jat duniyaa ki najar mey

"Julius Caesar, Alexander the Great and Napolean Bonaparte were Jats" .....Ch. Zile Singh Sangwan

I also believe that all the brave people in world history had a Jat lineage.

Disclaimer: Please don't ask for any proof as I have forgotten the name of the book. Moreover, I do not take any responsibility of the veracity/authenticity of this information. All rights reserved.


विजय पाल जी आप के जबाब से एसा लगता हे की आप चिड गए | जो मेने प्रत्युतर मांगे उनकी बजाय आपने ये चेप दिया | ये तो कोई स्वस्थ वाद विवाद का लक्षण नहीं हे |
 
ये तो कोई स्वस्थ वाद विवाद का लक्षण नहीं हे |

Bhai 2-4 log har thread me hote he jin ne vaad vivad se koi matlab nahi hota inne to bus tang addani hoti he. Aapne to ye baten pahle hi bahot bari sapast kar di he ke aapke source of reference kaya he aur is thread ka udesshey kaya he.

Aap inki chinta na karo aur likhte jao bus. Aapki post padne vale bahot he.
 
Bhai 2-4 log har thread me hote he jin ne vaad vivad se koi matlab nahi hota inne to bus tang addani hoti he. Aapne to ye baten pahle hi bahot bari sapast kar di he ke aapke source of reference kaya he aur is thread ka udesshey kaya he.

Aap inki chinta na karo aur likhte jao bus. Aapki post padne vale bahot he.

विपिन भाई समर्थन के लिए धन्यवाद | इस तागे तें एक और तागा चलान की बात समझ में आई | में घणे दिना तें सोच्र्या था अक ऊह का नाँ के धरूँ | इब्ब नाँ पा ग्या "जाटडा काटडा आपने ने-ए मारे "
 
विजयपाल जी ,आतिश ,उप्पेंदर एवम प्रशांत जी , जी में कोई इतिहासकार नहीं हूँ , हाँ इतिहास में मेरी रूचि बहुत हे और में ऐसी पुस्तके पढ़ते रहता हूँ | ये धागा जेसा की मेने पहले भी कहा था ,क्या उचित हे और क्या अनुचित ये सिद्ध करने के लिए नहीं चलाया था | जो भी मेने यहाँ लिखा हे वो अनेक जगहों पर अनेकों बार उधृत हुआ हे | इन् सब की वास्तविकता और सत्यता का में पर्तिपादन नहीं करता | मेरे विचार से ये इतिहासकारों की बहस का विषय हे | दूसरी बात जो वि.पि. जी ने कही हे की "जो इतिहास हमें स्कूल ,कालेज में पढ़ाया गया हे " के विषय में ,में ये कहता हूँ की क्या वि.पि. जी उसको सत्य मानते हैं | रोमिला थापर जेसे भाड़े के टट्टुओं दवारा लिखा हुआ इतिहास तो आप सही मानते हैं जो की आधुनिक भाट हैं और पिछले ५००० हजार साल के विभिन्न काल में विभिन्न लोगों दवारा जट्टों के बारे में अगर कुछ सकारात्मक लिख दिया गया उसका आप विरोध करते हैं | आप को इतिहास में पढ़ाया गया हे कि दिल्ली पर तोमरों का ९०० साल तक शाशन था | पर कहीं भी लिखा कि वे जाट थे | दिल्ली के चारों और तोमरों के २००-३०० गावं आज भी हैं जिनमे से मुट्ठी भर अपने आप को राजपूत कहने लग गये | अगर सच्चा इतिहास लिखा गया होता तो आज जो इतनी सारी पुस्तकें बाजार में आती हैं और हर ५-६ महीने में किसी ना किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाना पड़ता हे सच्चाई को छुपाने के लिए , ये ना करना पड़ता | पंजाब केसरी ने एक लेखों कि सीरिज चलाई थी कुछ साल पहले "झूठे लोग-झूठा इतिहास " उसमे आपके सकूल कालेज में पढाये जाने वाले इतिहास कि बखिया उधेडी गई थी | अगर आप का इतिहास सच्चा हे तो उसमे ये क्यों नहीं पढ़ाया गया :-
१) जवाहरलाल नेहरु के दादा ने (जो उस समय दिल्ली के दरोगा थे ) दिल्ली के चांदनी चोक में बल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह को अंग्रेजों के कहने पर फांशी दी थी |(राजा नाहर सिंह स्वतंतरता सेनानी थे )
२) मुंबई के गेटवे ऑफ़ इंडिया पर (जो कि बिरटेन के राजा जार्ज पंचम के स्वागत में बनाया गया था ) उनकी स्वागत कमिटी कि अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरु के बाप ने कि थी |
३) भारत का राष्ट्र गान वास्तव में रविंदर नाथ टेगोर ने जार्ज पंचम के स्वागत में गाया था जिसके बदले में उनको नोबेल पुरस्कार मिला (जार्ज पंचम उस समय नोबेल पुरस्कार कमिटी के अधयक्ष थे )| आज भी हम उस महान राजा का गुणगान कर के अपने आप को धन्य एवम देशभग्त समझते हैं |
४) सरदार भगत सिंह एवम अन्य को गांधी कि हामी भरने के बाद ही फांशी दी गई थी |
५) जिन्ना के प्रधानमंत्री पद कि दावेदारी ठोकने पर ही नहरू कि जिद्द पर पाकिस्तान बनाया गया था |
६) गांधी ने " मेरी लाश पर पाकिस्तान बनेगा " कि उद्घोस्ना करने पर और पाकिस्तान बनने पर आत्महत्या क्यों नहीं कि ?
ये सब सत्य बातें आप को आप के स्कूल कालेज के इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाई गई ?

