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नेज्जे की कलम स्याही में भे कै तकती पै लिक्खण का न्यारा ए मजा था। नेज्जे की कलम तैं लिक्खण तैं लिखाई इसी सुथरी आया करती ज्युकर प्रिंटिग प्रैस में छप्या ओड़ पोस्टर! मास्टर न्यूं कहया करते अक जिसने आपना लेख (handwriting) सुधारना सै वे तकती पै प्रैक्टिस करैं! तकती पै सुलेख लिखण के न्यारे नम्बर दे दिया करते मास्टर। जिस हरफ (शब्द) की spelling बाळक गलत लिखते, उन ताहीं या-ए सजा थी अक उसनै तकती पै 15-20 बै लिख कै दिखाओ।
आजकल तै पहली क्लास में ऐं बाळकां ताहीं कापी अर पैंसिल/बाल-पैन पकड़ा दें सैं, फिर उनका सुलेख क्यूकर आच्छ्या बणै?
एक बात और - तकती की पुताई 'मुलतानी' माटी तैं करणी पड़्या करती। सारे बाळक आपणे झोळे (school bag) में मुलतानी की टिक्की भी राख्या करते - कई तै उसनै खाया भी करते!
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aur us time master pen na rakha karte ek PENCIL rakha karte.........uste takhtii ne check kara karte............