Interesting debate on politics and Khaps

आप की इज़्ज़त करना हमारा फ़र्ज़ है और मैं आपसे सवाल करना चाहता नही पर आप मुझे एक पोस्ट दिखा दे जहाँ किसी अमेरिका वाले ने खाप की बुराई की हो, शायद आप के पढ़ने में फ़र्क़ रह गया या मेरे कहने मैं. आप मुझे वो पोस्ट दिखा देंगे तो मैं एक बार फिर से उसे और सरल तरीके से रख दूँगा



अर अमरीका में नौकरी कर कै के करोगे? इस NDTV (Nehru Dynasty TV) में नौकरी कर ल्यो अर खाप नै खूब गाळ दो। NDTV आळे अमरीका तैं भी घणी तनखा दे देंगे।

.
 
आप की इज़्ज़त करना हमारा फ़र्ज़ है और मैं आपसे सवाल करना चाहता नही पर आप मुझे एक पोस्ट दिखा दे जहाँ किसी अमेरिका वाले ने खाप की बुराई की हो, शायद आप के पढ़ने में फ़र्क़ रह गया या मेरे कहने मैं. आप मुझे वो पोस्ट दिखा देंगे तो मैं एक बार फिर से उसे और सरल तरीके से रख दूँगा

विकास, मेरा इशारा किसी जाटलैंडर की तरफ नहीं, बरखा दत्त की तरफ है जो NDTV से जुड़ी है और Columbia University में पढ़ी है। खाप ही क्या, बहुत से मुद्दों पर बोलती है। इसकी तरह और भी कई journalist हैं जो विदेश में पढ़े और भारतीय चैनलों में काम कर रहे हैं - इनको देश और समाज के बारे में कुछ पता नहीं, बस झूठी, सनसनीखेज खबरें फैला कर अपने चैनल का प्रसारण करना ही इनका काम है।

सबको पता है यह NDTV क्या बला है। पाकिस्तान में सारे भारतीय चैनल ban हैं, सिर्फ NDTV को लाइसेंस मिला हुआ है। ये किसी खाप के छोटे से बयान को भी तरोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, बदनाम करने के लिए।

.
 
ठीक कही देसवाल जी, मेरे समझने का फरक रहा. माफ़ करना. और आप से पूर्ण रूप से सहमत हू मीडीया के रुख़ को लेकर खापो के बारे मैं. काश कोई जाट इतना पढ़ गया होता की मीडीया में एक साची रिपोर्ट दे सकता.

विकास, मेरा इशारा किसी जाटलैंडर की तरफ नहीं, बरखा दत्त की तरफ है जो NDTV से जुड़ी है और Columbia University में पढ़ी है। खाप ही क्या, बहुत से मुद्दों पर बोलती है। इसकी तरह और भी कई journalist हैं जो विदेश में पढ़े और भारतीय चैनलों में काम कर रहे हैं - इनको देश और समाज के बारे में कुछ पता नहीं, बस झूठी, सनसनीखेज खबरें फैला कर अपने चैनल का प्रसारण करना ही इनका काम है।

सबको पता है यह NDTV क्या बला है। पाकिस्तान में सारे भारतीय चैनल ban हैं, सिर्फ NDTV को लाइसेंस मिला हुआ है। ये किसी खाप के छोटे से बयान को भी तरोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, बदनाम करने के लिए।

.
 
ठीक कही देसवाल जी, मेरे समझने का फरक रहा. माफ़ करना. और आप से पूर्ण रूप से सहमत हू मीडीया के रुख़ को लेकर खापो के बारे मैं. काश कोई जाट इतना पढ़ गया होता की मीडीया में एक साची रिपोर्ट दे सकता.
pade likhe to bhoot h lakin koi media agar jankar assi harkat kare to koi kya kare. vinod dua jato k kilaf hamesha jahar uglata h.ye pakistani panje na lagan dere.
 
कृपया अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ यशपाल मलिक ने कैसे आजतक की एंकर को खाप की चर्चा के उपर लताड़ा जरा देखे । पूरा मीडिया खाप के खिलाफ उतरा हुआ है link through facebook page https://www.facebook.com/JatArakshanSangharshSamiti
[video]http://aajtak.intoday.in/videosection.php/videos/karyakramsubsec/710123/1/402/Minors-marriage-may-stop-rape-incidents.html[/video]
 
