देवनागरी लिपि में लिखी गई होती तो और ज्यादा अच्छी लगती.
vpsingh Ji, sorry for late reply. Aaj dekhya yo post aapka. asal mein roman-hindi likhan mein teji te likhi ja hai isliye sunte tem nue ee likhi thi ... lyo devnagri anuvad ...
इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3
मन्ने बचावे मरण तै .. इसा राम किते घनश्याम नहीं
में मरने का भय मान्नु इसा हरदया मेंरा मुलाम नहीं
मन्ने दीखे से एक आज़ादी और करण ने काम नहीं
में राजी सुं फांसी खाके रोक सके मन्ने राम नहीं
अरे ठाढ़ा था ते क्यूँ बाली मार्या बड के भीतर बड़ के ...
इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3
ओए सुढ्र पशु ढोल नारी सब ताडन के अधिकारी रे
इसे इसे राजा बने देश में फेर भी कह्न्ना कारी रे
इज्जत लूटें गैर बीर की जीत के दुनिया सारी रे
ना चाहिए अवतार मन्ने ... ऐसे किर्शन बलकारी रे
ओहे तेरे देश पे राजन कैसी .. तूं सोवे राम कित पड़ के
इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3
हो बिस्मिल फांसी तोड्या था जिब राम कड़े जा रह्य था रे ..
जलियांवालन कांड होया क्यूना डायर मार्या था रे ...
महाभारत क्यूँ माची थी जिब खुद किर्शन आ रह्य था रे ...
चोर उचक्के देव बना दिए किसा देश म्हारा था रे ... 2
होए करया वतन का नास कती ये कथा नई घड घड के ..
इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3
हेरे .. हक की खातिर लड़ने का कदे दिया राम ने ज्ञान नहीं
कोण कमावे कोण लूट रह्य राम करे पहचान नहीं
मुफ्तखोर ने ये ढोंग बनाए वैसे बजी तान नहीं
गरीब आदमी ने आज तलक कहीं मिल्या कदे भगवान नहीं
होए रणबीर सिंह जिब रोटी मांगे यो राम लिकड़ जया जड़ के ..
इन बातां में तंत नहीं से क्यूँ बैठ्या सिर पाकड़ के ने
हेरे तेरे पुराने खयाल आँख में तुनके की ढाला रड्कें - 3