Jaat Ka Dharam Kya Hai ?

Kisi bhi jati ka dharam decided ni ho sakta hai.
dharam decide hota hai aapke k karam se.
for examle agar koi teacher hai to uska dharam hai ki baalko ko acchi siksha dena,kisaan ka dharam hai kheti krna,fauji ka dharam hai desh ki raksha krna.vidhyarthi ka dharam hai padhai krna.
Jati se dharam decide kran galat hai.
 
देवनागरी लिपि में लिखी गई होती तो और ज्यादा अच्छी लगती.
vpsingh Ji, sorry for late reply. Aaj dekhya yo post aapka. asal mein roman-hindi likhan mein teji te likhi ja hai isliye sunte tem nue ee likhi thi ... lyo devnagri anuvad ...

इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3

मन्ने बचावे मरण तै .. इसा राम किते घनश्याम नहीं
में मरने का भय मान्नु इसा हरदया मेंरा मुलाम नहीं
मन्ने दीखे से एक आज़ादी और करण ने काम नहीं
में राजी सुं फांसी खाके रोक सके मन्ने राम नहीं
अरे ठाढ़ा था ते क्यूँ बाली मार्या बड के भीतर बड़ के ...

इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3

ओए सुढ्र पशु ढोल नारी सब ताडन के अधिकारी रे
इसे इसे राजा बने देश में फेर भी कह्न्ना कारी रे
इज्जत लूटें गैर बीर की जीत के दुनिया सारी रे
ना चाहिए अवतार मन्ने ... ऐसे किर्शन बलकारी रे
ओहे तेरे देश पे राजन कैसी .. तूं सोवे राम कित पड़ के

इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3

हो बिस्मिल फांसी तोड्या था जिब राम कड़े जा रह्य था रे ..
जलियांवालन कांड होया क्यूना डायर मार्या था रे ...
महाभारत क्यूँ माची थी जिब खुद किर्शन आ रह्य था रे ...
चोर उचक्के देव बना दिए किसा देश म्हारा था रे ... 2
होए करया वतन का नास कती ये कथा नई घड घड के ..

इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3

हेरे .. हक की खातिर लड़ने का कदे दिया राम ने ज्ञान नहीं
कोण कमावे कोण लूट रह्य राम करे पहचान नहीं
मुफ्तखोर ने ये ढोंग बनाए वैसे बजी तान नहीं
गरीब आदमी ने आज तलक कहीं मिल्या कदे भगवान नहीं
होए रणबीर सिंह जिब रोटी मांगे यो राम लिकड़ जया जड़ के ..


इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3
 
vpsingh ji, sorry for late reply. Aaj dekhya yo post aapka. Asal mein roman-hindi likhan mein teji te likhi ja hai isliye sunte tem nue ee likhi thi ... Lyo devnagri anuvad ...

इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3

मन्ने बचावे मरण तै .. इसा राम किते घनश्याम नहीं
में मरने का भय मान्नु इसा हरदया मेंरा मुलाम नहीं

हो बिस्मिल फांसी तोड्या था जिब राम कड़े जा रह्य था रे ..
जलियांवालन कांड होया क्यूना डायर मार्या था रे ...


हेरे .. हक की खातिर लड़ने का कदे दिया राम ने ज्ञान नहीं
कोण कमावे कोण लूट रह्य राम करे पहचान नहीं
मुफ्तखोर ने ये ढोंग बनाए वैसे बजी तान नहीं
गरीब आदमी ने आज तलक कहीं मिल्या कदे भगवान नहीं
होए रणबीर सिंह जिब रोटी मांगे यो राम लिकड़ जया जड़ के
..

जितेंदर भाई धन्यवाद i कविता मैं वाकई तत सै, और देवनागरी मैं पढ़ के ज्यादा मज़ा आया i
 
