Apni Do Line .......Contest

वह भाई म्हारे देसी कवी चाले पाड़गे,
अपनी तुकबंदी ते जाटलैंड पे झंडा गाडगे ।
पुन्झड टोहन आले चिचड़ा ने बिल में बाड़गे ,
एक एक कलि इसी घडी सुननिया के पत्ते से झाड्गे । ।
 
ajit ne thread suroo karyaa
kavitaa se khali man bharyaa
ak ismey kuchh aapnaa bhi jod laao
tukbandi ke baadshah ban jaao
par aade to asli baat paachhey rehgi
kavitaa apas ki taang khinchaai me dehgi
 
ajit ne thread suroo karyaa
kavitaa se khali man bharyaa
ak ismey kuchh aapnaa bhi jod laao
tukbandi ke baadshah ban jaao
par aade to asli baat paachhey rehgi
kavitaa apas ki taang khinchaai me dehgi


ha ha bhai ravinder bat kahi khas tane ,
bas u te dala tha ,jise len ka ghas mane.
par kavitai me tha rakha hai nas tane ,
treko parhana padega badsahi ka taj mane.
 
main usstey ghana pyar karya karta.... par wa mera dil sa tod gii...,
isaa lagya jannu jethh ke mhiney main, mhais dhaar dena chhod gi...


इतना प्यार जे भैंस ते करता ,गर्मी में ना रडावे है ।
तू दूध का मघा भरता , वा सीत मांगन आवे है ।
 
भाई मैं ए शुरुआत कर दयूं आपकी कविता मैं,
बढिया लगे तो ठीक, ना तो ओर लैन जोड लियो:

घड कै मूरत अपणे जैसी, फ़ेर घाल दी जान,
अपणे धोरे तै फ़ेर दे दी धरती की उडान!
wah ji
आपने भी मानस का खूब हैलिकोप्टर बनाया ।
घाल तुकबंदी का तेल जाटलैंड पे उड़ाया
।
 
हा हा हा .......लील भाई .....डट जा मका .......भैंस हाथल हो रही थी उसक ....:rock:rock
अर्र इब्ब ते या हालत हो रही से की :

हमने किसे ते प्यार कोन्या , क्यूंकि किसे ने हम ते प्यार कोन्या !

म्हारी जिन्दगी ते इसी होगी जणू म्ह्सा की खोर में न्यार कोन्या !!!


तेरे हालत बदल देंगे
इब तू किसे ते प्यार कर ,पर लाल लते ने देख मत डर।
वो लगेंगी प्यार की फुहार , इसी जणू खोर गई भर
।
 
हा हा हा .......लील भाई .....डट जा मका .......भैंस हाथल हो रही थी उसक ....:rock:rock
अर्र इब्ब ते या हालत हो रही से की :

हमने किसे ते प्यार कोन्या , क्यूंकि किसे ने हम ते प्यार कोन्या !
म्हारी जिन्दगी ते इसी होगी जणू म्ह्सा की खोर में न्यार कोन्या !!!

कहते है उसके घर में देर है अंधेर नहीं
पर म्हारी खोर में ते आज भी न्यार नहीं
 
एक जाट, जाट
दो जाट रोल्ला
तीन जात खूंड
चार जाट - चाल जोहड़ में नहान चालेंगे
 
रान्ना झोटा थारे मेहसा की सारी सान्नि खा गया
मन्ने अपने ए कोड में एक और बग पा गया |
 
एक जाट, जाट
दो जाट रोल्ला
तीन जात खूंड
चार जाट - चाल जोहड़ में नहान चालेंगे
कलयुग में
पांच जाट - चल आरक्षण मांगेंगे

हा हा हा हा हा हा हा हा ..
ये भी कती डूब लिए ,लागे दर दर मांगन भीख ।
बेसरमी में कसर नहीं, फिर भी देवे सभा बीच सिख ।
ये वो पुराने जाट नहीं ,मानने लागे असली नीच ।
 
कहते है उसके घर में देर है अंधेर नहीं
पर म्हारी खोर में ते आज भी न्यार नहीं

मन्ना हो उदास प्यारे ,तेरी खोर का भी जुगाड़ बिठावेंगे ।
इसा जादू ला देंगे ,लोग तन्ने खोर पे ही नुहावेंगे।
 
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