Shayri (Continued)

अपना हमसफ़र बना ले मुझे,
तेरा ही साया हूँ अपना ले मुझे,
ये रात का सफ़र और भी हसीं हो जायेगा,
तू आजा मेरे सपनो में या बुला ले मुझे !!
 
@ Ravinderjeet,

Mamma ke gyaan, sab raaji khushi...!!!!

dikkhe kise ne ghana yaad kar rahe so.... lagataar non stop 31 post aa li shaayri pe....:very_drunk:

Katal dhaa rahi ho aaj to shayari se..... hats off to you !!!!!
 
Last edited:
@ Ravinderjeet,

Mamma ke gyaan, sab raaji khushi...!!!!

dikkhe kise ne ghana yaad kar rahe so.... lagataar non stop 31 post aa li shaayri pe....:very_drunk:

Katal dhaa rahi ho aaj to shayari se..... hats off to you !!!!!


@ bhaanje

bas yun hi kisi ko yaad kar liyaa karte hein.
usse bhool jaane ke paap se darte hein.
 
होती है लाख गमो की दवा नींद भी मगर ,
होते हैं ऐसे गम भी जो सोने नहीं देते!!!!
 
तेरा घर रौशनी से भरने का वादा निभाऊंगा,
सितारों की खुशामद मत करो मैं दिल जलाऊंगा!
 
आज फिर उनका सामना होगा,
क्या पता उसके बाद क्या होगा

आसमान रो रहा है दो दिन से,
आप ने कुछ कहा सुना होगा

दो कदम पर सही तेरा कूंचा
ये भी सदियों का फासला होगा


घर जलते है रोशनी के लिये
कोई मुझ सा भी दिलजला होगा ?
 
छोड दिया हमने उसका इंतजार करना हमेशा के लिए
जिसको हमारी निगाह् की कदर नही उसे मुड मुड के क्या देखना
 
छोड दिया हमने उसका इंतजार करना हमेशा के लिए
जिसको हमारी निगाह् की कदर नही उसे मुड मुड के क्या देखना

ebb to chodna e padega bhai, na te bhabi teri maar maar belan GHADI bana degi............:)
 
ebb to chodna e padega bhai, na te bhabi teri maar maar belan GHADI bana degi............:)

वो तो ठीक है विकास भाई पर ये इनका सस्टेटस अभी भी सिंगल क्यों है ???????????????:boxing:
तुम इतना जो मुसुकुरा रहे हो (चश्मा पा के )
क्या गम है जो तुम चबा राहे हो (चुइंग गम )
 
Last edited:
जब से बेग़म ने मुझे मुर्गा बना रखा है
मैनें नज़रों की तरह सर भी झुका रखा है ।

बर्तनों, आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो
मैनें तो हमेशा से तुमको धुला रखा है ।

पहले बेलन ने बनाया था मेरे सर पे गुमड़
और अब चिमटे ने मेरा गाल सुजा रखा है ।

सारे कपड़े तो जला डाले हैं बेग़म ने
तन छुपाने को बनियान फटा रखा है ।

वही दुनिया में मुक़द्दर का सिकंदर ठहरा
जिसने खुद को अभी शादी से बचा रखा है ।

पी अस : कविता की तरह पढ़ना बस :mad:
 
मोहब्बत कब हो जाए किसे पता
हादसे पूछ के नही हुआ करते !
 
माना के पैसों से अमीर नही हूं
पर कोई अपना समझ ले तो
उसके सारे गम खरीद सकता हूं
 
इस दुनिया मे वफा करने वालो की कमी नही है
बस प्यार ही उसी से हो जाता है जिसे कदर ना हो
 
यूँ तो रोज़ आते हैं सेंकडों परिंदे मेरी मुडेर पर
पर किसी के भी पंजों में तेरी चिठ्ठी कहाँ होती है?
 
बोल हवा उस पार ज़माने कैसे हैं,
उजड़े शहर में यार पुराने कैसे हैं ?
चाँद उतरता है अब किस किस आँगन में,
किरणों से महरूम घरौंदे कैसे हैं ?
जिनके झुरमट में शामें दम तोड़ गयी,
वो प्यारे, पागल परवाने कैसे है ?
हम तो खैर खबर से भी गुजर गए,
अपने रूठे यार ना जाने कैसे है ?
 
Last edited:
वे मुझको ये कहते है यूँ देखा ना करो,
फिर सजधज के मेरे सामने रोज आते क्यूँ है !!

 
यकीन ना हो तो एक बार पूछ कर देखो
जो हँस रहा है वो ज़ख्मों से चूर निकलेगा

 
ताल्लुक अब यहाँ कम है, मुलाकातें ज्यादा,
हुजूम-ए-शहर में हर शख्स तन्हा हो गया है !!
 
(सच है कि चुप रहने से ये पागलपन बढ जाता है,
लेकिन पत्थर के इस शहर में आखिर किस से बात करे।)

here is my take on the above;

Baat karke to dekho janab, Diwaron ke bhi kaan hote hain
Aisa mat kaho dost, pathar bani us Ahilyabai ka man rakho
 
जिस्म उसका था जैसे कि तराशा हुआ बुत
दिल भी उस में फिर पत्थर का ही होना था
 
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