Shayri (Continued)

कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
हम डूबने वालों का जज्बा भी नहीं बदला !!
है शौक़ - ए - सफर ऐसा इक उम्र से हमें
मंजिल भी नहीं पाई और रास्ता भी नहीं बदला !!
 
कभी नजरे मिलाने में जमाने बीत जाते है,
कभी नजरे चुराने में जमाने बीत जाते है l
किसी ने आँख भी खोली तो सोने की नगरी में,
किसी को घर बनाने में जमाने बीत जाते है l
कभी काली स्याह रातें हमें एक पल की लगती है,
कभी एक पल बिताने में जमाने बीत जाते है l
कभी खोला दरवाजा खड़ी थी सामने मंजिल,
कभी मंजिल को पाने में जमाने बीत जाते है l
एक पल में टूट जाते है उम्र भर के वो रिश्ते,
जिनको बनाने में जमाने बीत जाते है l
 
मुझ को रुसवा सर-ए-महफ़िल तो ना करवाया करें
काश आंसूं मेरी आँखों में ही रह जाया करें

ऐ हवा मैंने तो बस उस का पता पूछा था
अब कहानी तो ना हर बात की बनाया करें

बस बहुत देख लिए खवाब सुहाने दिन के
अब वो बातों की रफाकात से ना बहलाया करें

दिल ने अब सोच लिया है के ये ज़ालिम दुनिया
जो भी करना है करें, मुझको ना उलझाया करें

जिस के खवाबो को आँखों में सजा के रखा है
उस की खुशबू कभी मुझ को भी तो महकाया करें

 
सोचा था मिल गई तेरे गम से हमें निजात
ये सोचते ही फिर से तेरी याद आ गई !!
 
वक़्त की कलम से लिखो कहानी ख़्वाबों की |
खयालात की इस दुनिया को हकीक़त नहीं कहते ||
 
लोग हर मोड पे रुक रुक के संभलते क्यूँ है
इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यूँ है

मैं ना जुगनू हूँ दीया हूँ ना कोई तारा हूँ
रोशनी वाले मेरे नाम से जलते क्यूँ है


नींद से मेरा ताल्लुक ही नहीं बरसों से
ख्वाब आके मेरी छत पे टहलते क्यूँ है

मोड होता है जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यहीं आके फिसलते क्यूँ है




 
ज़िक्र इक रोज़ पलटने का किया था तुमने,
तब से एक दीया दिल के अंधेरों में जला रखा है !!

 
समझेगा कौन जागती आँखों के दर्द को
मैं अपने हादसे का अकेला गवाह हूँ !!
 
मेरे हर सवाल के मुकाबिल है
उसकी खामोशी

साथ निभाने को ये
अंदाज चुना है उसने...!!!
 
उस शाम जब वो लौटा तो घर पर कोई ना था ....
कभी वो "शामें" भी थी जब "इंतज़ार" दरवाजा खोला करते थे !
 
होकर के चाँद पूनम का, उजाले ज़िन्दगी में भरते,
ये क्या कि सितारों की तरह दूर तुम भी जा बैठे....
 
उथलपुथल सी मची है,
पहाड़ों पर बर्फ पिघलती होगी...

जो लम्हे दब गए थे जाड़ों में,
अब बह कर आते होंगे...!!!
 
एक तुम्हारी आँखें, एक तुम, एक मेरी मुहब्बत,
कोई तो है इनमे से जो मुझे मरने नहीं देता...
 
उसे कहना ज़रा-सी बात पर ना छोड़े वफ़ा का दामन !

उम्रें बीत जाती हैं यहाँ दिल के रिश्ते बनाने में !!
 
मुद्ददत्तों बाद जब उसने देखी जो मेरी खुश्क आँखें !

ये कह के रुला गया के लगता है अब तुम संभल चुके हो !!
 
खुशियाँ बहुत है मेरे दायरे मे...

पर मुकम्मल

तुम्हारे ख्याल से होती हैं...!!!
 
Back
Top