तथाकथित हिन्दू धर्म की सिफारिश करने वालो से मेरा आग्रह हैं की जाटों ने हिन्दू कहलाकर आजतक क्या हासिल किया हैं ? हमारे प्राचीन सभी जाट वीर योद्धाओ अर्थात राजाओ को भारतीय इतिहास में शुद्र क्यों कहा गया ? हिन्दू धर्म के ग्रंथो में अर्थात पद्मपुराण व भविष्यपुराण में जाटों को वर्णशंकर तथा शुद्र क्यों लिखा गया हैं ? ब्राह्मण राजा चच ने अपने चचनामे में जाटों को चंडाल जाति तक लिखा हैं | जाटों के इतिहास को बरबाद करने के लिए किस धर्म के लोग जिम्मेवार हैं ? सिक्ख इतिहास ने जाट सिक्ख वीरो को अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं तो फिर हिन्दू जाटों का इतिहास कहा हैं ? क्या इस बर्बादी के जिम्मेवार हिन्दू धर्म के ठेकेदार नहीं हैं ? इन सब बातों पर हमे गहराई से विचार करना होगा यह केवल भावनाओ में बहने का मसला नहीं हैं | इसीलिए जाट भाइयों से प्राथना करता हु की इस विषय पर मंथन करके खुले दिमाग से अपने विचार अवश्य प्रकट करे |

.......पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान
 
विचार कर राख्या स | जित तोप मुक़ाबिल हो उड़े हथियार उठा ल्यो |
 
तथाकथित हिन्दू धर्म की सिफारिश करने वालो से मेरा आग्रह हैं की जाटों ने हिन्दू कहलाकर आजतक क्या हासिल किया हैं ? हमारे प्राचीन सभी जाट वीर योद्धाओ अर्थात राजाओ को भारतीय इतिहास में शुद्र क्यों कहा गया ? हिन्दू धर्म के ग्रंथो में अर्थात पद्मपुराण व भविष्यपुराण में जाटों को वर्णशंकर तथा शुद्र क्यों लिखा गया हैं ? ब्राह्मण राजा चच ने अपने चचनामे में जाटों को चंडाल जाति तक लिखा हैं | जाटों के इतिहास को बरबाद करने के लिए किस धर्म के लोग जिम्मेवार हैं ? सिक्ख इतिहास ने जाट सिक्ख वीरो को अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं तो फिर हिन्दू जाटों का इतिहास कहा हैं ? क्या इस बर्बादी के जिम्मेवार हिन्दू धर्म के ठेकेदार नहीं हैं ? इन सब बातों पर हमे गहराई से विचार करना होगा यह केवल भावनाओ में बहने का मसला नहीं हैं | इसीलिए जाट भाइयों से प्राथना करता हु की इस विषय पर मंथन करके खुले दिमाग से अपने विचार अवश्य प्रकट करे |<BR><BR>.......पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान
< have not come across such designations for jats, anyway, POINT OF CONTRUCTORS OF RELIGION IS CORRECT AND WE HAVE TO THINK TO SHORT THEM OUT while STAYING IN THE SAME RELIGION/SOCIETY, I personally believe at this stage converting in sikhism or any other religion may not be useful/possible. Anyway it is matter of indivisual choice, let the community decide, we can also think of declaring jat a religion rather than caste
 
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तथाकथित हिन्दू धर्म की सिफारिश करने वालो से मेरा आग्रह हैं की जाटों ने हिन्दू कहलाकर आजतक क्या हासिल किया हैं ? हमारे प्राचीन सभी जाट वीर योद्धाओ अर्थात राजाओ को भारतीय इतिहास में शुद्र क्यों कहा गया ? हिन्दू धर्म के ग्रंथो में अर्थात पद्मपुराण व भविष्यपुराण में जाटों को वर्णशंकर तथा शुद्र क्यों लिखा गया हैं ? ब्राह्मण राजा चच ने अपने चचनामे में जाटों को चंडाल जाति तक लिखा हैं | जाटों के इतिहास को बरबाद करने के लिए किस धर्म के लोग जिम्मेवार हैं ? सिक्ख इतिहास ने जाट सिक्ख वीरो को अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं तो फिर हिन्दू जाटों का इतिहास कहा हैं ? क्या इस बर्बादी के जिम्मेवार हिन्दू धर्म के ठेकेदार नहीं हैं ? इन सब बातों पर हमे गहराई से विचार करना होगा यह केवल भावनाओ में बहने का मसला नहीं हैं | इसीलिए जाट भाइयों से प्राथना करता हु की इस विषय पर मंथन करके खुले दिमाग से अपने विचार अवश्य प्रकट करे |

