan pe bujh-bujh ke likhyaa karoongaa.
 
मेरी गैल एक छोरा पड़्या करदा शायद उका ना करमबीर था | ऊँ तो वो मेरे तें ४-५ साल बड्डा था पर था म्हारी क्लास में | मन्ने नई-नई साईकल चलानी सीखी थी केंची | एक दिन में म्हारे खेता में जावन लाग्र्या था केंची साइकल चलान्दा एर दूसरी ओड़ तें वो आवे था साइकल पे एर उने मेरे साइड तें आके टक्कर मार दी जान बुझ कें सतावन खातेर | मेरे साइकल का एक पहिया बाँगा हो ग्या| एर जब मेरा बाबू उनके घरां सिकायत ले कें गया तो उका बाबू नु बोल्या अक महारा छोरा नु कुकर कर सके से उने तो साइकल चलाणी-ए कोणी आंदी | १०-१२ दिन पाछे में म्हारे खेताँ में डांगर चराण लाग्र्या था एर वो फेर उडे-ए के साइकल चलान्दा दिख ग्या | जब वो मेरे साहरे के लिकड़ा तो मन्ने ऊके पहिये में लाठी अडा दी | ऊके साइकल की घनिये ताड़ी टूट गी | एर वो मेरा कुछ कर भी ना सक्या उडे म्हारे घर के खेताँ में-ए थे | एर उका बाबू ने भी बेरा पाट ग्या अक ऊके छोरे नु साइकल चलाणी आवे से अक नहीं |
 
१० -१२ बालकां की टोली थी (किलकी टोल) | म्हारे धोरे पिस्से तो थे कोणी एर आडू खाण नु जी करे | तो हामने प्लान बनाई एर हाम दो जन्ने आगे गए एर बाकी बणी में लुक गे | उस बाग़ के परली ओड़ नु एक दूमंजिला कोठड़ा था ऊ पे वे बैठ कें रूखाल कर्या करदे| हामने देख कें दूर तों -ए वे तले ऊतर आये | हामने यो ओड़ा मार्या अक थारा छोरा रमेश मेरी क्लास में पढ़े से एर वो मेरी किताब लेर्या से | हाम थारे घरां गए थे उन्ने नु काहीसे अक वो बाग़ में जार्या से हाम ज्या ताहि आड़े आये सां | वे नाट्गे अक रमेश आड़े कोणी आया | एर जब वे तले उतर आये तो म्हारी बान्दर सेना ने बाग़ के एक कोणे पे धावा बोल दिया | एर ४-५ मिनिट में -ए ५-७ किलो आडू हाम तोड़ लाये | एर छिक-छिक खाए |

इब्ब म्हारे सूवाद मुंह लाग गया था मुफ्त के आडूआँ का | हाम ने फेर ओड़ा मार्या अक हाम ने गड़गेडा ( ताराँ का मोश कें बनाया होया एक खेलना ) बनवाना से रमेश पे | वे फेर नाट्गे अक वो आड़े कोणी आया | एर हाम फेर आडू तोड़ लाये | हाम ने तीसरी बार फेर ओड़ा ले कें आडू तोडंअण की कोशिश करी पर उने बेरा पाटग्या था अक ये जब भी आंवें से बाग़ में उजाड़ हो ज्या से | वे हाम ने दूर तें कोठड़े पर तें देख कें पकड़न खातर भाज कें आवें थे | हाम समझ गे के आज तो फंश गे इन् ने बेरा पाटग्या म्हारी पलानिंग का | एर ऊ दिन हाम मुश्किल तें बच पाए जब वे म्हारी गैल भाज्दे-भाज्दे बणी में आये एर उडे १०-१२ बालकां की टोली पायी एर हाम सारे भाठे-ईंट ले कें खड़े होगे उन के आगे | वे दो जन्ने थे डर गे | पर ऊ दिन पाछे म्हारी काठ की हांडी फेर ना चढ़ी | हाम ने भी जो मिला मुफ्त का ऊमे संतोष कर लिया | संतोष परमो धर्मं: |
 
एक महारा मास्टर था गणित पढ़ाया करदा रामदित्ता (भूतनी का )| वो कदे किस्से पे एर कदे किस्से पे खेताँ माँ तें हर्या साग मंगाया करदा | एक बे मेरा भी नंबर आग्या | उने मेरे पे टाट मंगाई | में एर मेरा एक सहपाठी उने खंदा दिए | हाम म्हारे खेताँ में गये एर टाट पाड़ कें एर उन के माह के चने खा लिए | एर ई ढालाआँ चने काढ़े एक टाट लागी रह गी | उन थोथी टाटाआँ के चारूं ओड़ माड़ी सी आछी आली टाट भी बाँध दी | उका झोला ठाडा भर लाये | एर जब वो साईकल पे लिकड़ा सकूल माँ तें एर झोला ठाड़ा भर्या देख कें घणा राजी होया एर म्हारे ताहि शाबास बोल्या | आगले दिन म्हारे कानी घूर - घूर कें लाखावे मारणे झोटे की ढाल | फेर म्हारे ताहि तो उने कदे कही नहीं किम्मे लावन की |
 
