jat duniyaa ki najar mey

"जट्टों से राजपूत हो सकते हैं परन्तु राजपूतों से जाट कभी नहीं हो सकते हैं "-----मी. नेस्फ्हिल्ड

इंसान चाहे तो क्या नहीं हो सकता i राजपूतों और जाटों ने ऐसा चाहा नहीं यह बात जुदा है i वैसे रविंदरजीत भाई की बात में दम है I ऐसा होने के लछन जाटों और राजपूतों में लगते नहीं क्योंकि दोनों ही आन पर मिटने वाली कौम हैं. अँधेरे उजाले इक्का दुक्का केस हो गया हो तो उसकी कोई गिनती भी नहीं होनी चाहिए i
 
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इस दुनिया में कोई भी जाति ऊपर से तो बनकर आई ही नहीं. चमत्कार से तो बस एक स्त्री और एक पुरुष को ही पैदा किया गया होगा. जैसे-जैसे यहां इंसानों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे विचारों, जीवन पद्धति इत्यादि के आधार पर विभिन्न जातियां और धर्म बनते गए. मेरा ख्याल है कि हिंदू धर्म में जो क्षत्रिय जाति थी, उसमें से ये ठाकुर (राजपूत) और जाट निकले हैं. गौर से देखा जाए तो ठाकुरों से जाट काफी मिलते-जुलते हैं. वर्तमान में भले ही जाट ठाकुरों से काफी आगे निकल गए हैं, लेकिन किसी समय ठाकुरों का भी अपना अलग ही रुतबा था. ठाकुर भी योद्धा हैं, किसान हैं, पहलवान हैं, दिखने में आकर्षक हैं और अमूमन स्वभाव भी अच्छा है उनका, वैसा ही जाटों के साथ भी है. कहीं-कहीं तो जाटों और ठाकुरों में वैवाहिक रिश्तों के भी उदाहरण हैं. अगर मैं समाज में जाटों जैसा रहन-सहन और शानो-शौकत कहीं पाता हूं तो वे ठाकुर ही हैं (हालांकि सभी नहीं). ठाकुरों के पतन का कारण उनकी ऐयाश प्रवृत्ति रही, जिस पर वर्तमान में जाट चलते नजर आ रहे हैं. जाटों में बढ़ता ऐयाशी का चलन कोई बढ़िया बात नहीं है.
 
ठाकुरों के पतन का कारण उनकी ऐयाश प्रवृत्ति रही, जिस पर वर्तमान में जाट चलते नजर आ रहे हैं. जाटों में बढ़ता ऐयाशी का चलन कोई बढ़िया बात नहीं है.

Nahi bhai Upender aisa nahi hai...Adhikansh Jaat to mehnat mei hi vishvass rakhte hain :) Ikke dukke exception to har jagah mil jaate hain :)
 
"गोत्र प्रथा को केनेडा ,अमरीका व् इंग्लेंड में बसने वाले जाट भी मानते हैं |"------------कप्तान फाल्कन
 
"जट्टों की विशेषता हे की वे अपने गोत्र में शादी नहीं करते चाहे वे हिन्दू जाट हों या पंजाबी | क्योंकि जाट इससे व्यभिचार मानते हैं |"--- विद्वान् मेजोर ब्रेशटो
 
"याद रहे चीन ने १५०० मील लम्बी और ३५ फीट ऊंची दीवार जट्टों से बचने के लिए ही बनाई थी |"----------विद्वान् टालबोट राईस
 
"जाट वास्तव में हिदुओं की कोई जाती नहीं हे ,यह एक नशल हे |"----------- इतिहासकार जे.सी.मोर
 
"गुट ,गोट ,गुटी ,गुट्टा,गोटी और गोथ आदि जट्टों के नाम के ही शाब्दिक उच्चारण के विभिन्न रूप हैं , जो मध्यपूर्व में महान शाशक हुए हैं |"---------------विद्वान् डा. वाडिल
 
"जाट बहुत ताकतवर और कठिन परिषार्मी किसान हैं जो हाथ में हल लेकर पैदा होता हे |"---------------जनरल सर मेक्मन
 
