Jat Sikh and Hindu JAT are same = JAT ..!!!!!!

उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ....
 
Dear Mr. Singh,
First of all very good afternoon to you. i have read your post on Hindu Sikh jat..I couldn't understand that are we people are trying to fillup the gap or trying to creat more gap in between hindu sikh jat...There is nothing like that Sikh jat think themselves superior then hindu jats...i studied in kurukhetra University and in Punjab uni chandigarh..please do visit that part ..we never feel that we have ny diff..m from panipat and if i have 100 jat frndz 90% of them are hindu jat..I dont know why u said that hindu jat were like that and now dayz you have your own icons to cheer....i do cheer sehwag .sania nehawal or every one related to jat community...I am here to support jatt community and trying to help whatever in my reach to ny jat from ny relagion...so please support entire jatt community or else we would not be able to stand unite...I request to every on to put their ego aside and think global in terms of jat welfair..If you hev any other doubt please feel free to contact me or write to me..

Regards
raghbir Singh Deol

The difference of religions has created a huge gap in Hindu and Sikh Jats. Yes, no doubt Hindu and Sikh Jats are same in all aspects (excluding religion), but difference of thinking is there for sure. If Sikh Jats think they are superior than the Hindu Jats or vice-versa, then I fail to understand as to why they think so. Upto 12-15 years back mostly Hindu Jats often used to boast of Dara Singh and Dharmendra/Sunny Deol as Jat heroes because Hindu Jats didn't have any famous celebrity then (maximum they had Ch. Charan Singh), but in last 12-15 the scenario has totally been changed. The hard work of Hindu Jats has born fruit upto some extent. I now feel it childish when I told the names of abovementioned Jat heroes to my non-Jat friends to feel proud among them. Now Hindu Jats also are not far behind. In fact, we have produced not only national level, but world level personalities too. In cricket, in other sports, in corporate world, in agriculture and in what not, we have left Sikh Jats far behind.
One thing I notice is don't know why always we (Hindu Jats) have to try to associate ourselves with the Sikh Jats. The Sikh Jats don't look so eager to attach themselves with us (Hindu Jats) on mostly occasions. If they do so then it will be good for all Jats. We Hindu Jats are almost 10 times more in quantity than the Sikh Jats. It is supposed that there are 7-8 crore Jats in India (120-140 lacs in U.P., 75-85 lacs in Rajasthan, 65-70 lacs in Haryana, 15-20 lacs in Delhi and so on in other states like M. P., H. P., Uttarakhand, Maharashtra etc., rest scattered in different regions of the country) among which only 70-75 lacs should be Sikh Jats. Yet, don't know why the Sikh Jats don't look highly eager to come closer to the Hindu Jats. We shouldn't forget 'United We Stand, Divided We Fall'.
 
I can understand and m agree too that some time it happens that some people have these thing in mind that Sikh jat n hindu jat are diff...but its our responsibility to correct that thing...And i total support you on this that we need to change this line "For now, membership to the site is generally limited to Hindu Jats".. I hope young jat generation will not get into this Hindu sikh jat diff and our bhaichara will grow day by day,,,...all are educated now days and can easily understand that y this diff was created by some politicians and sick people for their own benefit and we were fool who been fighting and still in ego ..They were well aware of this fact that if hindu n sikh jat became unite their empire will b in danger..So lets be only jat...no Hidu jat no sikh jat..Just Jat..



On the contrary, when you ask it from any random sikh jat/t, he'll play a different tune. And they don't associate themselves with us, say it's different, god knows for what reason. It always disappoints me, knowing this, when i enter into such conversation with my sikh jat/t friends in an attempt to stike a brotherly conversation. And they hardly take reciprocative initiative.

God knows, why bhappe's have polluted their brains. We should try bringing them to JL platform, make them understand we are same, it's only just that you're in a different track of faith/spiritualism, but our race/customs/traditions are all one and the same & there can be no unity at all, until we both see eye to eye.

Let's a make collective request to the owner/editor/moderator, to edit this line "For now, membership to the site is generally limited to Hindu Jats" on the welcoming page of jatland, to mark a beginning.
 