मेरा एक दोस्त था एर उनके खेत फिरनी धोरे थे | उनके ईंख में घणा उजाड़ होवण लाग्या | ईंख के खेत में बीचाले कोय बड कें रोज तीन चार खाट वारा गंडे चून्घ जांदा | हाम ने कई दिन नजर राखी पर बेरा कोणी पाट्या | ध्यान तें देखे तें बेरा पाट्या अक यो मानसा का कर्या होया काम कोणी | बेतरतीब गंडे पाड़ तोड़ राखे थे | हाम ६-७ दोस्त कट्ठे हो कें एर २४ घंटआँ का पहरा ला दिया | रात नु १० बजे सी ईंख माँ तें वाज आवन लागी | हाम बड़े भीतर नु लठ ले कें तो एक अजब तमाशा देखा | उडे ९-१० बाँदर गंडे चुन्घन्न लागरे | एर हाम नु देख कें भाज कें जोहड़ के रून्खा पे चढ़गे | रात नु किम्मे कर ना सकां थे हामने आगले दिन २०-३० बालक कट्ठे करे एर वो बड़ घेर लिया जी पे बाँदर रह्या करदे | सारे डाहल्यां पे एक -एक जणा चढ़ गया लट्ठ ले कें | किम्मे बाँदर तो ऊपर चढ़न तें पहलम भाज्गे एर किम्मे घिर गे | उन माँ तें २ बाँदर जोहड़ में कूद गे एर बालकां ने सारा जोहड़ घेर लिया | जीतोड़ बाँदर जाँ नूने उनके लट्ठ लागें | आखर में वे थक्गे तो उनके घेटि में बाँध के जेव्डे एर उन के आछे लट्ठ पाड़े( मन्ने पहली बार बाँदर हाथ जोड़ते देखे थे) दुसरे बाँदर भी देखन लागरे थे अक उन के भाइयां गेल्यान के होवण लाग्र्या से | फेर वे बाँदर २-३ की.मी. ताहि भाजाये दुसरे गामां कानी | जब जा कें मेरे दोस्त के खेत में उजाड़ होना बंद होया |
 
जिब म्हारी छिताई होई थी, जिब के रोजः होया करती | पण मै उस छिताई की बात करू सू जो पाछली अलबाद म होई थी, इसके ५-७ दिन पाछे ए मेरा काका नई, कती काच्ची चप्पल लाया, आर ल्याते इ उन क सैयडा म बद्दी तले ताती फुक्णी कर क चेप दी ज्या तै हाम म्हारी चप्पला न पिछाण ल्या | तो मेरे चा चढ़ रह्या नई चप्पल पहरण का, साँझ की सी न ल्याया था मुस्क्ल तै रात काटी थी | आगले दिन तह्डके ताव्ला उठ ग्या था आर त्यार हो के स्कूल म चले गये आर जिब किलास म बैठा करते तो चप्पल काढ के बैठ्नी पड़ा करती | तो जिब आधी छुट्टी होई तो मै अपनी चपला न टोवन लागरया | चप्पल कड़े तै मिलः थी चप्पल तै चोरी हो ली थी | मै चप्पल ढूंढ़ता हांडू था तो वाहे छोरी आई जो पाछली अलबाद म म्हारी छिताई करवावे सै (म्हारी बैरण) आर बोली हा रे तेरी चप्पल खु गी | पहल्या तै मन्ने हा भरली आक हा खु गी फेर मन्ने अंदाजा लाया आक इनः क्यूकर बेरा पाट्या मेरी चप्पल खु गी, फेर मै उभाना ए घरा आ ग्या | आर वा छोरी आपणे घेर म जाण लागरी थी अपणी माँ न टोवन खातिर, मन्ने वा देख ली मेरी चप्पल पहरया थी | मन्ने सोची अक आज ठीक मोका सै पाछला बदला लेण का, मै उस तै पह्ल्या जा लिया उसकी माँ धोरे आर सारी बक्दी और एक आधी मेरे कानी तै जोड़ दी आक बालका के पेन-पेन्सिल बी काढ ले सै | उ की माँ घेर म गोसे पाथः थी | इतने वा छोरी आ ली पह्ल्या तै मेरी चप्पल दुवाई आर फेर उके मारण लागी उस गोबर आले हाथ तै, वा घणी छेती उस टेम पै | मन्ने वा कई दिना ताहि चिड़ाई आर न्यू करके मन्ने अपणा बदला तारया | आर ना वा कदे म्हारे घरा आई कोई बात बतावन मेरी माँ न उस दिन पाछे | मजा आ गया |
 