"जट्टों ने हमेशा अपनी लड़ने की क्षमता को कायम रखा इस्सी कारण प्रथम विश्वयूद्ध में केवल जट्टों की छटी रेजिमेंट को रायल की उपाधि मिली |"----------- जनरल सर मेक्मन
 
" गजनी ने अपने कमांडर लियालटगेन को पंजाब में तेनात किया तो जाट उसका सर काट ले गये और वाही सर उन्होंने गजनी को चांदी के सेंकडों हजारों सिक्कों के बदले वापिस किया |"---------विद्वान् लेन पुले
 
Nahi bhai Upender aisa nahi hai...Adhikansh Jaat to mehnat mei hi vishvass rakhte hain :) Ikke dukke exception to har jagah mil jaate hain :)

नशा-पत्ता किम्मै घणा सा करते दिखै सै आजकाल, भाई...जिब बालकपण मैं मैं गाम मैं रह्या करदा म्हारे गाम मैं कोई इक्का-दुक्का शराबी होया करदा, पर इब तो घणे ही हो रहे सै भाई...ज्याह त कहूं था...बाकी ठीक कही...इसी चिज्यां तै दूर रहण वाले भी सै घणे ही...
 
" गजनी ने अपने कमांडर लियालटगेन को पंजाब में तेनात किया तो जाट उसका सर काट ले गये और वाही सर उन्होंने गजनी को चांदी के सेंकडों हजारों सिक्कों के बदले वापिस किया |"---------विद्वान् लेन पुले

Paise ke liye ye kaam bhi shuru kar diye the jaatton ne.. :D
 
नशा-पत्ता किम्मै घणा सा करते दिखै सै आजकाल, भाई...जिब बालकपण मैं मैं गाम मैं रह्या करदा म्हारे गाम मैं कोई इक्का-दुक्का शराबी होया करदा, पर इब तो घणे ही हो रहे सै भाई...ज्याह त कहूं था...बाकी ठीक कही...इसी चिज्यां तै दूर रहण वाले भी सै घणे ही...

haan bhai Upender ye baat to hai...baaki aapne ye bhi notice kiya hoga ki pehle logg itne busy nahi hote the..lekin aab bahut busy rehte hain..cost of living badh gayi hai..to kaam bhi jayada karna padta hai :)
 
"जाट बहुत ताकतवर और कठिन परिषार्मी किसान हैं जो हाथ में हल लेकर पैदा होता हे |"---------------जनरल सर मेक्मन
जाट ताकतवर और परिषर्मी तो होते हैं परन्तु या हल वाली बात अब लागू नहीं होती i हल की जगह इब मशीन नै ले ली i जाटलैंड पै बहुत सारे लोग्गां नै तो हल देख्या भी ना होग्गा. Virtually आजकल जाटों में भी काफी बच्चे i -phone या i -pad लेके पैदा होण लागगे और उनने पैदा होते ही 4 G कनेक्शन चाहिए i
परन्तु मेक्मन नै भी के बेरा था के जाट इतने अडवांस हो ज्यांगे आने वाले टेम मैं i
 
" गजनी ने अपने कमांडर लियालटगेन को पंजाब में तेनात किया तो जाट उसका सर काट ले गये और वाही सर उन्होंने गजनी को चांदी के सेंकडों हजारों सिक्कों के बदले वापिस किया |"---------विद्वान् लेन पुले

अच्छा, म्हारे भाई लोग इसा काम भी कर दिया करदे i पर यो काम उनने कोए शान आला ना करया. यो तो मुंबई आले भाई लोग्गां का या D कंपनी का काम होया करै . अपनी आन बान और शान के लिए क़त्ल करना पड़ सकता है परन्तु पैसे के लिए क़त्ल करना या क़त्ल करके सर के बदले पैसे लेना कोई शान नहीं. आदमी के भरोसे का भी क़त्ल इसके साथ ही हो जाता है. कदे यो लेन पुले झूठ बोल रह्या हो. एक बै काउंटर-चेक कर लियो भाई.
 
