How you came to know and became a member at Jatland?

How you come to know about Jatland

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Ye 640 "visits" hai Ravinder bhaisaab is taage pe. Jukar aap 2-4 be geda mar ge hoge.. to aapka har bar is taage ko kholna ek visit me count ho jata hai..

Par aa to kayi liye taage pe.. Pannu bhai ne bhi nahi likh li eeb tayi.. ar kaal ka sod si bharen laag rhya se taage ki :cool:

कई भाई अंतर्मुखी होया करें | कच्छा भी लुको के सुखाया करें |
 
पन्नू ने तो न्यू वोट करी स आक हनुमान ने आ के इसकी टांट पे गदा धर दी.... आक के तो ज्वाइन कर एब का एब... एर नहीं तो तेरी मेरी "खटम-पट्टा" ......... पन्नू की तो घिग्गी बधगी... एर एब्ब तईं गेडे मारे स जाटलैंड पे...!!!

फेर तो इससा लाग्गे है , अनिल
की नितिन दहिया की टांट पे भी हनुमान ने गदा धरी होगी
कहा होगा , जाटलैंड बना नहीं तो ------
 
मै अपनी ph.d. का कम जाटों पर करना चाह रही थी, साल भर पहले ऑनलाइन ऐसे ही कुछ साइट देखी उनमे से एक जात लैंड विकि भी मिली।काफी टाइम तक मैंने उससे कुछ लेख पढे , पर चूंकि मैं काफी समय तक इस बात मे कन्फ्युजरही की यह साइट अकैडमिक के कार्यो हेतू प्रयोग मे लायी भी जा सकती है या नही तो मैंने ज्यादा ध्यान नही दिया । मैंने जाट लैंडपे जीमेल से जॉइन करने की रेक़ुएस्ट भेजी पर वो कभी क्लियर नही हुई। क्योंकि उस आइ डी मे मेरा नाम /गोत नही था मैंने भी ज्यादा ध्यान नही दिया।और एसे ठंडे बस्ते मे डाल दिया।ये बात है 2010 की। पर अब कम तो जाटो पर कर रही हूँ, तो जब फिर से लेख ढूँढने शुरू किये,तो फिर से विकि के लेख आयें,फिर कई मुद्दों पर जब सर्च करने लगी तो जाट लैंड फॉरम के डिस्कशन भी सामने आने लगे. फेर लगा अक्क एब त जॉइन कर ही लूँ। अरर जॉइन कर लिया फरवरी 2012 मे । फेर जब टाई एब ताई। किते किते थोड़ा बहुत लिख दूँ हूँ। एबे पढ़न लाग ऋ सू । अरर गेदा रोज का सै । चौपाल एक ऐसा चस्का है जो कई बार घाना टाइम खा जा सै,,
नितिन जी बधाई के पात्र है ,जिन्होने हम इतने लोगों को एक ऐसा प्लैटफ़ार्म दिया जहां लोग आपस मे एक दूसरे को जान सकते है, अपने इतिहास, भाषा,संस्कृति, और आज क समय मे जाटों क सामने जो समस्याए हैं उनपर चर्चा कर सकते हैं,जानकारी ले सकते है,और जाटों क लिए कार्य करने की प्रेरबा ले सकते हैं॥ धन्यवाद नितिन जी और उन सब लोगों को जिनके चलते हम एस परिवार का हिस्सा हैं.
 
" मै अपनी ph.d. का कम जाटों "

Awesome -


मै अपनी ph.d. का कम जाटों पर करना चाह रही थी, साल भर पहले ऑनलाइन ऐसे ही कुछ साइट देखी उनमे से एक जात लैंड विकि भी मिली।काफी टाइम तक मैंने उससे कुछ लेख पढे , पर चूंकि मैं काफी समय तक इस बात मे कन्फ्युजरही की यह साइट अकैडमिक के कार्यो हेतू प्रयोग मे लायी भी जा सकती है या नही तो मैंने ज्यादा ध्यान नही दिया । मैंने जाट लैंडपे जीमेल से जॉइन करने की रेक़ुएस्ट भेजी पर वो कभी क्लियर नही हुई। क्योंकि उस आइ डी मे मेरा नाम /गोत नही था मैंने भी ज्यादा ध्यान नही दिया।और एसे ठंडे बस्ते मे डाल दिया।ये बात है 2010 की। पर अब कम तो जाटो पर कर रही हूँ, तो जब फिर से लेख ढूँढने शुरू किये,तो फिर से विकि के लेख आयें,फिर कई मुद्दों पर जब सर्च करने लगी तो जाट लैंड फॉरम के डिस्कशन भी सामने आने लगे. फेर लगा अक्क एब त जॉइन कर ही लूँ। अरर जॉइन कर लिया फरवरी 2012 मे । फेर जब टाई एब ताई। किते किते थोड़ा बहुत लिख दूँ हूँ। एबे पढ़न लाग ऋ सू । अरर गेदा रोज का सै । चौपाल एक ऐसा चस्का है जो कई बार घाना टाइम खा जा सै,,
नितिन जी बधाई के पात्र है ,जिन्होने हम इतने लोगों को एक ऐसा प्लैटफ़ार्म दिया जहां लोग आपस मे एक दूसरे को जान सकते है, अपने इतिहास, भाषा,संस्कृति, और आज क समय मे जाटों क सामने जो समस्याए हैं उनपर चर्चा कर सकते हैं,जानकारी ले सकते है,और जाटों क लिए कार्य करने की प्रेरबा ले सकते हैं॥ धन्यवाद नितिन जी और उन सब लोगों को जिनके चलते हम एस परिवार का हिस्सा हैं.
 
