ravinderjeet
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इब्ब मलिक भाई ने खाण पे कमेन्ट कर दिए तो मेरे कई खाण के भी किस्से याद आगे | जब मेरे काका, बाबु हर न्यारे होए तो हेली के कमरे , चोबारे बांड लिए | बाकी तो सारे फोजी , पुलिसये थे पर एक काका हाली अनपढ़ एर रांडा था | ऊ ताहि सारे बोले एक तू एक ओबेरा ले ले एर बाकी घेर बरत लिया कर तेरे के टाबर टींगर सें | एर जाड़ायाँ के दिन थे उने म्हारे साहरे आले ओबेरे में आपना सामान धर लिया एर सुखा हलवा बनवा लिया किसमिस एर बादाम गिरवा कें | एर वो खानदा तो महारा भी बालकां का जी करदा | वो किब्बे -किब्बे दे भी देंदा पर ऊ तें के मन भरे था | उस के ओबरे में ताला ना लाग्र्या था बस उस पिपे के ताला लाया करदा जी में सुखा हलवा था | मन्ने वो गेल तें कुंदे पाड़ कें खोल लिया | एर कुंदे ई ढाल फंसा दिए अक वो ताला खोल के खा लेंदा उने बेरा ना पाटदा | एर में ढक्कन नु दाब कें कुंदे काढ कें खा लेंदा | वो सारा पीपा मन्ने एर मेरे काका ने आधा -आधा खाया पर ऊने कदे बेरा ना पाट्या.| वे जाडे मजे में गए |