जाति अपनी जगह हैं और धर्म अपनी जगह | धर्म के नाम से जाति को बांटना गलत हैं , हमे धर्म से पहले अपनी जाति को देखना चाहिए | जो लोग जाति से पहले धर्म को देखते हैं वो लोग अंधे हैं बहके हुए हैं | धर्म या मजहब तो एक आस्था और आस्था कभी भी कितनी ही बार बदली जा सकती हैं पर जाति नहीं |

मेरी 12vi तक की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ की हैं | मेरी 12 वि की क्लास में हम 14 जाट थे , 13 सिख जाट और एक मैं मोना जाट | पंजाब के जाट में जातिवाद हमसे कहीं ज्यादा हैं , उस वक़्त वे पंजाब के लड़के क्लास में जाटों की गिनती करते तो 14 गिनते , मैं पूछता के 14 वा कौन हैं , तो वे मेरा नाम लेते | मैं उपेंदर वाली करता के मैं तो मोना हु तो वो कहते के क्या बात हुई हैं तो जाट |


ऐसा ही एक वाक्या भिवानी का हैं | एक बार गली में एक पंजाब का सरदार जी चावल बेचता घूम रहा था | मैंने उसको बुला लिया , पूछा किथो आया , उनसे कहा पटियाले तो | मैंने उसकी जाति पूछी बोला के चौहान जट्ट तो मैंने जाण के कहा के जट्ट हैं के जाट हैं , उसने कहा वीरजी एको ही गल हैं बस बोलन दा फर्क हैं | मैंने उसको चाय पानी पिलाया के परदेशी भाई स बैठ | इतने में गली की सारी पंजाबन (भापन) इकैट्ठी हो गई सारी माच के उस गैल पंजाबी में बोले दीखान ताहि के हाम भी पंजाबी सा ....चावल लेने के बाद उस भाई ने उनके 21 रूपये के भाव से लगाये , मेरे ता वो बोला के भाई जी आप 19 के हिसाब से दे दो ...तो इतने में एक पंजाबन बोली के इसके एन्ना कम क्यों लाया , तो वो भाई उसते बोल्या के ''बीबी साढ़ी गल होर हैं ''


हरियाणा के चौटाला परिवार और पंजाब के बादल परिवार का याराना तो किसे से नहीं छुपा , कोई नहीं कह सकता के ये दोनों अलग अलग परिवार हैं | जब भाजपा की सरकार थी तब एक विज्ञान भवन में कोई प्रोग्राम चल रहा था वाजपई के एक तरफ चौटाला साहब बैठे थे और दूसरी तरफ बादल साहब | भाजपा की सरकार एक बार 13 दिन में गिर गई थी और दूसरी बार 13 महीने में | जब चौटाला साहब के भाषण की बारी आई तो , चौटाला साहब ने कहा के वाजपई जी अब आपकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं अब आपके आजू बाजू दो जाट बैठे हैं एक तरफ चौटाला तो दूसरी तरफ बादल .......अगर कोई फर्क होता तो चौटाला साहब सरे आम अपने भाषण में यह नहीं कहते ....


तो भाइयो यो तो आपना आपना नजरिया स , जिसा बर्ताव थामने करा हो उसा ऐ आगला करेगा , इब उपेंदर बर्गा जाति त पहले धर्म के बाथ बरेगा तो हाम के घाट घालांगे :)
 
उपेंद्र का rss वालों ने कबूतर बना रखा हैं , जो बिल्ली न आती देख आँख मींच लिया करे न्यू ए यो कोणी देखना चाहवे के हक़ीक़त के स ....


हकीकत आप बता दो जनाब, लेकिन किसी ठोस प्रमाण के साथ बताना...