My cousin told me about this site in 2006 and I used to check it once or twice in a week. Later on in 2008, when I came to US for an onsite assignment, I became a member and started visiting regularly. It used to and still make me feel like at home, forcing me to visit everyday.
The homepage truly states - The Online home of the Jats-----
 
एक दिन मैं गाँव के बारे में कुछ जानकारी लेने के लिए गूगल सर्च कर रहा था और जाटलैंड पर लैंड हो गया | फिर कुछ दिन पढता रहा और चिपक गया .......आज तक |
 
एक दिन मैं गाँव के बारे में कुछ जानकारी लेने के लिए गूगल सर्च कर रहा था और जाटलैंड पर लैंड हो गया | फिर कुछ दिन पढता रहा और चिपक गया .......आज तक |


राणा जी , भोत समूथ लेंडिंग थी आपकी !!!!! चोखा बंदर की गदा के डर तें ना आये आप |
 
राणा जी , भोत समूथ लेंडिंग थी आपकी !!!!! चोखा बंदर की गदा के डर तें ना आये आप |

भाई जी लैंडिंग त बिना हच्कोला लाग्गे होगी थी पर डामर कसूता चढ़ा रक्ख्या था पट्टी पै | उस टैम पै उस मैडम ने गद्दर
सा फला राख्या था , ब्रेक लाई अर म्हारे टायर भी धसगे |
 
Dear Sir ,

I have no clue what you meant .
However PhD that too on subject like this deserves a lot of hard work and knowledge - fact finding n all that .

So I was complementing her for the good choice she has made .

जट्टू में इह का मतबल "मुंह बाणा" हो स के ??
 
Dear Sir ,

I have no clue what you meant .
However PhD that too on subject like this deserves a lot of hard work and knowledge - fact finding n all that .

So I was complementing her for the good choice she has made .

There is nothing 'awesome' in doing Ph.D.

Special use of word 'awesome' to convey compliment! or does it convey sense of surprise and shock!!
 
मै अपनी ph.d. का कम जाटों पर करना चाह रही थी, साल भर पहले ऑनलाइन ऐसे ही कुछ साइट देखी उनमे से एक जात लैंड विकि भी मिली।काफी टाइम तक मैंने उससे कुछ लेख पढे , पर चूंकि मैं काफी समय तक इस बात मे कन्फ्युजरही की यह साइट अकैडमिक के कार्यो हेतू प्रयोग मे लायी भी जा सकती है या नही तो मैंने ज्यादा ध्यान नही दिया । मैंने जाट लैंडपे जीमेल से जॉइन करने की रेक़ुएस्ट भेजी पर वो कभी क्लियर नही हुई। क्योंकि उस आइ डी मे मेरा नाम /गोत नही था मैंने भी ज्यादा ध्यान नही दिया।और एसे ठंडे बस्ते मे डाल दिया।ये बात है 2010 की। पर अब कम तो जाटो पर कर रही हूँ, तो जब फिर से लेख ढूँढने शुरू किये,तो फिर से विकि के लेख आयें,फिर कई मुद्दों पर जब सर्च करने लगी तो जाट लैंड फॉरम के डिस्कशन भी सामने आने लगे. फेर लगा अक्क एब त जॉइन कर ही लूँ। अरर जॉइन कर लिया फरवरी 2012 मे । फेर जब टाई एब ताई। किते किते थोड़ा बहुत लिख दूँ हूँ। एबे पढ़न लाग ऋ सू । अरर गेदा रोज का सै । चौपाल एक ऐसा चस्का है जो कई बार घाना टाइम खा जा सै,,
नितिन जी बधाई के पात्र है ,जिन्होने हम इतने लोगों को एक ऐसा प्लैटफ़ार्म दिया जहां लोग आपस मे एक दूसरे को जान सकते है, अपने इतिहास, भाषा,संस्कृति, और आज क समय मे जाटों क सामने जो समस्याए हैं उनपर चर्चा कर सकते हैं,जानकारी ले सकते है,और जाटों क लिए कार्य करने की प्रेरबा ले सकते हैं॥ धन्यवाद नितिन जी और उन सब लोगों को जिनके चलते हम एस परिवार का हिस्सा हैं.