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अच्छा, म्हारे भाई लोग इसा काम भी कर दिया करदे i पर यो काम उनने कोए शान आला ना करया. यो तो मुंबई आले भाई लोग्गां का या D कंपनी का काम होया करै . अपनी आन बान और शान के लिए क़त्ल करना पड़ सकता है परन्तु पैसे के लिए क़त्ल करना या क़त्ल करके सर के बदले पैसे लेना कोई शान नहीं. आदमी के भरोसे का भी क़त्ल इसके साथ ही हो जाता है. कदे यो लेन पुले झूठ बोल रह्या हो. एक बै काउंटर-चेक कर लियो भाई.
विजय पाल जी , उस समय का यो-ए दस्तूर था | एक विदेशी को , जाट उनका सर्वे सर्वा केसे सहन कर सकते थे | सर गाडन तें आछा था अक किम्मे कमाई हो जांदी | इन् पिस्स्याँ तें -ए तो फोज खड़ी होया करदी ,गजनी भी तो ये-ए काम कर्या करदा , आज काल के भाड़े के इतिहासकार उन् ने(गजनी जिस्स्याँ ने ) तो महान शाषक बतावें सें एर जाट्टां नु लूटेरा | या बात ठीक स के ?
 
जाट ताकतवर और परिषर्मी तो होते हैं परन्तु या हल वाली बात अब लागू नहीं होती i हल की जगह इब मशीन नै ले ली i जाटलैंड पै बहुत सारे लोग्गां नै तो हल देख्या भी ना होग्गा. Virtually आजकल जाटों में भी काफी बच्चे i -phone या i -pad लेके पैदा होण लागगे और उनने पैदा होते ही 4 G कनेक्शन चाहिए i
परन्तु मेक्मन नै भी के बेरा था के जाट इतने अडवांस हो ज्यांगे आने वाले टेम मैं i
जाट हमेशा दुनिया से आगे रहे हैं वि.पि. जी , मेने जाट लेंड पे एक लिस्ट डाली थी शायद २ साल पहले की जट्टों ने दुनिया को और हिदुस्तान को क्या-क्या दिया हे , पर इतिहास में उनका नाम नहीं हे , जहां पर भी जट्टों ने अच्छे काम किये हैं उन् पर प्रकाश नहीं डाला गया हे या गहन खोज -बीन की आवश्यकता नहीं समझी गयी , क्योंकि वहां पर जट्टों का नाम आगे आ रहा था , और इन् भाप्पों और भामनों को वो पसंद नहीं , कुछ हमारे जाट बंधू भी उन् जेसा ही वाय्वाहर करते हैं | जिस के कारण हमारी कौम आगे होते हुए भी ,उससे पीछे दिखया जाता हे | उनोहने अडंग- बडंग लिख मारा ,पर उनसे सत्यता के प्रमाण नहीं मांगे जाते और हमारे प्रमाण होते हुए भी उन् को प्रमाण नहीं माना जाता , इसे लोगों में हमारे बंधू भी शामिल हैं | जट्टों जेसे कर्मठ लोग कम ही मिलते हैं इस दुनिया में | ये लोगों की सोच हे | में एक दुसरा तागा सुरु करूंगा उसमे इस के बारे में जिन्दगी के अनुभव लिखे जायेंगे |
 
"आठवीं सदी के आरम्भ में बसरा बग़दाद की लड़ाई में जट्टों ने खलीफा को हराया "--------विद्वान सर साइकस
 
बसरा-बग़दाद की लड़ाई के बाद जाट कवि टाबारी ने गाया :-
(अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद )
"ओह ! बग़दाद के लोग मर गए ,
तुम्हारा साहस भी हमेशा के लिए |
हम जट्टों ने तुम्हे हराया ,
हम तुम्हे लड़ने के लिए ,
मैदान में घशीट लाये |
हम जाट तुम्हे ऐसे खींच लाये ,
जेसे पशुओं के झुण्ड से ,
कमजोर पशु को ||
 
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