विजय पाल जी आप के जबाब से एसा लगता हे की आप चिड गए | जो मेने प्रत्युतर मांगे उनकी बजाय आपने ये चेप दिया | ये तो कोई स्वस्थ वाद विवाद का लक्षण नहीं

रविंदरजीत जी, आपने जो लिखा कि इतिहास में बहुत कुछ जान बूझ कर छुपाया जाता है I यहाँ पर मैं आपसे पूर्णतया सहमत हूँ और जो तथ्य आपने दिए उनको नकारने का मेरे पास न तो कोई कारण है और ना ही कोई सबूत I इसलिए आपने जो कहा वह सच हो सकता है, परन्तु सिर्फ इसी के चलते महाराणा प्रताप और शिवाजी को जाट ठहराना शायद सही नहीं लगता I मैंने google पर भी ऊँगली मार कर देखी परन्तु इसका कोई सबूत मेरे हाथ नहीं लगा I इसीलिये मुझे अभी भी संशय है और मैंने अपनी शंका ज़ाहिर की. आपसे चिढने का कोई कारण मुझे नज़र नहीं आता, इसलिए मैं आपकी इस चिढने वाली बात को खारिज करता हूँ, अलबत्ता आप थोड़े खफा जरूर लगे आपके अंदाज़े बयां से I आपको नाराज़ करने का मेरा कोई इरादा नहीं I अगर कोई गलती हो तो क्षमा करें I
 
ना जी ना , वि पि जी में क्यों नाराज होवण लाग्या | मेरी के झोट्टी खोल ली | में तो आप का जबाब पढ़ कें हंसन लाग्या | बस एक ही शिकवा हे -जट्टों की बड़ाई सुन के जाट ही नाराज होते हैं | एक बात तो माननी पड़ेगी कि जाट ही ऐसी कोम हे जिसके तार पुरे यूरेशिया से जुड़े हुए हैं कई बार अति उत्साह में कुछ छोटे लेखकों ने जरूर अतिरंजित लिख मारा होगा | पर क्या इसमें ७०/८० या ९०% कुछ तो सच्च होगा | इतने बड़े लेखकों ने सालों कि शोध के पश्चात लिखा हे और कुछ लोग उस को सिरे से नकारने पर तुले हुए हैं | अगर ये सब गलत हे तो जाट फिर छुटभैये लूटेरे ,खेत मजदूर ,निक्कम्मे,बेवकूफ लोगों के समूह के आलावा कुछ नहीं हे | और शायद आप लोग उसी का प्रतिपादन करते हैं |
 