मेरी ये समझ में नहीं आता लोग हिंदुओं के इतने दुश्मन क्यों हो जाते हैं...लगभग 1000 साल पहले भारत में सब हिंदू ही थे...इसके बाद जयचंद ने गद्दारी की तो यहां मुसलमान पैठ बना गए...इसके बाद यहां हिंदुओं को मिटाने की खूब कोशिश हुई...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का? क्या यह कसूर था कि उन्होंने कड़ी मेहनत से बेशुमार धन जोड़ा था और भारत को दुनिया का सबसे अमीर देश बनाया था? क्या यह कसूर था की सदियों पुरानी अपनी संस्कृति को संभाला था? एक जयचंद ने गद्दारी की तो देश के लिए बलिदान भी तो अनेकों हिंदुओं ने दिया...इसके बाद अंग्रेज आ गए...मुसलमानों का पतन हो गया, लेकिन अंग्रेज हावी हो गए...इस बीच लगभग 300 साल पहले गुरु गोबिंद सिंह के नेतृत्व में सिखों का उदय हुआ...1947 में किसी तरह देश आजाद हुआ...देश का बटवारा हुआ...भारी खून-खराबा हुआ...जैसे ही कोई नया धर्म वजूद में आता है तो उसे मानने वाले खुद की अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं...मुसलमान, जिनमें से अधिकतर कभी हिंदू ही थे, वे हमारे दुश्मन बन गए और हमें मिटाने में लग गए...वे तो बंगाली मुसलमानों को भी कुचलने में लग गए, जिसके चलते 1971 में उन्हें सबक सिखाया गया...जो सिख धर्म कभी भारत की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हुआ था, उसमें से एक धड़ा खालिस्तान की मांग करने लगा...पंजाब में हिंदुओं पर जुल्म ढहाने लगा...क्यों??? क्या कसूर था हिंदुओं का??? ...इसके बाद ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ, इतनी अच्छी नेता इंदिरा गांधी को मार दिया गया...फिर सिखों का कत्ले-आम हुआ...इसमें कोई मुझे बताए कि हिंदुओं की कहां गलती है? पहले हिंदुओं को सताया गया...तब हिंदुओं को सख्ती दिखानी पड़ी...
बिना धर्म के कोई नहीं जी सकता...यही कारण है कि इस दुनिया में अधिकतर लोगों का कोई न कोई धर्म है. आखिर कोई तो वजह होगी जो अमेरिका और यूरोप के 'बेहद बुद्धिमान' एवं तथाकथित अत्याधुनिक विचारों के लोगों ने भी किसी न किसी धर्म को अपनाया हुआ है...जो ये समझता हो कि ये धर्म वगैरह सब फिजूल की बातें हैं तो फिर वो बिना धर्म के जीकर दिखाए, तब मानेंगे...इसके लिए ऐसा नाम रखना होगा, ऐसी वेशभूषा, ऐसा रहन-सहन अपनाना होगा, जो किसी भी धर्म से ताल्लुक न रखता हो...खुद के, बच्चों के शादी-ब्याह के समय, कोई नौकरी हासिल करते समय, कहीं दाखिला लेते समय भी ये कहना होगा कि मेरा कोई धर्म नहीं है...पता चल जाएगा कि बिना धर्म के जीना क्या होता है...कोई भले ही कितनी ही डींगें हांकता रहे कि वो तो धर्म में यकीन ही नहीं करता, इसके बावजूद वो किसी न किसी रूप में धर्म से जुड़ा होता है...जब हम किसी को अपना नाम बताते हैं तो बस वहीं हम धर्म का फायदा उठा लेते हैं...ऐसे तथाकथित 'नास्तिक' व्यापार में, ऑफिस में, नौकरी में कुछ ऐसा नाम बताकर दिखाएं, जिसका किसी धर्म से ताल्लुक न हो...तब चलेगा असली पता कि धर्म का क्या फायदा मिल रहा होता है उन्हें...बिना धर्म के इंसान पशु समान है...अगर हमें किसी धर्म का लाभ मिल रहा है तो ये हमारा फर्ज बनता है कि हम उस धर्म का अहसान मानें और उसकी भलाई सोचें...ये ठीक वैसे ही है, जैसे कि कोई पेड़ हमें छाया का सुख दे रहा है तो हमारा फर्ज बनता है कि उस पेड़ की जड़ें न काटें, बल्कि उसका कुछ भला सोचें...जाट सदियों से हिंदू धर्म की छात्र-छाया में जी रहे हैं, बल्कि यूं कहना चाहिए कि जाट हिंदू धर्म का एक बेहद अहम हिस्सा हैं...ऐसे में हिंदू धर्म की रक्षा करना सभी जाटों का फर्ज बनता है और अधिकतर जाट ऐसा कर भी रहे हैं. जाट हिंदू धर्म की बहुत शान बढ़ा रहे हैं और आशा की जानी चाहिए कि आगे भी बढ़ाते रहेंगे. यह कहना कोई अतिशयोक्ति न होगा कि यह हिंदू धर्म की, भारत देश की महानता ही है कि जाट जैसी महान जाति उसके पास है...
अब जनाब आप बताओ अपनी...इस हिंदू धर्म ने आपके साथ या आपके हिसाब से अन्य जाटों के साथ ऐसा क्या बुरा कर दिया, जो आपको हिंदू धर्म छोड़कर सिख धर्म अपनाना पड़ा...? मजे की बात यह है कि आप सिख भी पूरी तरह से नहीं बने...न आप दिखने में, न बोल-चाल में कहीं से सिख लगते हो...न ही आपका नाम सिखों वाला है...मुझे तो ऐसा लगता है कि यदि कोई सिख आपसे कहेगा कि देखा सिख धर्म कितना महान है, तुम्हें सिख बनने पर विवश कर दिया तो आप उसे कहोगे कि आप तो सिख बने ही नहीं हो और यदि कोई आपको हिंदू कहेगा तो आप कहोगे कि नहीं आप तो सिख हो...ये आपका बढ़िया तरीका है...:suspicion:
 