इस देश की आधी जनता जाटों से और हरयाणा से चिढ़ती है...हरयाणवी को देखकर और खासकर जाट को देखकर आधे लोग फुक ज्या से माह ऐ माह और इन लोगों में मीडिया और ये मेरी सासु के सारे बिहारी अर्र बंगाली पत्रकार भी शामिल हैं..इन लोगों का कोई वजूद और इज्ज़त नहीं होती..इन से अगर ये भी पूछे की तुम कहा से हो तीन चार जगह का नाम बतावेंगे ये,क्योंकि ये खानाबदोश परिवारों से हैं ..reservation का फायदा ठाके ये आज ऊँची पोस्ट पे जाके हमारी टांग खीच रहे हैं..इनका केवल एक इरादा होता है पैसा कमाना और उसके लिए ये अपनी बहन बेटियों के बारे मैं भी कुछ भी लिख सकते हैं, ये कॉल सेंटर और इस न्यूज़ चैनल पर ते जाके रात ने के रास राचावे से यो सबने पता से , हमारा जाट समाज और उसकी लड़कियां तो भोत शरीफ हैं..
जाट समाज defencelessहोता जा रहा है और उसका एक कारण है की हम अपने आपको एक दायरे में संकुचित कर दिया है...एक दो तीन ऐसे profession है जो सुरु से हमारे favouriteरहे हैं और उन के अलावा हम सोचते है नहीं..
अगर आज के दिन हर field में हमारे representative होते तो इनको मुह तोड़ जवाब दे सकते थे..
मैं बहुत पहले भी ये बात छेड़ चूका हुईं की जाट समाज में बहुत जयादा reforms की जरूरत है, अब केवल police , फ़ौज या teacher होने से काम नहीं चलेगा नहीं तो ये गीदड़ हमें नोच नोच कर खा जायेंगे..
हम टाइम है की बाज़ की तरह पंख फैलाए जाये, हम जब तक हर field में धाक नहीं जमायेंगे तब तक हमारे साथ ऐसा ही होता रहेगा..अब समय ऐसा आ गया है की कई लोग अपने आप को जाट बताने से कतराने लगे हैं, कारण इस चीज़ का कुछ भी हो लेकिन परिणाम बड़ा ख़राब होगा..अगर हरयाणा और जाटों का नाम ऐसे ही बदनाम होता रहा तो हमारा वजूद हम खुद ही मिटा देंगे...
जाट महासभा और खाप पंचायतो को ये उल जोलूल कमेन्ट करने की बजाये अपने status को सुधारना चाहिए...बच्चो की जल्दी शादी के बजाये उनको प्रोपर education और संस्कार देना चाहिए..गरीब जाट बच्चो की आर्थिक सहायता और young जाट स्टुडेंट्स की career counselling होनी चाहिए...पंजाबियों से कुछ सीखना चाहिए..अगर आज यही बदनामी अगर सिखों की होती तो ये लोग इतने powerful हैं की इनका चैनल बंद करवा देते...पैर हमारे साथ उल्टा होता जा रहा है, खाप के परधानो को बुला कर ये सारे आम सब के समें टी.व् पैर कुछ भी बोल देते हैं..एक समय था जब जाट जो कोई उंगली नहीं दिखा सकता था लेकिन हमने खुद गड्ढे खोद लिए .


समय के अनुकूल अपने समाज में हमने परिवरतन नहीं करना हमारी सबसे बड़ी भूल है और ये भूल हम अब भी कर रहे हैं..कुछ रूढ़िवादी सोच और परम्परावों के कारण हम आज भी जी रहे हैं..ये सभी चीज़े हमें आगे बढ़ने से रोक रही हैं..
 
..............................
 
Last edited by a moderator:
, खाप के परधानो को बुला कर ये सारे आम सब के समें टी.व् पैर कुछ भी बोल देते है..
dr ji khap pardhan hotey hi nahi h....ye bhi media hi banati h........apne gaon m verfiy kar lena.
 
Just curious then---every group has some representative. So agar Khap ka koi pardhan nahi hai---toh who represent that group .

Sir ji----I have no clue about this , so just a curious question .

Toh kya TV or news mei kaun aata hai---khap ko respesent karne-----aise hi jo koi free hota hai


dr ji khap pardhan hotey hi nahi h....ye bhi media hi banati h........apne gaon m verfiy kar lena.
 
Just curious then---every group has some representative. So agar Khap ka koi pardhan nahi hai---toh who represent that group .

Sir ji----I have no clue about this , so just a curious question .

Toh kya TV or news mei kaun aata hai---khap ko respesent karne-----aise hi jo koi free hota hai
sahi puccha h app ne.......khap ki apne tor tarike hote h. kisse bhi issue kay arise hone par sare jat samaj ko invite kiya jata h(jisko chhite padana kahte h)na ki self
declered pardanoo ko bulaya jata h.or uss particular issue par kisi ek respectable choudary ko pardhan banya jata h proper functioning k liye uss issue per. t v per anne vale bhi khap panchyato ka hissa bhar hote h.
 