विजयपाल जी ,आतिश ,उप्पेंदर एवम प्रशांत जी , जी में कोई इतिहासकार नहीं हूँ , हाँ इतिहास में मेरी रूचि बहुत हे और में ऐसी पुस्तके पढ़ते रहता हूँ | ये धागा जेसा की मेने पहले भी कहा था ,क्या उचित हे और क्या अनुचित ये सिद्ध करने के लिए नहीं चलाया था |

Ravinder bhai...Nyu to kaal nai aap Mukesh Ambani, Sachin Tendulkar nai Jaat bana doge.. Jo bhi badiya tarakki kar raha hai usnai Jaat bana do...ke jaawe hai..likhna hi to hai. Ibb ya koonsi kittab hai jismai nyu keh rakha hai महाराणा प्रताप ,छत्रपति शिवाजी Jaat the..Baaki bhai laage rahoo nyu e..bana do saari duniya nai Jaat :rock :rock
 
छत्रपति शिवाजी ---- एक पुस्तक के अनुसार लगभग सन १३४० में भीम सिंह नाम के बाल्यान गोत्री जाट योधा जो भोंसले नामक किले से लादे में हार जाने के कारण और अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए भागकर आज के महाराष्टर में रहने चले गए थे ,उन्ही के वंशज शिवाजी हुए | और इनका वंश भोंसले कहलाया |

जेसे मेने पहले कहा जी राजपूत कोई एक जाती नहीं हे या कौम नहीं हे ये मोकापरस्त जातयिओं का समूह हे | उस्सी प्रकार मराठाओं में भी अनेक जातियों के समूह शामिल हुए हैं | कई मराठा तो दुसरे मराठा से शादी बियाह के रिश्ते भी नहीं बनाते | मेरे साथ सर्विस में एक मराठा लड़का था उस ने बताया की ३-४ पीढ़ी तक वे जाती की जगह यादव लिखते थे पर अब हम मराठा लिखते हैं | एक दिन एक रेल यात्रा के दौरान मुझे एक फोजी मिला औरंगाबाद का , वह मराठा रजिमेंट में था | मेने उससे कहा की आप शकल सूरत से मराठा नहीं लगते | उस ने बताया की २००-३०० साल पहले उनके पूरवज राजस्थान से स्थान्तरित हो कर यहाँ आ कर बस गए थे और हमारे यहाँ पर कई सो गाँव हैं वास्तव में हम गुजर हैं पर मराठा लिखते हैं | मराठा जाती भी अनेक जातियों का समूह हे | इस्सी प्रकार कई मराठा जाट भी रहे होंगे | जिन्होंने जाट लिखना और कहना छोड़ दिया होगा |

महाराणा प्रताप ---- इनको गह्ल्वात गोत्र का बताया गया हे जो की दस्तावेजों में उपलब्ध हे | आज अधिकतर इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं की राजपूत जट्टों में से ही निकले हैं अगर आप लोजिकल बात करो तो ये सिद्ध हो चुका हे अगर नहीं मानना तो मत मानो | १२वि सताब्दी में लगभग सब जगह उतरी हिन्दुस्तान में बोध जट्टों का शाशन था | फिर अचानक बिना किसी लड़ाई के बिना किसी बाहरी आक्रमण या आगमन के अचानक राजपूत राजा केसे हो गये | जो शाशक थे ब्राह्मणों ने उन्ही को पटाया और एक अलग जट्टों की हिन्दू जाती खड़ी कर दी जिसे राजपूत नाम दिया गया | औए इन्ही धोखेबाज जट्टों दवारा बोध जट्टों पर अत्याचार करवाए गए(*) |आप हवन में कितने लाख टन सामग्री डाल लो , कितने भी करोड़ भाह्म्नों से मंत्रो उच्चार करवा लो कितने भी दिनों, सालों तक , और एक चिंटी भी पैदा कर कर दिखा दो | मनुष्य की बात तो बाद में आती हे |