जाति अपनी जगह हैं और धर्म अपनी जगह | धर्म के नाम से जाति को बांटना गलत हैं , हमे धर्म से पहले अपनी जाति को देखना चाहिए | जो लोग जाति से पहले धर्म को देखते हैं वो लोग अंधे हैं बहके हुए हैं | धर्म या मजहब तो एक आस्था और आस्था कभी भी कितनी ही बार बदली जा सकती हैं पर जाति नहीं |

मेरी 12vi तक की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ की हैं | मेरी 12 वि की क्लास में हम 14 जाट थे , 13 सिख जाट और एक मैं मोना जाट | पंजाब के जाट में जातिवाद हमसे कहीं ज्यादा हैं , उस वक़्त वे पंजाब के लड़के क्लास में जाटों की गिनती करते तो 14 गिनते , मैं पूछता के 14 वा कौन हैं , तो वे मेरा नाम लेते | मैं उपेंदर वाली करता के मैं तो मोना हु तो वो कहते के क्या बात हुई हैं तो जाट |


ऐसा ही एक वाक्या भिवानी का हैं | एक बार गली में एक पंजाब का सरदार जी चावल बेचता घूम रहा था | मैंने उसको बुला लिया , पूछा किथो आया , उनसे कहा पटियाले तो | मैंने उसकी जाति पूछी बोला के चौहान जट्ट तो मैंने जाण के कहा के जट्ट हैं के जाट हैं , उसने कहा वीरजी एको ही गल हैं बस बोलन दा फर्क हैं | मैंने उसको चाय पानी पिलाया के परदेशी भाई स बैठ | इतने में गली की सारी पंजाबन (भापन) इकैट्ठी हो गई सारी माच के उस गैल पंजाबी में बोले दीखान ताहि के हाम भी पंजाबी सा ....चावल लेने के बाद उस भाई ने उनके 21 रूपये के भाव से लगाये , मेरे ता वो बोला के भाई जी आप 19 के हिसाब से दे दो ...तो इतने में एक पंजाबन बोली के इसके एन्ना कम क्यों लाया , तो वो भाई उसते बोल्या के ''बीबी साढ़ी गल होर हैं ''


हरियाणा के चौटाला परिवार और पंजाब के बादल परिवार का याराना तो किसे से नहीं छुपा , कोई नहीं कह सकता के ये दोनों अलग अलग परिवार हैं | जब भाजपा की सरकार थी तब एक विज्ञान भवन में कोई प्रोग्राम चल रहा था वाजपई के एक तरफ चौटाला साहब बैठे थे और दूसरी तरफ बादल साहब | भाजपा की सरकार एक बार 13 दिन में गिर गई थी और दूसरी बार 13 महीने में | जब चौटाला साहब के भाषण की बारी आई तो , चौटाला साहब ने कहा के वाजपई जी अब आपकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं अब आपके आजू बाजू दो जाट बैठे हैं एक तरफ चौटाला तो दूसरी तरफ बादल .......अगर कोई फर्क होता तो चौटाला साहब सरे आम अपने भाषण में यह नहीं कहते ....


