ravinderjeet
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वह हमको अपनी याद मे कुछ इस तरह डुबो गये
चाह थी की उनको पाए ..पर हम खुद ही खो गए
चाह थी की उनको पाए ..पर हम खुद ही खो गए
उसने मिलने की भी अजीब शर्त रख्ही थी.....
सूखे पत्तों पे चल के आओ....कोई आहट भी न हो !!
आज फिर कोई बोत्तल फूटी हेसमय से चुरा के कुछ वक़्त...
चंद पल जिंदगी जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
...
वो सपनो की चादर जो जिंदगी के थपेड़े खा कर फट चुकी है...
नशे में ही सही, उस चादर को सीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
आज फिर कोई बोत्तल फूटी हे
आज फिर किसी की दिलरुबां रूठी हे
सारे दिल अरमानों से रीते हैं
चलो दारु पीते हैं ...............
उसे बता दो अब और इंतज़ार नहीं उसका...
उसके इंतज़ार में ना-जाने कितने दिन, महीने, साल यूँ ही बीते हैं...
चलो दारु पीते हैं.......
जीने की चाहत ना टूटे, उम्मीद का दामन ना छूटे,
कल जैसा भी था गुजर गया, हम तो आज में जीते है ...
चलो दारु पीते हैं.......
खुशियों के दिन फिर लौट आए हैं
एक नई दिलरुबा फिर मिल गई
जिसके लिए अब हम जीते है
चलो दारू पीते है
आज हम गुमनाम ही सही, पर एक दिन हमारी भी कीमत समझी जाएगी...
इसी उम्मीद में जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
इब्ब ताहीं एक भी बोत्तल कोणी दिखी ,
न्यू बताओ, अक कुण्से ने ,कित दारु पीणी सीखी,
मन्ने ते सारयाँ के गिलास देखें रीते हें ,
फेर भी न्यू कहवें ,चलो दारु पीते हैं .........
गिलास हम भरा नही रहण दिया करते
जब ए तो दिखै गिलास सारे रिते
आपकै समझ ना आवै क्योंकि
आप दारू नही पिते
आप तो नूए सूखे जीते हैं
चलो दारू पिते है
इब्ब ताहीं एक भी बोत्तल कोणी दिखी ,
न्यू बताओ, अक कुण्से ने ,कित दारु पीणी सीखी,
मन्ने ते सारयाँ के गिलास देखें रीते हें ,
फेर भी न्यू कहवें ,चलो दारु पीते हैं .........
garmi ghani ho rahi sai.....एसी लिए ये गिलास रीते ह, हम त लोटे म पिते ह
दारू का नहीं ह नामो निशान येहा... हम त बस दारू के सपने सिते ह
चलो आज दूध पीते ह .......
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