मै अपनी ph.d. का कम जाटों पर करना चाह रही थी, साल भर पहले ऑनलाइन ऐसे ही कुछ साइट देखी उनमे से एक जात लैंड विकि भी मिली।काफी टाइम तक मैंने उससे कुछ लेख पढे , पर चूंकि मैं काफी समय तक इस बात मे कन्फ्युजरही की यह साइट अकैडमिक के कार्यो हेतू प्रयोग मे लायी भी जा सकती है या नही तो मैंने ज्यादा ध्यान नही दिया । मैंने जाट लैंडपे जीमेल से जॉइन करने की रेक़ुएस्ट भेजी पर वो कभी क्लियर नही हुई। क्योंकि उस आइ डी मे मेरा नाम /गोत नही था मैंने भी ज्यादा ध्यान नही दिया।और एसे ठंडे बस्ते मे डाल दिया।ये बात है 2010 की। पर अब कम तो जाटो पर कर रही हूँ, तो जब फिर से लेख ढूँढने शुरू किये,तो फिर से विकि के लेख आयें,फिर कई मुद्दों पर जब सर्च करने लगी तो जाट लैंड फॉरम के डिस्कशन भी सामने आने लगे. फेर लगा अक्क एब त जॉइन कर ही लूँ। अरर जॉइन कर लिया फरवरी 2012 मे । फेर जब टाई एब ताई। किते किते थोड़ा बहुत लिख दूँ हूँ। एबे पढ़न लाग ऋ सू । अरर गेदा रोज का सै । चौपाल एक ऐसा चस्का है जो कई बार घाना टाइम खा जा सै,,
नितिन जी बधाई के पात्र है ,जिन्होने हम इतने लोगों को एक ऐसा प्लैटफ़ार्म दिया जहां लोग आपस मे एक दूसरे को जान सकते है, अपने इतिहास, भाषा,संस्कृति, और आज क समय मे जाटों क सामने जो समस्याए हैं उनपर चर्चा कर सकते हैं,जानकारी ले सकते है,और जाटों क लिए कार्य करने की प्रेरबा ले सकते हैं॥ धन्यवाद नितिन जी और उन सब लोगों को जिनके चलते हम एस परिवार का हिस्सा हैं.