* एक उधाहरण देना चाहूँगा ---- एक गोरा भारत आया | और एक आदमी से उसकी दोस्ती हो गई | गोरे ने कहा की मुझे सब हिन्दुस्तानी एक जेसे लगते हैं अगर इनमे से किसी की जाती की पह्चान करनी हो तो बहूत मुश्किल हे आप मुझे बताइये की किसी की जाती की पह्चान केसे की जाए |
उस भारतीय ने कहा--- की अगर कोई दूध दुह रहा हो तो वो यादव हे
गोरा------------- पर दूध तो कोई और भी दुह सकता हे ,उसके पक्के यादव होने की पह्चान क्या हे ?
भारतीय ------- इस बन्दे के सामने ताल ठोंक दो (एक दूधिये को दिखाते हुए कहा )
गोरे ने ताल ठोंक दी और यादव जी ने उस गोरे को दो-तीन बार उठा कर पटक दिया |
गोरा ---टीक हे में समझ गया | अब मुझे ठाकुर को पह्चान ने की कला बताइये |
भारतीय -------- इस मुछ्छअड़ के सामने मूंछों पर हाथ फेर कर ताव दे दो |
ठाकुर ने उस गोरे को दो चार हाथ जमा दिए |
गोरा ------ ठीक हे में ठाकुर को भी पहचाना सीख गया | अब ब्रहामन को केसे पहचाना जाए ये मुझे बताइये |
भारतीये -------- जी इतनी देर से तुम को पिटवा रहा हे वो भ्राह्मन हे |
 
छत्रपति शिवाजी ---- एक पुस्तक के अनुसार लगभग सन १३४० में भीम सिंह नाम के बाल्यान गोत्री जाट योधा जो भोंसले नामक किले से लादे में हार जाने के कारण और अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए भागकर आज के महाराष्टर में रहने चले गए थे ,उन्ही के वंशज शिवाजी हुए | और इनका वंश भोंसले कहलाया |

Funny.."ek pustak ke anusaar"...how do you expect that we can accept this crap..if romila thapar is an adhunik bhaat then what should we write for writer of this book. Tell this story in front of any Maratha in bombay, he will show you the hell....Jats have a rich history but that does not mean you will make each and everyone a JAT just for the sake that their history was not written in past...
जेसे मेने पहले कहा जी राजपूत कोई एक जाती नहीं हे या कौम नहीं हे ये मोकापरस्त जातयिओं का समूह हे | उस्सी प्रकार मराठाओं में भी अनेक जातियों के समूह शामिल हुए हैं | कई मराठा तो दुसरे मराठा से शादी बियाह के रिश्ते भी नहीं बनाते | मेरे साथ सर्विस में एक मराठा लड़का था उस ने बताया की ३-४ पीढ़ी तक वे जाती की जगह यादव लिखते थे पर अब हम मराठा लिखते हैं | एक दिन एक रेल यात्रा के दौरान मुझे एक फोजी मिला औरंगाबाद का , वह मराठा रजिमेंट में था | मेने उससे कहा की आप शकल सूरत से मराठा नहीं लगते | उस ने बताया की २००-३०० साल पहले उनके पूरवज राजस्थान से स्थान्तरित हो कर यहाँ आ कर बस गए थे और हमारे यहाँ पर कई सो गाँव हैं वास्तव में हम गुजर हैं पर मराठा लिखते हैं | मराठा जाती भी अनेक जातियों का समूह हे | इस्सी प्रकार कई मराठा जाट भी रहे होंगे | जिन्होंने जाट लिखना और कहना छोड़ दिया होगा |

Mr. Ravinder jeet if we ever find of Jat migration to maharasthra that is after several jats from Bharatpur went there with the defeated bhau soldiers after Panipat war and settled there. Just search the history of Bhonsle on internet and written by any writer (except this mahipal arya), you will know the truth..You write here an imaginary story and an example of a Gujjar and fix your claim....if you are not a modern bhat , atleast give some link, proof, anything here. cursing on Nehru, gandhi and romila thapar is not the solution. If you have read so many books and you claim purity of jat race..
why jats are black, white, brown ?...
why all of them are not having the same complexion..?..
Have you ever seen an english, an german black?..you some Jats look worse than Chura , chamar..completely black and thick noses with nasal index above 90?