Last edited by a moderator:
dr ji khap pardhan hotey hi nahi h....ye bhi media hi banati h........apne gaon m verfiy kar lena.
इस फैसले मे सभी खापे शामिल नहीं थी इसमे खापों की तरफ से सिर्फ महम चौबीसी के चौधरी रणधीर सिंह थे बाकी के सब स्वयंभू खाप प्रधान थे व सभी एक ही राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं , और आज चौधरी रणधीर सिंह ने भी इस फैसले से किनारा कर लिया | जहा तक़ मेरी सोच हैं तो असल मे इस फैसले के पीछे सोच कुछ और थी जो की पूरी नहीं हो पाई , इस फैसले मे कांग्रेस राज की तुलना मुग़ल काल से करने की थी पर मीडिया ने इनके कम उम्र वाले फैसले को पकड़ लिया | इसी कारण आज चौटाला को भी अपना ब्यान वापिस लेना पड़ा

than who is this mr.randhir? as far as i know every khap has pradhan..
 
इस फैसले मे सभी खापे शामिल नहीं थी इसमे खापों की तरफ से सिर्फ महम चौबीसी के चौधरी रणधीर सिंह थे बाकी के सब स्वयंभू खाप प्रधान थे व सभी एक ही राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं , और आज चौधरी रणधीर सिंह ने भी इस फैसले से किनारा कर लिया | जहा तक़ मेरी सोच हैं तो असल मे इस फैसले के पीछे सोच कुछ और थी जो की पूरी नहीं हो पाई , इस फैसले मे कांग्रेस राज की तुलना मुग़ल काल से करने की थी पर मीडिया ने इनके कम उम्र वाले फैसले को पकड़ लिया | इसी कारण आज चौटाला को भी अपना ब्यान वापिस लेना पड़ा

than who is this mr.randhir? as far as i know every khap has pradhan..
agar hum particular maham chobissi ki baat kare to iss khap may rajniti kuch jayda chalti h..........alag alag party vale apne rajnitik fyde kay hissab se apne pardhan
bana lete h. famous maham kand may anand dangi ch. ramsaroop ko khap pardhan mante they or choutala group ka khap pardhan dussra hota tha.last election may
ek indipendent candidate kisi or ko khap pardhan kahte the. ye inh pardhano ko apne poltical fayde kay liye use karte h.ch.randhir singh pro inld h.ho sakta h kisi
social issue jisme rajniti involve na rahi ho unko pardhan banaya ho uss particular issue kiey liye. lakin iss ka ye matlab nahi h ki maham khap ki panchyat hue bina wo iss issue
per khap ki rai kahe. haa wo apni niji rai kah sakte h .
 
इस फैसले मे सभी खापे शामिल नहीं थी इसमे खापों की तरफ से सिर्फ महम चौबीसी के चौधरी रणधीर सिंह थे बाकी के सब स्वयंभू खाप प्रधान थे व सभी एक ही राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं , और आज चौधरी रणधीर सिंह ने भी इस फैसले से किनारा कर लिया | जहा तक़ मेरी सोच हैं तो असल मे इस फैसले के पीछे सोच कुछ और थी जो की पूरी नहीं हो पाई , इस फैसले मे कांग्रेस राज की तुलना मुग़ल काल से करने की थी पर मीडिया ने इनके कम उम्र वाले फैसले को पकड़ लिया | इसी कारण आज चौटाला को भी अपना ब्यान वापिस लेना पड़ा

than who is this mr.randhir? as far as i know every khap has pradhan..

Read The Tribune, dated 14th October, 2012 p. 4 for another Khap Mahapancayat meeing at Sonepat on the Girl's Age of Marriage issue. Issue postponed for another bigger Khap Mahapancyat meeting in future. or log in www.tribuneindia.com
 
Read The Tribune, dated 14th October, 2012 p. 4 for another Khap Mahapancayat meeing at Sonepat on the Girl's Age of Marriage issue. Issue postponed for another bigger Khap Mahapancyat meeting in future. or log in www.tribuneindia.com
Aaj ndtv kay hum log programme may ek nai khap bani h duhan khap jiska pardhan bhi le aye kisi manoj duhan ko.....apki iss detail kay hissab se ya samain khap bhi
kuch aise hi h.............jiska sube singh pardhaan h.
 