Aap ko bahut badhai ho kee aap Jaton par apna sodh karya kar rahin hain. Ph. D. ke liya chune gaye topic mein Jaton ke baare mein niradhar falai gayi bharantiyon ko aap dur karane ke liya avashayak samagri ikathi karen aur dat kar reference/data prastut karein, yah aap ka Jats ke prati sacha yogdan hoga.

Aap ke prayas aur yogdaan kee saphalata ke liye hum saravashaktishali prabhu se prarthana karate hein.

Puri mehanat aur lagan se jut jane pe saphalata nishchit hai, Subhashish!
 
Kya bat karte hai sir

PhD is a way to big deal------needs to much hard work n all

n subjects like the one she has chosen quite tough

so for me it is Awesome-----for rest they may have their own opinion



There is nothing 'awesome' in doing Ph.D.

Special use of word 'awesome' to convey compliment! or does it convey sense of surprise and shock!!
 
There is nothing 'awesome' in doing Ph.D.

Special use of word 'awesome' to convey compliment! or does it convey sense of surprise and shock!!

Sir Ji, don't you think that it's time that somebody grows up ! I'm sure JL has an award for the most prolific and active member ever!
 
There is nothing 'awesome' in doing Ph.D.

Special use of word 'awesome' to convey compliment! or does it convey sense of surprise and shock!!

rajpal ji, Doing Ph.D. may be awesome or not awesome,(i think, everyone thinks its awesome except you),but your emphasis on word awesome is not that awesome here.
 
There is nothing 'awesome' in doing Ph.D.

Special use of word 'awesome' to convey compliment! or does it convey sense of surprise and shock!!

के बात कर रहे हो सरजी.. आप भी ते पि एच डी ऐ कर रहे होगे जिबे तो डॉकटर लिखो सो.. पि एच डी करण आल्या धोरे ते घर का पोच्चा तक मरवा ले से उनके गाईड!! किस्मत आले होया करे जिन-ने गाईड बढ़िया मिल ज्या... नहीं तो घर का सारा काम कारन ताई फ्री का नौकर होया करे कई गाईडा खातिर तो | घर की साग-सब्जी मन्गावंगे, बालक लाने छोड़ के आने स्कुल में, आप बाहर चले जांगे आर पाछे ते बालक सम्भालन ने दे जावेंगे, पेपर चेक करवावेंगे| बड़ी मेहनत है २-३ साल की | और नहीं तो पि एच डी करण आले की मेहनत खातिर तो "ओस्म" कहना बने से| आंख्या देखि बताऊ हु कदे न्यू मानो अक फ्री का थूक बिलोऊ हू|

आर इस तागे पे न्यू बताणी से अक जाटलैंड के दर्शन क्यूकर होए पहली बार.. तो वो बताओ अगर बताना चाहो तो| इन बाता खातिर नया तागा खोल लेवांगे| :)
 
के बात कर रहे हो सरजी.. आप भी ते पि एच डी ऐ कर रहे होगे जिबे तो डॉकटर लिखो सो.. पि एच डी करण आल्या धोरे ते घर का पोच्चा तक मरवा ले से उनके गाईड!! किस्मत आले होया करे जिन-ने गाईड बढ़िया मिल ज्या... नहीं तो घर का सारा काम कारन ताई फ्री का नौकर होया करे कई गाईडा खातिर तो | घर की साग-सब्जी मन्गावंगे, बालक लाने छोड़ के आने स्कुल में, आप बाहर चले जांगे आर पाछे ते बालक सम्भालन ने दे जावेंगे, पेपर चेक करवावेंगे| बड़ी मेहनत है २-३ साल की | और नहीं तो पि एच डी करण आले की मेहनत खातिर तो "ओस्म" कहना बने से| आंख्या देखि बताऊ हु कदे न्यू मानो अक फ्री का थूक बिलोऊ हू| ......| :)

Likya to aapne ''Ankhayan Dekhi se'' per aapke ghoose ke tewar dekhte huye to khud bhukat bhogi lagate ho, kis kasai se para pala !
 
Likya to aapne ''Ankhayan Dekhi se'' per aapke ghoose ke tewar dekhte huye to khud bhukat bhogi lagate ho, kis kasai se para pala !


ha ha ha.. Na Dr saab na... hum to average se balak the..laag-lipat ke graduation kar rhe hai.. humne kun PhD karen de tha.. ar isi PhD te to hum graduate ae bhale. 2 tem ki roti sukh te khaawe se. :)

Har hakeekat ka ye matlab nahi hota ki wo khud par hi beeti ho.. kuch cheeje dusro ko dekh bhi pata lag jati hai.. :)

ar is taage ki rail ne kheta me mat baado eeb.. kuch related likhna hai to wo batao.. :)
 
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