A Fistful Gaddar Jats

Bhai mere..yeh sab maine padha aur discuss kiya hua hai........baaki jaat kis aur caste/tribe tai kam koni kisi bhi maamle main..bas yeh soodhe aadmi the padhan likhan main maade se ghaat rah ge..mera kahne ka matlab yeh hai ki jo koi 2-4 log haamne shudra kah bhi de to inferiority complex ki koi load koni...!

I don't know about Brahmins but by claiming to be part of OBC we ourself want to be Shudra or we already think we are Shudra. Anyway self confident will never have inferiority complex and confidence comes by knowledge.
 
इस प्रकार बनिए एवं जाट एक ही पिता की संतान हैं। [/COLOR][/SIZE][/FONT][/FONT][/COLOR]
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राजपाल जी लिखने मैं के पिस्से खर्च हो- इस लिस्ट मैं ब्राह्मण आर शुद्र को भी जोड़ लेते फेर हिन्दू धरम का रचियाकर्ता ही जाट हो जाता
 
Yo kaam to already Sangwan sa'ab ne utha rakha hai .. Fer ke Hindu aur ke Italian !!
राजपाल जी लिखने मैं के पिस्से खर्च हो- इस लिस्ट मैं ब्राह्मण आर शुद्र को भी जोड़ लेते फेर हिन्दू धरम का रचियाकर्ता ही जाट हो जाता
 
Upender Bhai you summed it well. Perfect explanation!
हिंदू धर्म की यही तो महानता है कि इसमें आज़ादी है। हमें वर्ण चाहिए ही नहीं, न ही वर्ण व्यवस्था में न होने से हमारा कोई काम अटकता। जिस तरह से सती प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी कुरीतियां दम तोड़ चुकी हैं, वैसे ही वर्ण व्यवस्था अब दम तोड़ चुकी है। केवल हिंदू धर्म के आलोचक इस मुद्दे को उठाते रहते हैं। अब तुम ये कमाल देखो कि एक हिस्से विशेष के जाटों को एक मुस्लिम आक्रमणकारी ने 'शूद्र/चंडाल' कहा, लेकिन उसके लिए बदनाम हिंदू धर्म हो गया। गलत जानकारी नहीं फैलानी चाहिए। मैं अक्सर ये बात सुनकर हैरान होता था। अब पता चला कि ये क्या किस्सा था। इसीलिए लाहौर कोर्ट वगैरह में जाटों को शूद्र कहा गया (अगर ऐसा हुआ है तो)। ये शूद्र वाला चक्कर उधर सिंध-पंजाब तक ही रहा। कमाल की बात है उधर के कुछ जाटों को शूद्र कहा गया तो बाकी जाटों को भड़काया जाता रहा है हिंदू धर्म के खिलाफ।
 
आप से ज्यादा कन्फ्यूज्ड आदमी मैंने आज तक नहीं देखा उपेंदर जी, मुख्या संपादक, #१ खेल पत्रिका.

एक तरफ तो आप धर्म की संस्कृति का डंका बचा रहे है, उसे बचाने की बात कर रहे है वहीं दूसरी तरफ आप उसी धरम की उजडती संस्कृति और मुख्या धरा के मिटने पर खुश हो रहे है और चाह रहे है वे समाप्त हो. सीधा सवाल आप से ये है की अगर वर्ण ही हट गए तो हिन्दू धर्म मैं रह क्या जायेगा?


अगर पंडो(हिन्दू धर्म के रक्षको) की माने तो आप अपनी मर्ज़ी से मूत भी नहीं सकते, सितारों के अनुसार सब कुछ होता है,*नया घर लेने से पहले महूरत देखो, ब्याह करने से पहले कुंडली मिलाओ, मरने के बाद मुक्ति के लिए पाठ कराओ, इसे आजादी कहते है आप?

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ सति -बाल विवाह -विधवा शोषण आदि का अंत आर्य समाज ने किया था न की हिन्दू धर्म ने.

हिंदू धर्म की यही तो महानता है कि इसमें आज़ादी है। हमें वर्ण चाहिए ही नहीं, न ही वर्ण व्यवस्था में न होने से हमारा कोई काम अटकता। जिस तरह से सती प्रथा, बाल विवाह, छुआछूत जैसी कुरीतियां दम तोड़ चुकी हैं, वैसे ही वर्ण व्यवस्था अब दम तोड़ चुकी है। ।
 
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Upender Bhai you summed it well. Perfect explanation!
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It was not Kasim but a Brahmin who while explainig about people of Hindu society narrated the social status of Jats in their openion.

Earlier Jats had power but one Gaddar among them collobrated with Chach Brahmi king and Jat lost their power.

If you read kashmir history Brahmins didn't allow many muslim and non muslims to embrace Hindu Religion on the pretext that they can not be assigned any Varna.If you think you are a Hindu Vaishy who stops you .Even Chourasia Jangda Khatti call themselves Brahmins no one stops them ..But in eyes of all others situation is very clear.

Rajpal Dular ji sadly mistaken....and to say basically ignorant about Varna status ....If Jats are Vaishy than they should have been allowed to put scared thread as per Hindu religion but Brahmins just opposed this when Jats tried to put thread(VIA Arya Samaj) .....by declaring this is against Hindu Dharma..........these instances are known to every Jat in our areas .....Dada of present CM oF Haryana had to face great oppostion from hindu priests .....Looks Some of these Hindu Jats know so much about Hindus but so less about JATS.
 
