The difference of religions has created a huge gap in Hindu and Sikh Jats. Yes, no doubt Hindu and Sikh Jats are same in all aspects (excluding religion), but difference of thinking is there for sure. If Sikh Jats think they are superior than the Hindu Jats or vice-versa, then I fail to understand as to why they think so. Upto 12-15 years back mostly Hindu Jats often used to boast of Dara Singh and Dharmendra/Sunny Deol as Jat heroes because Hindu Jats didn't have any famous celebrity then (maximum they had Ch. Charan Singh), but in last 12-15 the scenario has totally been changed. The hard work of Hindu Jats has born fruit upto some extent. I now feel it childish when I told the names of abovementioned Jat heroes to my non-Jat friends to feel proud among them. Now Hindu Jats also are not far behind. In fact, we have produced not only national level, but world level personalities too. In cricket, in other sports, in corporate world, in agriculture and in what not, we have left Sikh Jats far behind.
One thing I notice is don't know why always we (Hindu Jats) have to try to associate ourselves with the Sikh Jats. The Sikh Jats don't look so eager to attach themselves with us (Hindu Jats) on mostly occasions. If they do so then it will be good for all Jats. We Hindu Jats are almost 10 times more in quantity than the Sikh Jats. It is supposed that there are 7-8 crore Jats in India (120-140 lacs in U.P., 75-85 lacs in Rajasthan, 65-70 lacs in Haryana, 15-20 lacs in Delhi and so on in other states like M. P., H. P., Uttarakhand, Maharashtra etc., rest scattered in different regions of the country) among which only 70-75 lacs should be Sikh Jats. Yet, don't know why the Sikh Jats don't look highly eager to come closer to the Hindu Jats. We shouldn't forget 'United We Stand, Divided We Fall'.
On the contrary, when you ask it from any random sikh jat/t, he'll play a different tune. And they don't associate themselves with us, say it's different, god knows for what reason. It always disappoints me, knowing this, when i enter into such conversation with my sikh jat/t friends in an attempt to stike a brotherly conversation. And they hardly take reciprocative initiative.
God knows, why bhappe's have polluted their brains. We should try bringing them to JL platform, make them understand we are same, it's only just that you're in a different track of faith/spiritualism, but our race/customs/traditions are all one and the same & there can be no unity at all, until we both see eye to eye.
Let's a make collective request to the owner/editor/moderator, to edit this line "For now, membership to the site is generally limited to Hindu Jats" on the welcoming page of jatland, to mark a beginning.
उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ....
जाति अपनी जगह हैं और धर्म अपनी जगह | धर्म के नाम से जाति को बांटना गलत हैं , हमे धर्म से पहले अपनी जाति को देखना चाहिए | जो लोग जाति से पहले धर्म को देखते हैं वो लोग अंधे हैं बहके हुए हैं | धर्म या मजहब तो एक आस्था और आस्था कभी भी कितनी ही बार बदली जा सकती हैं पर जाति नहीं |
मेरी 12vi तक की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ की हैं | मेरी 12 वि की क्लास में हम 14 जाट थे , 13 सिख जाट और एक मैं मोना जाट | पंजाब के जाट में जातिवाद हमसे कहीं ज्यादा हैं , उस वक़्त वे पंजाब के लड़के क्लास में जाटों की गिनती करते तो 14 गिनते , मैं पूछता के 14 वा कौन हैं , तो वे मेरा नाम लेते | मैं उपेंदर वाली करता के मैं तो मोना हु तो वो कहते के क्या बात हुई हैं तो जाट |
ऐसा ही एक वाक्या भिवानी का हैं | एक बार गली में एक पंजाब का सरदार जी चावल बेचता घूम रहा था | मैंने उसको बुला लिया , पूछा किथो आया , उनसे कहा पटियाले तो | मैंने उसकी जाति पूछी बोला के चौहान जट्ट तो मैंने जाण के कहा के जट्ट हैं के जाट हैं , उसने कहा वीरजी एको ही गल हैं बस बोलन दा फर्क हैं | मैंने उसको चाय पानी पिलाया के परदेशी भाई स बैठ | इतने में गली की सारी पंजाबन (भापन) इकैट्ठी हो गई सारी माच के उस गैल पंजाबी में बोले दीखान ताहि के हाम भी पंजाबी सा ....चावल लेने के बाद उस भाई ने उनके 21 रूपये के भाव से लगाये , मेरे ता वो बोला के भाई जी आप 19 के हिसाब से दे दो ...तो इतने में एक पंजाबन बोली के इसके एन्ना कम क्यों लाया , तो वो भाई उसते बोल्या के ''बीबी साढ़ी गल होर हैं ''
हरियाणा के चौटाला परिवार और पंजाब के बादल परिवार का याराना तो किसे से नहीं छुपा , कोई नहीं कह सकता के ये दोनों अलग अलग परिवार हैं | जब भाजपा की सरकार थी तब एक विज्ञान भवन में कोई प्रोग्राम चल रहा था वाजपई के एक तरफ चौटाला साहब बैठे थे और दूसरी तरफ बादल साहब | भाजपा की सरकार एक बार 13 दिन में गिर गई थी और दूसरी बार 13 महीने में | जब चौटाला साहब के भाषण की बारी आई तो , चौटाला साहब ने कहा के वाजपई जी अब आपकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं अब आपके आजू बाजू दो जाट बैठे हैं एक तरफ चौटाला तो दूसरी तरफ बादल .......अगर कोई फर्क होता तो चौटाला साहब सरे आम अपने भाषण में यह नहीं कहते ....