तो भाइयो यो तो आपना आपना नजरिया स , जिसा बर्ताव थामने करा हो उसा ऐ आगला करेगा , इब उपेंदर बर्गा जाति त पहले धर्म के बाथ बरेगा तो हाम के घाट घालांगे :)


दरअसल जनाब, धर्म बदलने से दूसरे लोगों को मौका मिल जाता है ये कहने का कि नहीं तुम कुछ और हो और वे कुछ और...मैं बहुत साल पहले जब भी गैर-जाटों के सामने ये कहता था कि दारा सिंह और धर्मेन्द्र भी तो जाट हैं तो वे फट से कहते थे कि नहीं वे तो जट्ट हैं, सरदार हैं...ऐसे में मुझे बहुत ही गुस्सा आता था...हालांकि सभी नहीं, लेकिन अधिकतर ऐसा कहते थे...तो आप ये मत बताओ कि हिंदू और सिख जाट आपस में कितना एक-दूसरे को एक मानते हैं...बल्कि ये बताओ कि गैर-जाट इन्हें कितना एक मानते हैं...?

आप मानो या न मानो, लेकिन ये हकीकत है कि हिंदू जाट और सिख जाट आपस में वैवाहिक रिश्ते बनाते हुए झिझकते हैं...बल्कि यह कहना गलत नहीं होगा कि करते ही नहीं हैं...हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के जाटों में आपस में खूब रिश्ते होते हैं, लेकिन पंजाब के जाटों से ना के बराबर ही होते हैं, भले ही वे एक ही शहर में क्यों न रहते हों...पंजाब के जाटों के विवाह होते हैं गुरुद्वारे में या सिख पद्धति से, जबकि बाकी जाटों के होते हैं हिंदू विधि-विधान से...
 
मुझे भी हमेशा बहुत सम्मान दिया है मेरे सिख जट दोस्तों ने | हिन्दू जट होते हुए, मेरा तो नाम भी पिता जी ने सिख जटों वाला रखा है | ये हमारे भाचारे का प्रतिक है |
 
पंजाबी जट्टो में एक जीवना मोर का किस्सा बहुत मशहूर हैं , मैं भी बहुत सुनता था सुरेंदर शिंदा का गाया हुआ | जब मैंने हरियाणा में रहना शुरू किया तो देखा के यहाँ जीवना मोर ज्यानी चोर हो गया | एक पण्डे ने जीवना मोर को ज्यानी चोर बना दिया और हमारे देशवाली जाट भाई उसको सुन कर खुश हो रहे हैं तालिया बजा रहे हैं , कबूतर की तरह गर्दन हिला रहे हैं , यह हिसाब नहीं लगाते की वो थारे मुह पर ही थारे बुजुर्ग ने चोर कहन लाग रया स ....यह फर्क हैं पंजाबी जट्ट (सिक्ख जट्ट ) और हिन्दू जाट में , सिक्ख जट्टो ने जीवना मोर को चोर नहीं बनाने दिया | हिन्दू जाट को इस ब्राह्मणवाद ने इस कद्र जकड़ रखा हैं के उसको पता ही नहीं की ये लोग उनके बुजर्गो को क्या मान सम्मान देते हैं | सुते चाले स किम्मे नहीं बेरा अक कुण के कह स ......इनने भगवान् की फ़िक्र ज्यादा स खुद के मान सम्मान की कम .....
 
जाति अपनी जगह हैं और धर्म अपनी जगह | धर्म के नाम से जाति को बांटना गलत हैं , हमे धर्म से पहले अपनी जाति को देखना चाहिए | जो लोग जाति से पहले धर्म को देखते हैं वो लोग अंधे हैं बहके हुए हैं | धर्म या मजहब तो एक आस्था और आस्था कभी भी कितनी ही बार बदली जा सकती हैं पर जाति नहीं |

मेरी 12vi तक की स्कूली शिक्षा चंडीगढ़ की हैं | मेरी 12 वि की क्लास में हम 14 जाट थे , 13 सिख जाट और एक मैं मोना जाट | पंजाब के जाट में जातिवाद हमसे कहीं ज्यादा हैं , उस वक़्त वे पंजाब के लड़के क्लास में जाटों की गिनती करते तो 14 गिनते , मैं पूछता के 14 वा कौन हैं , तो वे मेरा नाम लेते | मैं उपेंदर वाली करता के मैं तो मोना हु तो वो कहते के क्या बात हुई हैं तो जाट |