.......पूर्व कमांडेंट हवा सिंह सांगवान


सरकार ने रामदेव के विरुद्ध जो कारवाई की वो उचित हैं | क्या एक साधू की एक करोड़ की कार इमानदारी से आई हैं ? कोई भी भारतीय देश भगत भ्रष्टाचार का समर्थन नहीं करेगा |
जो भी हमारे अधिकारों की बात करेंगा और समर्थन करेगा हमे उनका धन्यवाद और समर्थन करना चाहिए | जो हमारे बाप को बाप नहीं कहेगा तो हम भी दुसरे के बाप को बाप नहीं कहेंगे | यदि लोग चौ.छोटूराम जैसे हमारे महापुरुषों का आदर करेंगे तो हम भी दुसरो का आदर करेंगे वरना बिलकुल नहीं चाहे वह नेहरु व गाँधी क्यों न हो |
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क्यूं बूछ मारो सो, राकेश भाई. बेरा नि कितने तथाकथित जट्ट एक भाप्पे (गुरु नानक) नै अपणा बाबू कह सैं अर भाप्पे कीह भी जट्ट नै अपणा बाबू नि कहनते...ऊपर आप भी बेर-बेर अपने गौती भाई कमांडेंट सांगवान का हवाला दे-दे कै नै जाटां नै इस बाबत फुसलाण की कोशिश कर रहे सो अक बाकी जाट भी उस भाप्पे नै अपना बाबू मानण लाग जा अर सरदार बण जा...अपनी बात नै आप्पे काटो सो...जाटां नै सरदार बणाकै उन पै अमली-नशेडी (भारत में नंबर 1) होणे अर इसके अलग भी और घणे ही दाग लगवाण की सोच रहे सो के...? कमांडेंट सांगवान अर आप पहलै खुद तो सरदार बणो...अगर सरदार बण राखे सो तो कित सै आपका दाढा अर कित सै पग्गड़...?:cool:
कमांडेंट सांगवान की सारी बात बकवास सैं. जाट हिंदुआं का गौरव सैं. हिंदू बण कै नै जाट विश्व चैम्पियन बणे सै, संपन्न बणे सै, देश के माह अल्पसंख्यक नी बाजदे...और भी दुनिया-भर की उपलब्धियां सै...के-के गिणवाऊं...
 
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भाई उपेंदर थोडा ध्यान से पढ़ लिया करो | उसमे जो कहा हैं की
''जो हमारे बाप को बाप नहीं कहेगा तो हम भी दुसरे के बाप को बाप नहीं कहेंगे | ''
आपने कह तो दिया की गुरु नानक को बाप कहते हैं जाट | इसका जवाब भी वही हैं .,जाट इसलिए उसको बाप मानते हैं क्योकि ....
"सिक्ख इतिहास ने जाट सिक्ख वीरो को अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं "
आप शायद यह लाइन पढना भूल गए थे | पहले ध्यान से पढ़ लिया करो उसके बाद तर्क किया करो |
 
जाट धरम (jaat attitude)


दिल नै दिलां की तार तै जोड दें
सारे देश मै भाईचारा मोड दें
माडा प्यार कोए दे उसनै पूरे प्यार तै लोड दें
जे कोएसा बत्ति बोलै उकी भाण गोड दें
 
भाई उपेंदर थोडा ध्यान से पढ़ लिया करो | उसमे जो कहा हैं की
''जो हमारे बाप को बाप नहीं कहेगा तो हम भी दुसरे के बाप को बाप नहीं कहेंगे | ''
आपने कह तो दिया की गुरु नानक को बाप कहते हैं जाट | इसका जवाब भी वही हैं .,जाट इसलिए उसको बाप मानते हैं क्योकि ....
"सिक्ख इतिहास ने जाट सिक्ख वीरो को अपने इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं "
आप शायद यह लाइन पढना भूल गए थे | पहले ध्यान से पढ़ लिया करो उसके बाद तर्क किया करो |