तो भाइयो यो तो आपना आपना नजरिया स , जिसा बर्ताव थामने करा हो उसा ऐ आगला करेगा , इब उपेंदर बर्गा जाति त पहले धर्म के बाथ बरेगा तो हाम के घाट घालांगे![]()
raka ji chautala n badal ki apasssii mai rishtey daari see......chautale ke parivvar ka eek chora badal ke parivaar mai byaahaa ya thaaजाति अपनी जगह हैं और धर्म अपनी जगह | धर्म के नाम से जाति को बांटना गलत हैं , हमे धर्म से पहले अपनी जाति को देखना चाहिए | जो लोग जाति से पहले धर्म को देखते हैं वो लोग अंधे हैं बहके हुए हैं | धर्म या मजहब तो एक आस्था और आस्था कभी भी कितनी ही बार बदली जा सकती हैं पर जाति नहीं |
मेरी 12vi तक की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ की हैं | मेरी 12 वि की क्लास में हम 14 जाट थे , 13 सिख जाट और एक मैं मोना जाट | पंजाब के जाट में जातिवाद हमसे कहीं ज्यादा हैं , उस वक़्त वे पंजाब के लड़के क्लास में जाटों की गिनती करते तो 14 गिनते , मैं पूछता के 14 वा कौन हैं , तो वे मेरा नाम लेते | मैं उपेंदर वाली करता के मैं तो मोना हु तो वो कहते के क्या बात हुई हैं तो जाट |
ऐसा ही एक वाक्या भिवानी का हैं | एक बार गली में एक पंजाब का सरदार जी चावल बेचता घूम रहा था | मैंने उसको बुला लिया , पूछा किथो आया , उनसे कहा पटियाले तो | मैंने उसकी जाति पूछी बोला के चौहान जट्ट तो मैंने जाण के कहा के जट्ट हैं के जाट हैं , उसने कहा वीरजी एको ही गल हैं बस बोलन दा फर्क हैं | मैंने उसको चाय पानी पिलाया के परदेशी भाई स बैठ | इतने में गली की सारी पंजाबन (भापन) इकैट्ठी हो गई सारी माच के उस गैल पंजाबी में बोले दीखान ताहि के हाम भी पंजाबी सा ....चावल लेने के बाद उस भाई ने उनके 21 रूपये के भाव से लगाये , मेरे ता वो बोला के भाई जी आप 19 के हिसाब से दे दो ...तो इतने में एक पंजाबन बोली के इसके एन्ना कम क्यों लाया , तो वो भाई उसते बोल्या के ''बीबी साढ़ी गल होर हैं ''
हरियाणा के चौटाला परिवार और पंजाब के बादल परिवार का याराना तो किसे से नहीं छुपा , कोई नहीं कह सकता के ये दोनों अलग अलग परिवार हैं | जब भाजपा की सरकार थी तब एक विज्ञान भवन में कोई प्रोग्राम चल रहा था वाजपई के एक तरफ चौटाला साहब बैठे थे और दूसरी तरफ बादल साहब | भाजपा की सरकार एक बार 13 दिन में गिर गई थी और दूसरी बार 13 महीने में | जब चौटाला साहब के भाषण की बारी आई तो , चौटाला साहब ने कहा के वाजपई जी अब आपकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं अब आपके आजू बाजू दो जाट बैठे हैं एक तरफ चौटाला तो दूसरी तरफ बादल .......अगर कोई फर्क होता तो चौटाला साहब सरे आम अपने भाषण में यह नहीं कहते ....