ऐसा ही एक वाक्या भिवानी का हैं | एक बार गली में एक पंजाब का सरदार जी चावल बेचता घूम रहा था | मैंने उसको बुला लिया , पूछा किथो आया , उनसे कहा पटियाले तो | मैंने उसकी जाति पूछी बोला के चौहान जट्ट तो मैंने जाण के कहा के जट्ट हैं के जाट हैं , उसने कहा वीरजी एको ही गल हैं बस बोलन दा फर्क हैं | मैंने उसको चाय पानी पिलाया के परदेशी भाई स बैठ | इतने में गली की सारी पंजाबन (भापन) इकैट्ठी हो गई सारी माच के उस गैल पंजाबी में बोले दीखान ताहि के हाम भी पंजाबी सा ....चावल लेने के बाद उस भाई ने उनके 21 रूपये के भाव से लगाये , मेरे ता वो बोला के भाई जी आप 19 के हिसाब से दे दो ...तो इतने में एक पंजाबन बोली के इसके एन्ना कम क्यों लाया , तो वो भाई उसते बोल्या के ''बीबी साढ़ी गल होर हैं ''


हरियाणा के चौटाला परिवार और पंजाब के बादल परिवार का याराना तो किसे से नहीं छुपा , कोई नहीं कह सकता के ये दोनों अलग अलग परिवार हैं | जब भाजपा की सरकार थी तब एक विज्ञान भवन में कोई प्रोग्राम चल रहा था वाजपई के एक तरफ चौटाला साहब बैठे थे और दूसरी तरफ बादल साहब | भाजपा की सरकार एक बार 13 दिन में गिर गई थी और दूसरी बार 13 महीने में | जब चौटाला साहब के भाषण की बारी आई तो , चौटाला साहब ने कहा के वाजपई जी अब आपकी सरकार को कोई ख़तरा नहीं हैं अब आपके आजू बाजू दो जाट बैठे हैं एक तरफ चौटाला तो दूसरी तरफ बादल .......अगर कोई फर्क होता तो चौटाला साहब सरे आम अपने भाषण में यह नहीं कहते ....


तो भाइयो यो तो आपना आपना नजरिया स , जिसा बर्ताव थामने करा हो उसा ऐ आगला करेगा , इब उपेंदर बर्गा जाति त पहले धर्म के बाथ बरेगा तो हाम के घाट घालांगे :)
raka ji chautala n badal ki apasssii mai rishtey daari see......chautale ke parivvar ka eek chora badal ke parivaar mai byaahaa ya thaa
 
पंजाबी जट्टो में एक जीवना मोर का किस्सा बहुत मशहूर हैं , मैं भी बहुत सुनता था सुरेंदर शिंदा का गाया हुआ | जब मैंने हरियाणा में रहना शुरू किया तो देखा के यहाँ जीवना मोर ज्यानी चोर हो गया | एक पण्डे ने जीवना मोर को ज्यानी चोर बना दिया और हमारे देशवाली जाट भाई उसको सुन कर खुश हो रहे हैं तालिया बजा रहे हैं , कबूतर की तरह गर्दन हिला रहे हैं , यह हिसाब नहीं लगाते की वो थारे मुह पर ही थारे बुजुर्ग ने चोर कहन लाग रया स ....यह फर्क हैं पंजाबी जट्ट (सिक्ख जट्ट ) और हिन्दू जाट में , सिक्ख जट्टो ने जीवना मोर को चोर नहीं बनाने दिया | हिन्दू जाट को इस ब्राह्मणवाद ने इस कद्र जकड़ रखा हैं के उसको पता ही नहीं की ये लोग उनके बुजर्गो को क्या मान सम्मान देते हैं | सुते चाले स किम्मे नहीं बेरा अक कुण के कह स ......

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raka ji chautala n badal ki apasssii mai rishtey daari see......chautale ke parivvar ka eek chora badal ke parivaar mai byaahaa ya thaa
अच्छा , फेर मैंने ज्ञान घाट था तो इसके बारे में , मैंने आज तक याहे सुनी स के देवी लाल आर बादल पगड़ी बादल भाई स .........चौटाला परिवार में कुनसे का ब्याह रखा स ?
 