महाराणा प्रताप ---- इनको गह्ल्वात गोत्र का बताया गया हे जो की दस्तावेजों में उपलब्ध हे | आज अधिकतर इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं की राजपूत जट्टों में से ही निकले हैं

abhi to mupper rajput maukaa prasth jaatiyo ka samauh bataya abhi kaha rahe ho ki wo jatto se nikle hai.......aapki kuch baatein sahi hai..ki rajput ek jaati nahi hai..yeh jat, gujjar, yadav aadi jaatiyi se nikle hai..patr iska matlab yeh nahi ki aap shivaji aur maharaha pratap ko jaat bana doge..agar aapki baat maan bhi le ek maharana pratap ke vanshaj jaat the..to rajput ka nikaas 1000 AD se pehle ho chuka tha jabki maharana pratap 1500 AD ke lagbhag janme the ..ab bhi wo jaat kaisse hue..aisse to saari dunia Adam aur Eve se bani hi.(ek pustak ke anusaar).jo sab jaatiyain ek hi hai...don't be a laughing stock please hold on ..

अगर आप लोजिकल बात करो तो ये सिद्ध हो चुका हे अगर नहीं मानना तो मत मानो | १२वि सताब्दी में लगभग सब जगह उतरी हिन्दुस्तान में बोध जट्टों का शाशन था | फिर अचानक बिना किसी लड़ाई के बिना किसी बाहरी आक्रमण या आगमन के अचानक राजपूत राजा केसे हो गये | जो शाशक थे ब्राह्मणों ने उन्ही को पटाया और एक अलग जट्टों की हिन्दू जाती खड़ी कर दी जिसे राजपूत नाम दिया गया | औए इन्ही धोखेबाज जट्टों दवारा बोध जट्टों पर अत्याचार करवाए गए(*) |आप हवन में कितने लाख टन सामग्री डाल लो , कितने भी करोड़ भाह्म्नों से मंत्रो उच्चार करवा लो कितने भी दिनों, सालों तक , और एक चिंटी भी पैदा कर कर दिखा दो | मनुष्य की बात तो बाद में आती हे |

kewal issi baat ko saare jaatt ithihaskaar kahte hai..yeh baat theek bhi hai..par kya iss baat ka sahar lekar aap log kewal kapnik kahaniya likhoge aur jaat ko saari duniya ke saamne hassi ka paatra banaoge...tum ab CHNADBERDAI mat bano..jo sahi hai wo liho...jyada josh main aane ki jaroorat nahi ahi

* एक उधाहरण देना चाहूँगा ---- एक गोरा भारत आया | और एक आदमी से उसकी दोस्ती हो गई | गोरे ने कहा की मुझे सब हिन्दुस्तानी एक जेसे लगते हैं अगर इनमे से किसी की जाती की पह्चान करनी हो तो बहूत मुश्किल हे आप मुझे बताइये की किसी की जाती की पह्चान केसे की जाए |
उस भारतीय ने कहा--- की अगर कोई दूध दुह रहा हो तो वो यादव हे
गोरा------------- पर दूध तो कोई और भी दुह सकता हे ,उसके पक्के यादव होने की पह्चान क्या हे ?
भारतीय ------- इस बन्दे के सामने ताल ठोंक दो (एक दूधिये को दिखाते हुए कहा )
गोरे ने ताल ठोंक दी और यादव जी ने उस गोरे को दो-तीन बार उठा कर पटक दिया |
गोरा ---टीक हे में समझ गया | अब मुझे ठाकुर को पह्चान ने की कला बताइये |
भारतीय -------- इस मुछ्छअड़ के सामने मूंछों पर हाथ फेर कर ताव दे दो |
ठाकुर ने उस गोरे को दो चार हाथ जमा दिए |
गोरा ------ ठीक हे में ठाकुर को भी पहचाना सीख गया | अब ब्रहामन को केसे पहचाना जाए ये मुझे बताइये |
भारतीये -------- जी इतनी देर से तुम को पिटवा रहा हे वो भ्राह्मन हे |
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छत्रपति शिवाजी ---- एक पुस्तक के अनुसार लगभग सन १३४० में भीम सिंह नाम के बाल्यान गोत्री जाट योधा जो भोंसले नामक किले से लादे में हार जाने के कारण और अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए भागकर आज के महाराष्टर में रहने चले गए थे ,उन्ही के वंशज शिवाजी हुए | और इनका वंश भोंसले कहलाया |