तो भाइयो यो तो आपना आपना नजरिया स , जिसा बर्ताव थामने करा हो उसा ऐ आगला करेगा , इब उपेंदर बर्गा जाति त पहले धर्म के बाथ बरेगा तो हाम के घाट घालांगे![]()
पंजाबी जट्टो में एक जीवना मोर का किस्सा बहुत मशहूर हैं , मैं भी बहुत सुनता था सुरेंदर शिंदा का गाया हुआ | जब मैंने हरियाणा में रहना शुरू किया तो देखा के यहाँ जीवना मोर ज्यानी चोर हो गया | एक पण्डे ने जीवना मोर को ज्यानी चोर बना दिया और हमारे देशवाली जाट भाई उसको सुन कर खुश हो रहे हैं तालिया बजा रहे हैं , कबूतर की तरह गर्दन हिला रहे हैं , यह हिसाब नहीं लगाते की वो थारे मुह पर ही थारे बुजुर्ग ने चोर कहन लाग रया स ....यह फर्क हैं पंजाबी जट्ट (सिक्ख जट्ट ) और हिन्दू जाट में , सिक्ख जट्टो ने जीवना मोर को चोर नहीं बनाने दिया | हिन्दू जाट को इस ब्राह्मणवाद ने इस कद्र जकड़ रखा हैं के उसको पता ही नहीं की ये लोग उनके बुजर्गो को क्या मान सम्मान देते हैं | सुते चाले स किम्मे नहीं बेरा अक कुण के कह स ......
अच्छा , फेर मैंने ज्ञान घाट था तो इसके बारे में , मैंने आज तक याहे सुनी स के देवी लाल आर बादल पगड़ी बादल भाई स .........चौटाला परिवार में कुनसे का ब्याह रखा स ?raka ji chautala n badal ki apasssii mai rishtey daari see......chautale ke parivvar ka eek chora badal ke parivaar mai byaahaa ya thaa
byaaah to ji chautale ke kissi rishtey daar ka hoyaa thaa bahut pehle badal parivaar mai...yo baat maaane meri cousin ne batayee thi jo ajay singh chautala ka PA see....woo ee keh tha ke inki apass mai rishtey daaari seeअच्छा , फेर मैंने ज्ञान घाट था तो इसके बारे में , मैंने आज तक याहे सुनी स के देवी लाल आर बादल पगड़ी बादल भाई स .........चौटाला परिवार में कुनसे का ब्याह रखा स ?
परिवार और रिश्तेदार में फर्क हो स .....byaaah to ji chautale ke kissi rishtey daar ka hoyaa thaa bahut pehle badal parivaar mai...yo baat maaane meri cousin ne batayee thi jo ajay singh chautala ka PA see....woo ee keh tha ke inki apass mai rishtey daaari see
agarr ji meree tauu ke chore kaa byaah badal parivvar mai ho jaaa to meri bhi to eek tarahh see rishtey daari hogii....परिवार और रिश्तेदार में फर्क हो स .....
पंजाबी जट्टो में एक जीवना मोर का किस्सा बहुत मशहूर हैं , मैं भी बहुत सुनता था सुरेंदर शिंदा का गाया हुआ | जब मैंने हरियाणा में रहना शुरू किया तो देखा के यहाँ जीवना मोर ज्यानी चोर हो गया | एक पण्डे ने जीवना मोर को ज्यानी चोर बना दिया और हमारे देशवाली जाट भाई उसको सुन कर खुश हो रहे हैं तालिया बजा रहे हैं , कबूतर की तरह गर्दन हिला रहे हैं , यह हिसाब नहीं लगाते की वो थारे मुह पर ही थारे बुजुर्ग ने चोर कहन लाग रया स ....यह फर्क हैं पंजाबी जट्ट (सिक्ख जट्ट ) और हिन्दू जाट में , सिक्ख जट्टो ने जीवना मोर को चोर नहीं बनाने दिया | हिन्दू जाट को इस ब्राह्मणवाद ने इस कद्र जकड़ रखा हैं के उसको पता ही नहीं की ये लोग उनके बुजर्गो को क्या मान सम्मान देते हैं | सुते चाले स किम्मे नहीं बेरा अक कुण के कह स ......इनने भगवान् की फ़िक्र ज्यादा स खुद के मान सम्मान की कम .....
देवीलाल, शेर सिंह, इत्यादि के बावळी-बूच थे जो अलग हरयाणा की मांग करणी पड़ी..अपणे सिख भाईयां के साथ पंजाब मै ए ना रह लेते, इतणा हेज़ था तो ?????????????
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आप मानो या न मानो, लेकिन ये हकीकत है कि हिंदू जाट और सिख जाट आपस में वैवाहिक रिश्ते बनाते हुए झिझकते हैं...बल्कि यह कहना गलत नहीं होगा कि करते ही नहीं हैं...हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के जाटों में आपस में खूब रिश्ते होते हैं, लेकिन पंजाब के जाटों से ना के बराबर ही होते हैं, भले ही वे एक ही शहर में क्यों न रहते हों...पंजाब के जाटों के विवाह होते हैं गुरुद्वारे में या सिख पद्धति से, जबकि बाकी जाटों के होते हैं हिंदू विधि-विधान से...
in recent election out of 117 seats 49 has won by jat sikh nowhere in any indian state one caste able to won around around 43% of seats and on 7 jat dominated seats .. strong jat candidates lost election to non jats because majority of jat vote for non jat candidates and out of 13 MPs in punjab 6 are jat......there are not more then 2-3% of jat sikh who want Khalistan ...pro Khalistan political parties cant able to get 1% vote share...
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