अच्छा , फेर मैंने ज्ञान घाट था तो इसके बारे में , मैंने आज तक याहे सुनी स के देवी लाल आर बादल पगड़ी बादल भाई स .........चौटाला परिवार में कुनसे का ब्याह रखा स ?
byaaah to ji chautale ke kissi rishtey daar ka hoyaa thaa bahut pehle badal parivaar mai...yo baat maaane meri cousin ne batayee thi jo ajay singh chautala ka PA see....woo ee keh tha ke inki apass mai rishtey daaari see
 
byaaah to ji chautale ke kissi rishtey daar ka hoyaa thaa bahut pehle badal parivaar mai...yo baat maaane meri cousin ne batayee thi jo ajay singh chautala ka PA see....woo ee keh tha ke inki apass mai rishtey daaari see
परिवार और रिश्तेदार में फर्क हो स .....
 
पंजाबी जट्टो में एक जीवना मोर का किस्सा बहुत मशहूर हैं , मैं भी बहुत सुनता था सुरेंदर शिंदा का गाया हुआ | जब मैंने हरियाणा में रहना शुरू किया तो देखा के यहाँ जीवना मोर ज्यानी चोर हो गया | एक पण्डे ने जीवना मोर को ज्यानी चोर बना दिया और हमारे देशवाली जाट भाई उसको सुन कर खुश हो रहे हैं तालिया बजा रहे हैं , कबूतर की तरह गर्दन हिला रहे हैं , यह हिसाब नहीं लगाते की वो थारे मुह पर ही थारे बुजुर्ग ने चोर कहन लाग रया स ....यह फर्क हैं पंजाबी जट्ट (सिक्ख जट्ट ) और हिन्दू जाट में , सिक्ख जट्टो ने जीवना मोर को चोर नहीं बनाने दिया | हिन्दू जाट को इस ब्राह्मणवाद ने इस कद्र जकड़ रखा हैं के उसको पता ही नहीं की ये लोग उनके बुजर्गो को क्या मान सम्मान देते हैं | सुते चाले स किम्मे नहीं बेरा अक कुण के कह स ......इनने भगवान् की फ़िक्र ज्यादा स खुद के मान सम्मान की कम .....

Qissa Jeona Morh — Surinder Shinda

http://folkpunjab.com/surinder-shinda/kissa-jeona-morh/
 
देवीलाल, शेर सिंह, इत्यादि के बावळी-बूच थे जो अलग हरयाणा की मांग करणी पड़ी..अपणे सिख भाईयां के साथ पंजाब मै ए ना रह लेते, इतणा हेज़ था तो ?????????????
 
देवीलाल, शेर सिंह, इत्यादि के बावळी-बूच थे जो अलग हरयाणा की मांग करणी पड़ी..अपणे सिख भाईयां के साथ पंजाब मै ए ना रह लेते, इतणा हेज़ था तो ?????????????

आधार क्या था बंटवारे का ?
 
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आप मानो या न मानो, लेकिन ये हकीकत है कि हिंदू जाट और सिख जाट आपस में वैवाहिक रिश्ते बनाते हुए झिझकते हैं...बल्कि यह कहना गलत नहीं होगा कि करते ही नहीं हैं...हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के जाटों में आपस में खूब रिश्ते होते हैं, लेकिन पंजाब के जाटों से ना के बराबर ही होते हैं, भले ही वे एक ही शहर में क्यों न रहते हों...पंजाब के जाटों के विवाह होते हैं गुरुद्वारे में या सिख पद्धति से, जबकि बाकी जाटों के होते हैं हिंदू विधि-विधान से...

यु तो फेर हरियाणा वाले जाट आपके प्रदेश वालो से भी रिश्ता करने में हिचकते हैं |
 
Bajwa bhai,,
very recently what we have witnessed in punjab shows the influence of pro-khalistanis, ( the judgement on Balwant Singh ''Rajoana'') . People were openly out on streets and shouting Khalistan slogans too..!!!


in recent election out of 117 seats 49 has won by jat sikh nowhere in any indian state one caste able to won around around 43% of seats and on 7 jat dominated seats .. strong jat candidates lost election to non jats because majority of jat vote for non jat candidates and out of 13 MPs in punjab 6 are jat......there are not more then 2-3% of jat sikh who want Khalistan ...pro Khalistan political parties cant able to get 1% vote share...
 
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