Shayri (Part 1)

Status
Not open for further replies.
वह हमको अपनी याद मे कुछ इस तरह डुबो गये
चाह थी की उनको पाए ..पर हम खुद ही खो गए​
 
लम्हा लम्हा तेरा गम मगर सीने की तमन्ना और भी है,

कतरा कतरा ये शराब मगर पीने की तमन्ना और भी है,

वो न मिली तो क्या हुआ, खुदकुशी जायज नहीं,

तनहा तनहा ये जिंदगी मगर जीने की तमन्ना और भी है !!!
 
उसने मिलने की भी अजीब शर्त रख्ही थी.....
सूखे पत्तों पे चल के आओ....कोई आहट भी न हो !!

अब दबे पांव आने की भी अपनी मजबूरी है
आने की आहट से लोगों के कलेजे ना दहल जाये
 
ख्वाब आँखों में पालते रहना
जाल दरिया में डालते रहना

जिंदगी पर किताब लिखनी है
मुझको हैरत में डालते रहना

और कई इन्किशाफ होने हैं
तुम समंदर खंगालते रहना

ख्वाब रख देगा तेरी आँखों में
जिंदगी भर संभालते रहना

तेरा दीदार मेरी मंशा है
उमर भर मुझको टालते रहना

जिंदगी आँख फेर सकती है
आँख में आँख डालते रहना

तेरे अहसान भूल सकता हूँ
आग में तेल डालते रहना

मैं भी तुम पे यकीन कर लूँगा
तुम भी पानी उबालते रहना

इक तरीका है कामयाबी का
खुद में कमियां निकालते रहना

आदिल रशीद

इन्किशाफ =खुलासा
 
"हुस्न" ना मांग "नसीब" मांग...... ऐ दोस्त "हुस्न" वाले अक्सर नसीब" वालों के गुलाम हुआ करतें हैं........
 
आज ये तन्हाई का अहसास कुछ हद से ज्यादा है
तेरे संग ना होने का मलाल कुछ हद से ज्यादा है
फिर भी काट रहे ये जिए जाने की सजा यही सोचकर
शायद इस जिंदगी में मेरे गुनाह कुछ हद से ज्यादा है
 
समय से चुरा के कुछ वक़्त...
चंद पल जिंदगी जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
...

वो सपनो की चादर जो जिंदगी के थपेड़े खा कर फट चुकी है...
नशे में ही सही, उस चादर को सीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
 
समय से चुरा के कुछ वक़्त...
चंद पल जिंदगी जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
...

वो सपनो की चादर जो जिंदगी के थपेड़े खा कर फट चुकी है...
नशे में ही सही, उस चादर को सीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
आज फिर कोई बोत्तल फूटी हे
आज फिर किसी की दिलरुबां रूठी हे
सारे दिल अरमानों से रीते हैं
चलो दारु पीते हैं ...............
 
आज फिर कोई बोत्तल फूटी हे
आज फिर किसी की दिलरुबां रूठी हे
सारे दिल अरमानों से रीते हैं
चलो दारु पीते हैं ...............

उसे बता दो अब और इंतज़ार नहीं उसका...
उसके इंतज़ार में ना-जाने कितने दिन, महीने, साल यूँ ही बीते हैं...
चलो दारु पीते हैं.......
 
रास्ते कहाँ खत्म होते हैं जिंदगी के सफर में

मंजिल तो वही है जहाँ ख्वाईशें थम जाए !!!
 
उसे बता दो अब और इंतज़ार नहीं उसका...
उसके इंतज़ार में ना-जाने कितने दिन, महीने, साल यूँ ही बीते हैं...
चलो दारु पीते हैं.......

जीने की चाहत ना टूटे, उम्मीद का दामन ना छूटे,
कल जैसा भी था गुजर गया, हम तो आज में जीते है ...
चलो दारु पीते हैं.......
 
जीने की चाहत ना टूटे, उम्मीद का दामन ना छूटे,
कल जैसा भी था गुजर गया, हम तो आज में जीते है ...
चलो दारु पीते हैं.......

खुशियों के दिन फिर लौट आए हैं
एक नई दिलरुबा फिर मिल गई
जिसके लिए अब हम जीते है
चलो दारू पीते है
 
खुशियों के दिन फिर लौट आए हैं
एक नई दिलरुबा फिर मिल गई
जिसके लिए अब हम जीते है
चलो दारू पीते है

[h=6]आज हम गुमनाम ही सही, पर एक दिन हमारी भी कीमत समझी जाएगी...
इसी उम्मीद में जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...
[/h]
 
आज हम गुमनाम ही सही, पर एक दिन हमारी भी कीमत समझी जाएगी...
इसी उम्मीद में जीते हैं...
चलो दारु पीते हैं...


इब्ब ताहीं एक भी बोत्तल कोणी दिखी ,
न्यू बताओ, अक कुण्से ने ,कित दारु पीणी सीखी,
मन्ने ते सारयाँ के गिलास देखें रीते हें ,
फेर भी न्यू कहवें ,चलो दारु पीते हैं .........
 
तकदीर बनाने वाले तुने भी हद कर दी
तकदीर मे किसी ओर का नाम लिखा
ओर
दिल मे चाहत एक फरेबी की भर दी
 
इब्ब ताहीं एक भी बोत्तल कोणी दिखी ,
न्यू बताओ, अक कुण्से ने ,कित दारु पीणी सीखी,
मन्ने ते सारयाँ के गिलास देखें रीते हें ,
फेर भी न्यू कहवें ,चलो दारु पीते हैं .........

गिलास हम भरा नही रहण दिया करते
जब ए तो दिखै गिलास सारे रिते
आपकै समझ ना आवै क्योंकि
आप दारू नही पिते
आप तो नूए सूखे जीते हैं
चलो दारू पिते है
 
गिलास हम भरा नही रहण दिया करते
जब ए तो दिखै गिलास सारे रिते
आपकै समझ ना आवै क्योंकि
आप दारू नही पिते
आप तो नूए सूखे जीते हैं
चलो दारू पिते है

पता नहीं लोग बीना पीई कसे जीते ह ...सूना ह येहा त चीते भी पीते ह
चलो आज साचे दारू पीते ह ....
 
इब्ब ताहीं एक भी बोत्तल कोणी दिखी ,
न्यू बताओ, अक कुण्से ने ,कित दारु पीणी सीखी,
मन्ने ते सारयाँ के गिलास देखें रीते हें ,
फेर भी न्यू कहवें ,चलो दारु पीते हैं .........

एसी लिए ये गिलास रीते ह, हम त लोटे म पिते ह
दारू का नहीं ह नामो निशान येहा... हम त बस दारू के सपने सिते ह
चलो आज दूध पीते ह .......
 
एसी लिए ये गिलास रीते ह, हम त लोटे म पिते ह
दारू का नहीं ह नामो निशान येहा... हम त बस दारू के सपने सिते ह
चलो आज दूध पीते ह .......
garmi ghani ho rahi sai.....
chalo Seet piten hain
 
आँखों की कही आँखों तक रहती तो ठीक था ,
दिल तक पहुची तो दर्द का अहसास हुआ !​
 
Status
Not open for further replies.
Back
Top