जेसे मेने पहले कहा जी राजपूत कोई एक जाती नहीं हे या कौम नहीं हे ये मोकापरस्त जातयिओं का समूह हे | उस्सी प्रकार मराठाओं में भी अनेक जातियों के समूह शामिल हुए हैं | कई मराठा तो दुसरे मराठा से शादी बियाह के रिश्ते भी नहीं बनाते | मेरे साथ सर्विस में एक मराठा लड़का था उस ने बताया की ३-४ पीढ़ी तक वे जाती की जगह यादव लिखते थे पर अब हम मराठा लिखते हैं | एक दिन एक रेल यात्रा के दौरान मुझे एक फोजी मिला औरंगाबाद का , वह मराठा रजिमेंट में था | मेने उससे कहा की आप शकल सूरत से मराठा नहीं लगते | उस ने बताया की २००-३०० साल पहले उनके पूरवज राजस्थान से स्थान्तरित हो कर यहाँ आ कर बस गए थे और हमारे यहाँ पर कई सो गाँव हैं वास्तव में हम गुजर हैं पर मराठा लिखते हैं | मराठा जाती भी अनेक जातियों का समूह हे | इस्सी प्रकार कई मराठा जाट भी रहे होंगे | जिन्होंने जाट लिखना और कहना छोड़ दिया होगा |

महाराणा प्रताप ---- इनको गह्ल्वात गोत्र का बताया गया हे जो की दस्तावेजों में उपलब्ध हे | आज अधिकतर इतिहासकार इस बात पर सहमत हैं की राजपूत जट्टों में से ही निकले हैं अगर आप लोजिकल बात करो तो ये सिद्ध हो चुका हे अगर नहीं मानना तो मत मानो | १२वि सताब्दी में लगभग सब जगह उतरी हिन्दुस्तान में बोध जट्टों का शाशन था | फिर अचानक बिना किसी लड़ाई के बिना किसी बाहरी आक्रमण या आगमन के अचानक राजपूत राजा केसे हो गये | जो शाशक थे ब्राह्मणों ने उन्ही को पटाया और एक अलग जट्टों की हिन्दू जाती खड़ी कर दी जिसे राजपूत नाम दिया गया | औए इन्ही धोखेबाज जट्टों दवारा बोध जट्टों पर अत्याचार करवाए गए(*) |आप हवन में कितने लाख टन सामग्री डाल लो , कितने भी करोड़ भाह्म्नों से मंत्रो उच्चार करवा लो कितने भी दिनों, सालों तक , और एक चिंटी भी पैदा कर कर दिखा दो | मनुष्य की बात तो बाद में आती हे |

* एक उधाहरण देना चाहूँगा ---- एक गोरा भारत आया | और एक आदमी से उसकी दोस्ती हो गई | गोरे ने कहा की मुझे सब हिन्दुस्तानी एक जेसे लगते हैं अगर इनमे से किसी की जाती की पह्चान करनी हो तो बहूत मुश्किल हे आप मुझे बताइये की किसी की जाती की पह्चान केसे की जाए |
उस भारतीय ने कहा--- की अगर कोई दूध दुह रहा हो तो वो यादव हे
गोरा------------- पर दूध तो कोई और भी दुह सकता हे ,उसके पक्के यादव होने की पह्चान क्या हे ?
भारतीय ------- इस बन्दे के सामने ताल ठोंक दो (एक दूधिये को दिखाते हुए कहा )
गोरे ने ताल ठोंक दी और यादव जी ने उस गोरे को दो-तीन बार उठा कर पटक दिया |
गोरा ---टीक हे में समझ गया | अब मुझे ठाकुर को पह्चान ने की कला बताइये |
भारतीय -------- इस मुछ्छअड़ के सामने मूंछों पर हाथ फेर कर ताव दे दो |
ठाकुर ने उस गोरे को दो चार हाथ जमा दिए |
गोरा ------ ठीक हे में ठाकुर को भी पहचाना सीख गया | अब ब्रहामन को केसे पहचाना जाए ये मुझे बताइये |
भारतीये -------- जी इतनी देर से तुम को पिटवा रहा हे वो भ्राह्मन हे |


ha ha ha ha ha.....Brahman ek doosre ko ladane ka hee kaam karte hain.....bahut achcha likh rahe hain aap Ravindra Jeet Singh Ji....aap vastav me badhai ke patra hain, Meri taraf se bahut bahut badhai...main yeh sochkar hairan hoon ki aap yeh sab likhe ke liye itna samay kaise nikal pate honge?.....Great Bhai.....
 