Aaj ndtv kay hum log programme may ek nai khap bani h duhan khap jiska pardhan bhi le aye kisi manoj duhan ko.....apki iss detail kay hissab se ya samain khap bhi
kuch aise hi h.............jiska sube singh pardhaan h.

Friend, You are free to draw your own conclusion as I am not aware about the event you have referred to in your post.


Thanks
 
An abstract from my article "Talibani Kaun", I hope it would answer the desire:

खापों पे राजनितिक होने का रंग चढाने वाले या इनको अपनी जूतियाँ चमकाने वाला कहने वाले, मेरे इन सवालों का जवाब दें:

  1. क्या किसी खाप को देखा है कि इन्होनें सामाजिक सभा करके कभी अपने अनुयायिओं को ये कहा हो कि आप इस या उस पार्टी को वोट दीजिये?
  2. क्या कभी किसी खाप को देखा है किसी राजनेता की चुनावी सभा में मंच साझा करते हुए या उनके मंच से राजनीति पे बोलते हुए?
  3. खापों के कितने सामाजिक नेता MLA या MP हैं? आज तक मैंने तो एक भी नहीं सुना और वो भी बावजूद इसके कि इनको हर चुनाव के वक्त लगभग हर राजनीतिक पार्टी टिकट देने की पेशकस करती है| जिसमें सबसे बड़ा उदाहरण भारत की सबसे बड़ी गठ्वाला खाप के प्रधान दादा बलजीत सिंह मलिक हैं, जिनको कि हर चुनाव में इस या उस पार्टी से ऐसी पेशकस आती रहती हैं| लेकिन उन्होंने हर बार यह कहते हुए इन प्रस्तावों को नाकारा है कि मैं सामाजिक नुमाईन्दा हूँ सो मुझे समाज पे काम करना है| वर्ना इनपे ये तोहमतें लगाने वाले ये भी जानते होंगे कि सोनीपत में अकेली गठ्वाला खाप की इतनी वोट हैं कि इनको घर बैठे-बिठाए MP बना दें और ऐसे ही मेरठ और सहारनपुर में हैं| और यही कहानी इनके प्रभाव वाले अन्य जिलों की है|
  4. अपनी इतनी बड़ी उपस्थिति होने पर भी खापों ने कभी इस ताकत का गलत प्रयोग नहीं किया, वरना जैसी MNS या Shiv Sena मुंबई में खड़ी हैं, ऐसी तो एक-एक खाप खड़ी कर सकती है| इन्होने तो कभी नहीं किसी दुसरे राज्य के भाई को क्षेत्रवाद पे बांटा या बाँट के राजनीति की? जबकि मुंबई से कहीं ज्यादा दूसरे राज्यों के भाई-बहन, इन खापों के प्रभाव क्षेत्रों में आ के रोजी-रोटी कमाते हैं और यहीं बसते भी हैं| फिर इनपे कोई कैसे राजनितिक होने का इल्जाम लगा सकता है?
बजाय सामाजिक मुद्दों को सार्वजनिक देखने के, सिर्फ एक व्यक्ति के बयान को ले के पूरी सामाजिक संस्था और विचारधारा विशेष को कटघरे में खींचनें वाले, जवाब देना चाहेंगे इसपे? जिसको देखो खापों के पीछे पड़ा है, सामने आती बिल्ली को देख जैसे कबूतर आँखे मूँद लेता है सब ऐसे आँखे मूँद बैठे हैं| खापों जैसी विचारधारा में सकरात्मक क्या है इसपे किसी का ध्यान नहीं|
  1. खापें वो हैं जो धरती माँ की तरह विशाल हैं| जो खेतों में काम करके तुम्हारा पेट पालती आई हैं, तन ढंकती आई हैं| और आज भी इस जिम्मेदारी को सबसे आगे खड़ी हो बड़ी सिद्दत से निभा रही हैं|