राकेश जी, मैं हिंदू धर्म का कोई झंडाबरदार नहीं हूं, लेकिन जब आप जैसा या कमांडेंट सांगवान जैसा कोई गंभीर, अनुभवी व्यक्ति खुलेआम जाटों को सिख धर्म अपनाने को कहेगा तो फिर तो आम और खास, किसी भी जाट को तर्क-वितर्क करने का अधिकार है. यदि कोई सिख बनना चाहता है तो व्यक्तिगत तौर पर मेरी उसे रोकने की कोई इच्छा नहीं है, लेकिन खुद तो हिंदू धर्म छोड़कर सिख धर्म अपनाते हुए नहीं बन रहा और दूसरों को शिक्षा दे रहे हो कि सिख बन जाओ...ये कहां की इंसानियत है? खुद धूम्रपान करते हो और दूसरों को कहते हो कि धूम्रपान छोड़ दो...वाह...
खैर, कृपया आप ये बताना चाहेंगे कि वे कौन-से जाट सिख वीर हैं, जिन्हें सिख धर्म ने अपने इतिहास में जगह दी है और हिंदू धर्म ने नहीं दी? आप एक बार सिख बनो तो सही, आपको पता चल जाएगा कि इस बात का मतलब क्या है. यदि हरियाणा के लोग पहले ही सिख धर्म अपना लेते तो फिर पंजाब से अलग होकर नया राज्य ही नहीं बनता. इसका मतलब तो ये हुआ कि कमांडेंट सांगवान तत्कालीन बुजुर्ग जाटों से ज्यादा समझदार हैं. यदि सिख हरियाणा वालों को इतना ही अपना मानते हैं तो फिर क्यों नहीं पूरा चंडीगढ़ हरियाणा को दे देते? क्यों नहीं सतलुज-यमुना लिंक विवाद सुलझा लेते? जैसे ही तुम लोग सरदार बनोगे तुम्हें कोई अपमानजनक नाम दे देंगे सरदार और अगर ये सोचते हो कि फिर जिंदगी खुशनुमा हो जाएगी तो भूल जाओ...किसी भी धर्म के लोग हों, दुखों से कोई मुक्त नहीं है...पंजाब में तो आजकल एक और नई बात होती जा रही है...मैं कईयों से सुन चुका...अधिकतर जट्ट तो चले गए विदेश में, जो बचे वे नशा-पत्ता करके पड़े रहते हैं...अब घर-बार का सारा काम बिहारी-पूरबिए संभाल रहे हैं... थोड़े दिनों में कहीं वहां बिहारी-पूरबियों की ही बहुलता ना हो जाए...
समस्या ये है कि हमने नाम हिंदू रखे हुए हैं, हिंदू धर्म की छत्रछाया में जी रहे हैं, बाप-दादाओं ने हिंदू धर्म को सम्मान दिया, लेकिन हम इतने समझदार हो गए हैं कि हिंदू धर्म का अपमान करना अपनी शान समझते हैं. जब ऐसे लोग किसी बड़े पद पर होते हैं तो देश से गद्दारी करने से नहीं हिचकते, क्योंकि खामियाजा भुगतेंगे तो हिंदू, सरदारों या मुसलमानों का कौनसा ये देश है? ये जितने भी गद्दार हैं, वे अपना पूरा जोर लगा लेना और भारत का और हिंदुओं का बाल भी बांका करके दिखा देना...
यहां मैं एक बात और कहना चाहूंगा. कोई 'हिंदू-हिंदू' करता रहे, लेकिन देश के लिए करे कुछ ना तो उससे बेहतर है वो जो 'हिंदू-हिंदू' भले ही ना करे लेकिन देश के लिए कुछ करे. कुछ जाट भले ही 'हिंदू-हिंदू' ना करे, लेकिन देश के लिए तो वे बहुत कुछ कर ही रहे हैं, इसलिए हाल-फिलहाल ऐसे जाटों से कोई शिकायत नहीं है. हिंदू धर्म को जिसने भी नीचा दिखाने का प्रयास किया है उसने बर्बादी का रास्ता पकड़ लिया है, चाहे वो पाकिस्तानी हों, बंगलादेशी हों या सरदार (कुछेक)...
 
यहाँ कुछ लोग किसी खास धर्म को बदनाम कर रहे हैं. यह ऐसा ही हैं जैसा कुछ समय पहले धर्म परिवर्तन की कोशिश की जा रही थी.
यह तो आतंकवादियों की साजिश से भी ज्यादा खतरनाक हैं. यह जाटलैंड वेब साईट बनाने वालों का उद्देश्य जाटों को एक करना रहा होगा लेकिन उनकी इस कोशिश को यह कुछ मुठ्ठी भर लोग नाकामयाब करने की कोशिश कर रहे हैं.
 
भाई एक और मुदा यो हे के जो भाई सिख बने गे उन ने जाटलैंड त बन कर देंगे कौनकी या सिर्फ हिन्दू साईट हे.


हर भाई गुरुबानी भी पंजाबी में होवे हे तो आपने पहली पंजाबी की tution ले लियो
 
भाई एक और मुदा यो हे के जो भाई सिख बने गे उन ने जाटलैंड त बन कर देंगे कौनकी या सिर्फ हिन्दू साईट हे.