Ram Prasad Bismil was also a Jat .

ग्वालियर राज्य में तोमरधार में चम्बल नदी के किनारे रूहर तथा वरबाई नाम के दो गांव अपनी उद्दंडता के लिए आज भी प्रसिद्ध बताए जाते हैं । भूपसिंह, तात्या, मानसिंह आदि प्रसिद्ध डाकू यहीं के निवासी थे । अमर शहीद रामप्रसाद जी बिस्मिल के पूर्व वंशज इन्हीं गांवों के निवासी थे । इन के दादा जी अमानसिंह, समानसिंह और नारायणसिंह - ये तीनों सगे भाई थे और तोमर राजपूत ठाकुर थे । बिस्मिल के दादा नारायणसिंह कौटुम्बिक कलह और अपनी भाभी के असह्य दुर्व्यवहार से तंग आकर अपनी पत्नी और दो बेटों सहित घर से निकल गए और शाहजहांपुर आकर बस गए । अकाल पड़ा हुआ था, राजपूत को कोई भीख भी नहीं देता था । यहां आकर उन्होंने अपना नाम 'नारायणलाल' बदल लिया और अपने आप को ब्राह्मण जाति का बताया । गुजारा करने के लिए उन्होंने कुछ ब्राह्मणवृत्ति भी की, एक गाय भी पाल रखी थे और वहां शाहजहांपुर में "गैया वाले पण्डित जी" कहलाने लगे । मरते समय भी उन्होंने घर में गाय पालने का ही आदेश दिया था ।

'तोमर' जाटों का बहुत पुराना गोत्र है । कुछ तोमर लोग जो बाद में पंडितों के बहकावे में आकर वैदिक धर्म से हटकर मूर्तिपूजा आदि में फंस गए, अपने को 'राजपूत' कहने लगे ।

बिस्मिल की आत्मकथा पढिये जाटलैंड विकि के इस पेज पर -

http://www.jatland.com/home/Ram_Prasad_Bismil

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प्रशांत भाई, रविंदर जीत भाई,

आप दोनों की इतिहास की जानकारी वाकई बहुत गहन है i परन्तु दोनों से मेरा व्यक्तिगत अनुरोध है इतिहास को लेकर आपस में मनमुटाव पैदा ना करें i
 
Last edited:
प्रशांत भाई, रविंदर जीत भाई,

आप दोनों की इतिहास की जानकारी वाकई बहुत गहन है i परन्तु दोनों से मेरा व्यक्तिगत अनुरोध है इतिहास को लेकर आपस में मनमुटाव पैदा ना करें i

इब्ब कोए बकवाद करण पे उतर जा तो के कर्या जा सके स | यो तो घंखरी बातां का (जट्टां की ) विरोध करे जा स | इब्ब इहने बेतुकी बातां तें जाट लेण्ड भांडनि से तो भांडअन द्यो | माडे दिनां में आप खर्च हो जा गा |
 
Great mongol clan people Changez khan, halaku khan, taimur lung, babar, akbar were also Jat- ek pustak ke anusaar

मिस्टर प्रशांत अ चमेट भी जाट था,पर इब्ब इसका बिह्वियर बदल गया ,,,,,,,,,जाटो की महानता सुनके ,,,,,,,,,,,एक पुस्तक के अनुसार ...........


दूसरे तो गल्ले पड़ ए रहे थे इब्ब अपने आले भी लाग लिए पर कोए बात ना भाई ...... इन जाटो की संतान सदा से छतरी कहलाई है .....
 
Ek kaam karo nai bhai..Adam arr Eve nai Jaat bana do..Rola e khatam..kyu khamkha likhna itna.. ..Arr naam pasand nahi ho Adam arr Eve ka to kimme Jaatan aala naam dhar do..Raldhu, Ramphal.. Kisse bhai nai modern naam pasand ho to wo dhar lyo :D :D..Jitender, Sandeep, Amit..
 
