आज की काण उर्मिला दुहूँ कि
फोटू : फोटू चाम्पन मैं तो बैरन काताई एंडी से, हर महीने बदल द, अर्र बिना गूगल कोई फोटो कोना चाम्प्ती, जो अंख्या पे न धरती तो सर पे धर ले से , एस्सा लगे से रात मैं सोमती हन भी गूगल कोन्य तारती या, बाकी पाच्ले इतवार ने मोर्निंग वाल्क पे जाती हाँ इनका टोम्मी खू गया था तो उससे ठून्दी हन जो फोटू खिच्या था वो ही चेप दिया...बाकी बीरबानी फोटू मैं दबग दीखे से अर्र असल मैं भी दबंग ही से आधे जाटलैंड ने केल्ली ओट ऋ से
लोगिन : लोगिन तो साचा ही लागे से मने तो , बाकि कई माणसा ने सक से एक या भेड़ कि खाल मैं भेड़िया से,
उदघोसना : कोई उद्घोसना नहीं , बाकी या तो लिख दे से वाही उद्घोसना से उस दिन कि
कार्यकलाप :
जिस दिन तै या जाटलैंड पे आई से , जाटलैंड पे बहार आ गयी से.....जिब्बे इनका कोई थरेअद चाल रया होता से तो चुगार्दे कु मजमा सा जुदा पावे से... इन्का थरेअद पे खोस्दा न बज्य हो इस्सा तो आज लोक हुआ ही नहीं...जाटलैंड कि कोन्त्रोवेर्स्य कुईं से यह..बाकी बात यह इस्सी कह दिया करे जो न थाई जा न धरी जा... बात यह सूद्हम सुध कह दिया करे ..इसी मारी कई माणसा के खाज था राख्यी से....कई बुध्य कि जुवानी लौट आई इनके थरेअद पढ़ पढ़ के...बुधाप्पे मैं उनके भी दिन बाहद गे....अर्र कई जलात्खोरी लुगाई हर टेम इनकी चुगली करती रह्य करे...पर इनपे किम्मे भी फरक कोना पड़ता, घनी ध्हेती बीरबानी से ...बाकी मरद जात तै इन्हें घनी शिकायत से.....baaki तो सब ठीक से
.....परर या आंटी कहे पे घनी कसुती चिद जाया करे..