Dont know how many people joined this website keeping in mind that it is a website for JAts who only follow Hinduism. That is something new.
 
POINT OF CONTRUCTORS OF RELIGION IS CORRECT AND WE HAVE TO THINK TO SHORT THEM OUT while STAYING IN THE SAME RELIGION/SOCIETY

Yes totally agree with you Fateh Ji. Moreover adopting a new religion , Sikhism in this case is not just about having long hairs and beard. Its bit more to that. When one get converted he/she should adopt all the belief of that religion. Sikhism was supposed to be based on castless society and I doubt they believe in that.

We can fight hypocracy, superstition and ignorance without being converted too, I guess. Anyway as you said its an individual's choice to choose and should be left to a particular individual rather then we deciding for the whole community.
 
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हम क्या banane आये, क्या बना बैठे | | कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे | |

Parindo की jaaat हमसे achi है जो कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पे जा बैठे
 
हम क्या banane आये, क्या बना बैठे | | कहीं मंदिर बना बैठे कहीं मस्जिद बना बैठे | |

Parindo की jaaat हमसे achi है जो कभी मंदिर पे जा बैठे कभी मस्जिद पे जा बैठे

Exactly, whats the point in converting then if intension is to learn from Sikhism. We can still learn being a hindu, we can still listen Gurubani, still go to Gurudwara or read Kuran being a hindu.

This whole conversion thing is just to gain some politicial advantage and trust me if we sell the benifit (which is a political advantage) we may be able to sell it but Fooling people(saying this religion is better than this etc) will not work and others are much smarter than what we think :D

However, Personally I think the sooner this religion thing finish the better it is.
 
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100px-Guru_nanak.jpg

Guru Nanak (Punjabi: ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ, Hindi: गुरु नानक, Urdu: گرونانک IPA: Gurū Nānak) (15 April 1469 – 22 September 1539) was the founder of the religion of Sikhism and the first of the ten Sikh Gurus. The Sikhs believe that all subsequent Gurus possessed Guru Nanak’s divinity and religious authority, and were named "Nanak" in the line of succession.

[TABLE="class: toc"]
[TR]
[TD]Guru Nanak Dev was born on 15 April 1469, now celebrated as Prakash Divas of Guru Nanak Dev, into a Bedi Kshatriya family in the village of Rāi Bhōi dī Talwandī, now called Nankana Sahib, near Lahore, Pakistan. Today, his birthplace is marked by Gurdwara Janam Asthan. He was born Hindu and later had an inner conviction to create the Sikh Religion.


[/TD]
[/TR]
[/TABLE]


Link
 
Exactly, whats the point in converting then if intension is to learn from Sikhism. We can still learn being a hindu, we can still listen Gurubani, still go to Gurudwara or read Kuran being a hindu.

This whole conversion thing is just to gain some politicial advantage and trust me if we sell the benifit (which is a political advantage) we may be able to sell it but Fooling people(saying this religion is better than this etc) will not work and others are much smarter than what we think :D

However, Personally I think the sooner this religion thing finish the better it is.

बहुत डरना और bilkul न डरना एक bimari के लक्षण हैं, i read it somewhere and it is apt for situation as well. one who is staunch supporter of any religion and who is staunchly against it are the two sides of same coin.Personally i'm an agnostic person.

I dont know about any political advantage and whose political advantage you are talking here because i know the writer of this article personally. He is not having political ambitions, same has been vindicated by him in the reservation rallies where he was midst of things.

I personally think this religion will never finish because it is our own creation and till the time we are here it will remain.
 
So you are saying "We should be scared of GOD but shouldnt be too scared"?! I dont understand it. Either you believe in GOD or you dont. Otherwise it looks like saying " I will remember GOD when I am in trouble. All this is good but it still doesnt make a case to convert.
 
I dont know about any political advantage and whose political advantage you are talking here because i know the writer of this article personally. He is not having political ambitions, same has been vindicated by him in the reservation rallies where he was midst of things.

On the one hand you are saying you dont know whose political advantage I am talking about on the other hand you are assuming I am talking about writer . I have deep respect for Sangwan ji but that doesnt mean that I have to agree to all his views.

Anyway, I was talking about the political advantage of the whole Jat community. An advantage of being part of big religious group who would be dominated by JATS.

But again I dont approve converting to another sect just because of this. Conversion ideally should only happen if you really believe in the other sect's ideas and philosophy and you are not satisfied with your. May be its just me other might think differently.
 
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