Last edited:
इब्ब कोए बकवाद करण पे उतर जा तो के कर्या जा सके स | यो तो घंखरी बातां का (जट्टां की ) विरोध करे जा स | इब्ब इहने बेतुकी बातां तें जाट लेण्ड भांडनि से तो भांडअन द्यो | माडे दिनां में आप खर्च हो जा गा |
.......................
 
Last edited:
tere tai batti bakwaad karaniya hai koi aade...na yakeen aawe to poll karwa liye...........pehlam apni udd ne dekh..wo "albaadi" aale thraed main saari likh raakhi tai, kitek suhur ka manas hai tu..arr doosre ne bakwaad karniya batawe.....kuch sharam lihaaz hai ek na..ya nuey hi pet main dhole aa liye................kilkii(le pher ban liya miya mithhu arr maar di kilkii..bata ke karegaa.........)

Jat ar makode ki jaat ek bargi bera nahi kab kiske gad ke khade ho jya: Rakesh Sehrawat
 
झूठ नहीं थे जाट लूटेरे ,जो तारीख के पाठां में
लूटन खातर ताकत चाहिए ,जो थी बस जाट्टां में ...........................

सोमनाथ के मंदिर का सब धर्या ढक्या उघाड़ लेग्या,
मोहम्मद गजनी लूट मचाके सारा सौदा पाड लेग्या |
हीरे-पन्ने कंनी-मंनि चन्दन के कीवाड़ लेग्या ,
सब सामान लाद के चाल्या सत्रह सौ ऊँट लिए ,
कोए भी ना बोल सक्या सब के गोडे टूट लिए |
मोहम्मद गजनी आया था एक जाट्टां की आटआँ में ...................................

ब्रज का योधा जाट गोकुला औरन्ग्जेब ने मार दिया ,
सिकरी का महल किला जाट्टां ने उजाड़ दिया |
ताजमहल में लूट मचाई सारा गुस्सा तार दिया ,
राजाराम जाट ने लड़के दिल्ली की गद्दी हिला दई |
औरन्ग्जेब की मरोड़ तोड़ के माटी के महाँ मिला दई |
कबर खोद अकबर की हाड़ी चिता बणा कें जला दई |
एक चूडामण ने मुगलां की लई खाल तार साट्टयाँ तें ..............................................

भरतपुर के सूरजमल को मुगलां ने धोखे तें मार्या ,
उसका बेटा होया जवाहर सिंह लाल किले पे जा लल्कार्या |
लालकिला जीत लिया लूट लिया माल सारा |
धोखा पट्टी सीखी नहीं जंग में पछाड़ ल्याए ,
मुगलां का सिंघासन जाट दिल्ली तें उखाड़ ल्याए |
साथ में नजराना अर किले के कीवाड़ ल्याए ,
देशभक्ति का खून बहे इन् जट्टां की गान्ठ्या में ...................................................

जाते-जाते सिकंदर को कर्या भगोड़ा जट्टां ने ,
मुग़ल अर अंग्रेजों को ना बिलकुल छोड्या जाट्टां ने |
कलनौर की बौर काढ दी कोला तोड्या जाट्टां ने |
जलालत की जिंदगी नहीं गंवारा जाट्टां ने |
जिहने भी न्योंदा घाल्या राख्या नहीं उधारा जाट्टां ने |
प्रथ्विराज का कातिल मोहम्मद गोरी मार्या जाट्टां ने |
कहे "जयप्रकाश घुशकाणी" के ,थारे कमी नहीं ठाठां में ............................................

.............मास्टर जयप्रकाश दलाल ,गाँव घुशकाणी ,जिला भिवानी ,हरयाणा |
 
Last edited:
धन्यवाद रविंदर भाई ,आज फिर इस रागनी को जाटलैंड पर पढ़कर बहुत ख़ुशी हुई /
http://www.jatland.com/forums/showt...iprakash-dalal-guskanni-aale&highlight=lutere

श्री जयप्रकाश दलाल मेरे ही गाँव के हैं और मेरे गुरु भी हैं / inhone ही मुझे बैंजो बजाना सिखाया था / इनका जीवन जाटों के लिए समर्पित है /
 
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