    जबकि वो जातियां जिनको कि आज से तीस साल पहले डेड़-दो एकड़ जमीन सरकार ने खेती कर किसान बनने को दी थी वो सब उन्हीं जमीनों को बेच मैदान छोड़ भाग चुके हैं? क्या कोई मीडिया जा के देखेगा कि उस बंदर-बाँट का क्या हुआ?
  2. और स्वाभिमानी इतनी कि अपनी सुरक्षा के लिए किसी गरीब-लाचार की तरह किसी राजा का मुंह नहीं ताका बल्कि अपनी खुद कि सेनायें बना के रखी और उल्टा ऐसे राजाओं को गद्दियों से उतार फेंका जिन्होंने नपुंसकता या कार्यहीनता दिखाई| चाहे वो राजा फिर इन्ही की जाति या वंश के क्यों ना हुए|
  3. विधवा विवाह को सबसे पहले इन्होने अपनाया|
  4. कभी सुना है कि फलां हिन्दू राजा के पास सेना में महिला टुकड़ियाँ होती थी? जबकि हिन्दू खापों की सेना में बाकायदा महिला टुकड़ियाँ होती थी|
  5. उत्तर भारत के दिल्ली के चारों ओर के 300 किलोमीटर की रेडियस में हर 10 कोष पे खंडहर की हालत में जा चुके जितने भी गुरुकुल दीखते हैं वो सब इन्ही के खड़े किये हुए हैं|
  6. इनकी एक-एक सेना में इतने सैनिक होते थे कि उस वक्त की सिखों की सेना जितनी तो इनकी एक-एक खाप की सेना होती थी और बावजूद उसके भी कभी किसी खाप सेना के नायक ने अपने आपको गुरु या भगवान् नहीं कहलवाया और ना ही कहलवाना कभी स्वीकारा, जैसे कि दूसरे धर्मों में हैं| ये चाहते तो अपना गुणगान बड़े-बड़े अक्षरों में करवा सकते थे, पर धरती के सच्चे पूतों ने धरती से बड़ा कुछ नहीं माना| कभी अपने लिए मंदिर-गुरुद्वारे नहीं बनवाये, बनवाये तो केवल शिक्षण संस्थान, कन्या गुरुकुल और वो भी सभी जातियों के लिए| और जैसा कि लेख के प्रथम पहरे में भी कहा, इसीलिए यह एक विचारधारा कहलाई, संस्था या संगठन नहीं|
  7. इनपे दलित विरोधी होने वालों से ये पूछना चाहता हूँ कि वो यह क्यों भूल जाते हैं कि इनकी सेनाओं में हर दलित जाति के भी सैनिक होते थे और सिर्फ इतना ही नहीं उन सैनिको को पालने का, प्रोत्साहित करने का जिम्मा भी इनका खुद का था| फिर चाहे वो उनके खाने-पीने का ख्याल रखने का रहा हो या उनकी सेहत का, सब ये खाप वाले लोग अपने खर्च पे उठाते थे| क्या सुना है कभी किसी राजा-रजवाड़े की सेना में दलित सैनिक थे? पर इन खापों की सेना में थे| और मेरे गाँव का प्राचीन काल का "निडाना प्रोटेक्सन फोर्स - पहलवान दस्ता" का दस्ता इसका सबसे बड़ा उदहारण है|
  8. समाज में खापों की उपयोगिता पे सवाल उठाने वाले, यहाँ पढ़ें: खापों के समय-समय पर समाज हित में लिए जाते रहे फैसले और यहाँ पढ़ें और यहाँ पढ़ें और यहाँ पढ़ें
  9. खापों की बातों से करंट खाने वाले, खापों के उन प्रस्तावों को भी देखो जिनमें वो हर साल समाज हित में "दहेज़ ना लो ना दो", "ब्याह-शादियों में खर्चे कम करो" जैसे सुझाव समाज के समक्ष रखते रहते हैं? अगर इनकी बातों का समाज और मीडिया पे इतना ही प्रभाव पड़ता है तो अब तक तो देश-समाज से ये दहेज़ और दिखावे के दानव खत्म हो जाने चाहिए थे, नहीं? वो इसलिए नहीं क्योंकि इनकी इन सकारात्मकताओं पर इतना गंभीर हो के कोई बोलता ही नहीं कि इनकी यह विचारधारा समाज में जन-जन तक पहुंचे|
  10. ये वही खापों के लोग थे जिनकी सिरसा से ले दिल्ली तक की पट्टी पे 1947 के भारत विभाजन के वक्त सबसे ज्यादा पाकिस्तानी पंजाबी भाई आके बसे थे| इतने तो खुद आज के दिन पंजाब कहलवाने राज्य में भी नहीं बसाए गए, जितने इन खापों के हरियाणा के हर गाँव और शहर में बसाए गए और इन लोगों ने इनको तहे दिल से गले लगा इनका स्वागत किया था? चाहे तो आज की युवा पीढ़ी पूछ सकती है अपने बुजुर्गों से कि कैसे खाप की जनता ने उनकी यहाँ बसने में मदद की थी|

अगर खापें असवेंधानिक हैं तो कौनसा सामाजिक संगठन, संस्था या धर्म भारतीय कानूनी विधान से सवेंधानिक मान्यता प्राप्त है?
 
Last edited:
phool kumar ji ...............ye gathwala khap kis area may h or iss khap kay kitne gaon or tappe h?
 
Back
Top