म्हारी कंपनी आई एम् टी मानेसर (गुडगाँव) म सै | म्हारी कंपनी म राज डागर उः तो इलेक्ट्रीसियन की पोस्ट पै सै | पण कंपनी का मालिक जो काम कह दे है न, वो पूरा कर दे सै चाहे वो किसा ए काम हो वो ड्राईवर भी बन जा सै, गार्ड बी बन जा सै और कंपनी का किसा बी काम हो सारा कर दे है कती आलराउंडर सै, जिब्बे तै कंपनी का मालिक उस तै राजी रहवे सै आर वो अल्बाद इतणी करे सै की बूझो मत | आर कुबध बी घणीए करः ह चै कोई बी हो, सार्या की गेल कर ले सै | एक दिन के होया की कंपनी के मेनेजर गेल कुबध करण लाग्र्या कदे तो उके गाल पाड़े आर कदे उके चुटके भरः आर वो मेनेजर सै उतरांचल का इब कुछ कर बी ना सकता, ना मालिक न कहवे डरता (वो पहलया ए डरता रहवे सै हरयाणा के नाम तै) वो न्यू सोचे सै कदे भारने लिक्ड़ते इ सोड भर दे ना तेरी | इब मेनेजर न करड़ा मन करके कही आक राज तू हाथ-पां मतना चलाया कर तन्ने मजाक करनी हो तो मुह तै करा कर | न्यू कहते इ राज न उसके बड़का भर लिया ख्वे पै कती चकला पाड़ दिया, घड़ी सी मांड दी, उं दिन पाछे ना तो उसने कदे मुह तै मजाक करण की कही ना राज का हालचाल बुझे, वो न्यू जाणे सै आक राज ते तो कोई ना बोले तो इ ठीक सै क्योकि जो बोल ज्या सै उसकी खेर नही फेर |
 
म्हारी कंपनी आई एम् टी मानेसर (गुडगाँव) म सै | म्हारी कंपनी म राज डागर उः तो इलेक्ट्रीसियन की पोस्ट पै सै | पण कंपनी का मालिक जो काम कह दे है न, वो पूरा कर दे सै चाहे वो किसा ए काम हो वो ड्राईवर भी बन जा सै,

sunil bhai yo raj aalaa kissaa to badhiyaa se par raj baalkaan ki shareni me to koni aandaa.
 
जब हाम दशमी में पढया करदे | म्हारे स्कूल की एक टूर आगरा दिल्ली ले जावन की पलान बनगी | हाम २०-२५ जणआ का जत्था बन गया एर म्हारे गाम का गणित का मास्टर रामफल एर ड्राइंग का मास्टर रविंदर जीत सिंह सरदारजी म्हारी गैल गए | हाम आगरा पोह्न्च्गे एर खाणा खावण का बखत होया तो एक होटल आले गल्याँ ठेका कर लिया एक हाम नु सार्या नु छिक-छिक के खाणा खुवाना से एर वो उस बखत किम्मे २५०/- रापियाँ में राज़ी होगया अक साबत दिन की कमाई एक झटके में हो जावेगी | में उस जत्थे में सारयां में छोटा था एर सारे मन्ने धमकावन लागे अक घनी रोटी खानी से तू -अ महारा नाम खराब कर सके से | एर भाई हाम बैठ गे खावण | सारयां ताहि कम तें कम ५० रोटी खावण का टार्गेट दे राख्या था | जब घणखरे ३०-३५ रोटियाँ पे पून्च्गे तो होटल आला लाग्या हाथ-पाँ जोडन अक में तो बर्बाद हो जयां गा पर हाम माने कोणी एर नु बोले अक हाम तन्ने एक रापिया भी कोणी दयां | उने नुकसान होंदा देख कें ५-५ रोटी होर खुवा दी एर सब्जी में घणी-घणी मिर्च गेरण लाग्या | सारयां में कम रोटी मन्ने खाई |१६ रोटी | एर फेर मन्ने सारयां का कोप भाजन बन्नंना पड़्या अक तन्ने तो जाटां का नाँ डुबो दिया | आखिर में होटल आला पाद गया एर होटल छोड़ कें आपने आदमियां की गैल बाहर जा कें बैठ गया जब हामने बिना छीकें होटल तें लिकडअन तें मना कर दिया | आखिर में म्हारे मास्टरआँ नु उपे दया आगि एर वो छोड़ दिया एर ऊके पिस्से भी दे दिए | एर ऊ ताहि नु दिखाण खातर अक देख हाम इब्बी भूखे सां सामी खड़ी एक रेहड़ी आले गैल ठेका कर लिया एर उकी रेहड़ी के सारे केले खा गे | वो होटल आला देखे गया | फेर आकी नु बोल्या तम मन्ने नु बता दो अक किथों आये सो | जब हाम ने नु बताई अक हाम हरयाना के जाट सां तो वो नु बोल्या अक इब्ब पाछे में हरयाना के जाटां गेल्याँ ठेका ना करूँ जिन्दगी में | एर नु बोल्या अक मन्ने आज ताहि कदे मानस इन्ना खाणा खांदे कोणी देखे थे |
 
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