samarkadian
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विगत 3-4 महीने भारतीय जनमानस एवं राजनीती के इतिहास में अभूतपूर्व रहे हैं ! भारतीय मध्यमवर्ग अपनी कई दशको की मानसिक एवं भावनात्मक आलस्य और कायरता को त्याग कर सडको पर था ! भ्रष्ट व्यस्था एवं तंत्र के विरुद्ध जन आक्रोश का सैलाब उमड़ रहा था ! इस मुहीम की बागडोर दो अलग अलग व्यक्तियों ने संभाली जिनका व्क्यक्तितत्व एक दुसे से एक दम भिन्न है ! हमने यहाँ इन दोनों की चर्चा विस्तार से की ! राजनीती करने वालो को लगा की भारतीय जनमानस जाग गया है और विपक्षी पार्टी के एक वरिस्थ नेता को कहना पड़ा कि - भारतीय राजनीतिज्ञों ने जनता को निराश ही किया है !
इन्टरनेट का इस मुहीम में उलेखनीय योगदान रहा ! युवाओ ने इस माध्यम से परसार- परचार में कोई कसर नहीं छोड़ी ! विश्व के अनेक देशो में जनता ने तानाशाह शाशको को उनकी गद्दी से उखाड़ फेंका ! यही भय भारतीय सरकार को भी है ! भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन आक्रोश अपनी चरम सीमा पर है !
कुछ प्रश्न चर्चा में छोड़ रहा हूँ -
1.क्या भारत में यह जन आक्रोश एक सामाजिक एवं राजनितिक क्रांति में बदलेगा?
1.1 यदि हाँ तो क्यों ?
1.2 यदि नहीं तो क्यों ?
2. क्या वर्तमान जन आक्रोश में क्रांति के सभी घटक मौजूद हैं?
2.1 क्या भारत में कभी क्रांति हो भी सकती है ?
3. आप क्या स्वयम सडको पर उतरना चाहेंगे ?
3.1 यदि हाँ तो क्यों?
3.2 यदि नहीं तो क्या आपको रोक रहा है ?
आखिर देश हमारा है !!
इन्टरनेट का इस मुहीम में उलेखनीय योगदान रहा ! युवाओ ने इस माध्यम से परसार- परचार में कोई कसर नहीं छोड़ी ! विश्व के अनेक देशो में जनता ने तानाशाह शाशको को उनकी गद्दी से उखाड़ फेंका ! यही भय भारतीय सरकार को भी है ! भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन आक्रोश अपनी चरम सीमा पर है !
कुछ प्रश्न चर्चा में छोड़ रहा हूँ -
1.क्या भारत में यह जन आक्रोश एक सामाजिक एवं राजनितिक क्रांति में बदलेगा?
1.1 यदि हाँ तो क्यों ?
1.2 यदि नहीं तो क्यों ?
2. क्या वर्तमान जन आक्रोश में क्रांति के सभी घटक मौजूद हैं?
2.1 क्या भारत में कभी क्रांति हो भी सकती है ?
3. आप क्या स्वयम सडको पर उतरना चाहेंगे ?
3.1 यदि हाँ तो क्यों?
3.2 यदि नहीं तो क्या आपको रोक रहा है ?
आखिर देश हमारा है !!