पुराणी बात स उस ज़माने में बूरा चावल भी एक ख़ास डिश होया करदी अर म्हारे इलाके में धान ना बोया करदे ! अर लोग भी कसूते खावानिया हुया करदे !
दिवाली अवाण ने हो री थी, इन्ह दिना की बात ! म्हारे गाम त पूरण खरखोदे जा !
उस के बाबू जगमल ने उस ताहि दस रपये दिए,अर बोल्या
- र पूरण खरखोदे जा स त पह सर ( ५ सेर ) चावल लेता आईये !
पूरण प कई ब सामान ल्यावान्न में गड़बड़ हो ली थी इस ताहि पक्का करण खातर बुझण लगया -
- बाबू चावल एक धडी ( ५ सेर) ल्याने स ना ?
जगमल बोल्या - तू भी भाई बावला सा , अर मेरे यार एक धडी ते मैय ना खा जांगा तू पह सर ले क आईये !!!!!!
दिवाली अवाण ने हो री थी, इन्ह दिना की बात ! म्हारे गाम त पूरण खरखोदे जा !
उस के बाबू जगमल ने उस ताहि दस रपये दिए,अर बोल्या
- र पूरण खरखोदे जा स त पह सर ( ५ सेर ) चावल लेता आईये !
पूरण प कई ब सामान ल्यावान्न में गड़बड़ हो ली थी इस ताहि पक्का करण खातर बुझण लगया -
- बाबू चावल एक धडी ( ५ सेर) ल्याने स ना ?
जगमल बोल्या - तू भी भाई बावला सा , अर मेरे यार एक धडी ते मैय ना खा जांगा तू पह सर ले क आईये !!!!!!