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I have been patiently going through this thread to see if some sort of conclusion comes up as who is gaddar. Muje to lagta nahi agle 14 page me bhi koi nateeja dekhne ko milega ;)
 
I have been patiently going through this thread to see if some sort of conclusion comes up as who is gaddar. Muje to lagta nahi agle 14 page me bhi koi nateeja dekhne ko milega ;)

शायद इसलिए क्यूंकि यहाँ अभी तक राजनीति शुरू नहीं हुई
 
आप से ज्यादा कन्फ्यूज्ड आदमी मैंने आज तक नहीं देखा उपेंदर जी, मुख्या संपादक, #१ खेल पत्रिका.

एक तरफ तो आप धर्म की संस्कृति का डंका बचा रहे है, उसे बचाने की बात कर रहे है वहीं दूसरी तरफ आप उसी धरम की उजडती संस्कृति और मुख्या धरा के मिटने पर खुश हो रहे है और चाह रहे है वे समाप्त हो. सीधा सवाल आप से ये है की अगर वर्ण ही हट गए तो हिन्दू धर्म मैं रह क्या जायेगा?


अगर पंडो(हिन्दू धर्म के रक्षको) की माने तो आप अपनी मर्ज़ी से मूत भी नहीं सकते, सितारों के अनुसार सब कुछ होता है,*नया घर लेने से पहले महूरत देखो, ब्याह करने से पहले कुंडली मिलाओ, मरने के बाद मुक्ति के लिए पाठ कराओ, इसे आजादी कहते है आप?

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ सति -बाल विवाह -विधवा शोषण आदि का अंत आर्य समाज ने किया था न की हिन्दू धर्म ने.


आप पता नहीं कौन सी दुनिया में जी रहे हैं। वर्ण तो कब के हट चुके। समय के साथ खामियों को सुधारना अच्छी बात है। पंडों की मानना हिंदू होने का मतलब नहीं है। लगता है आप किन्हीं दुष्ट पंडों के जुल्म का शिकार हो, जिन्होंने आपको उनकी मर्जी से हगने-मूतने दिया, न कि आपकी मर्जी से। कोई अपनी मर्जी से हवन-पाठ करवाना चाहे तो आपको क्या तकलीफ है? कुरीतियां राजा राम मोहन राय ने हटवाना शुरू किया था।
नोट : आप जो मुझे बार-बार मुख्य संपादक कह रहे हैं, मैं उसका अर्थ समझ रहा हूं। आप मेरा मजाक उड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं फ्री लांस बेसिस पर लोगों को शुद्ध भाषा में क्रिकेट की खबरें मुहैया कराने का काम कर रहा हूं तो आपको इससे क्या समस्या है
? आप तो इस बात का ढोल पीटते थे कि आप किसी पर निजी टिप्पणी नहीं करते। अब कहां गए आपके वो दावे? आप यहां तर्कों से, प्रमाणों से तो मुझे नीचा दिखा सकते हैं, गलत भाषा से नहीं। मुझे एक गलत बात बोलोगे तो मैं तुम्हें 2 गलत बात बोलूंगा, क्योंकि शुरुआत आप करोगे।
 

नोट : आप जो मुझे बार-बार मुख्य संपादक कह रहे हैं, मैं उसका अर्थ समझ रहा हूं। आप मेरा मजाक उड़ाने का प्रयास कर रहे हैं। मैं फ्री लांस बेसिस पर लोगों को शुद्ध भाषा में क्रिकेट की खबरें मुहैया कराने का काम कर रहा हूं तो आपको इससे क्या समस्या है
? आप तो इस बात का ढोल पीटते थे कि आप किसी पर निजी टिप्पणी नहीं करते। अब कहां गए आपके वो दावे? आप यहां तर्कों से, प्रमाणों से तो मुझे नीचा दिखा सकते हैं, गलत भाषा से नहीं। मुझे एक गलत बात बोलोगे तो मैं तुम्हें 2 गलत बात बोलूंगा, क्योंकि शुरुआत आप करोगे।

मैं आपको मुख्या संपादक कह रहा हूँ इस्ल्ये नहीं की आप का उपहास हो परन्तु इसलिए क्यूंकि एक पत्रकार से ये उम्मीद की जाती है की वो अपनी बात मजबूती से पेश करे सही तथ्य के साथ , आपके पास तथ्य के नाम पर होता है विकिलिक जिसे पत्रकारिता की दुनिया मैं कभी तथ्य नहीं मन जाता ...दूसरा मैंने आप के बारे मैं बड़ा खोज पर मुझे आप के नाम का कोई पत्रकार नहीं मिला, मैं भी इसी क्षेत्र मैं रह चूका हूँ और बड़ी अटपटी बात है न मैंने कभी आपके बारे मैं सुना न अप की पत्रिका के बारे मैं.. खैर मैं क्षमा का पात्र हूँ अगर आपको लगता है मैंने आपके रोज़गार का उपहास उड़ायाहै तो
 
आप पता नहीं कौन सी दुनिया में जी रहे हैं। वर्ण तो कब के हट चुके। समय के साथ खामियों को सुधारना अच्छी बात है। पंडों की मानना हिंदू होने का मतलब नहीं है। लगता है आप किन्हीं दुष्ट पंडों के जुल्म का शिकार हो, जिन्होंने आपको उनकी मर्जी से हगने-मूतने दिया, न कि आपकी मर्जी से। कोई अपनी मर्जी से हवन-पाठ करवाना चाहे तो आपको क्या तकलीफ है? कुरीतियां राजा राम मोहन राय ने हटवाना शुरू किया था। [/I][/SIZE]

अब मुद्दे की बात - तकलीफ हवन से नहीं धर्म के नाम पर फैलाये डर से है ...

हिन्दू धर्म के रक्षक प्रचारक अगर कोई मन जाता है तो वो है ब्राह्मण और ब्रह्मंनो की मानो तो हर काम सितारों की दशो के कारन करना चईये वरना वो आप के अनर्थ के ऐसे जाल की कहानी बताते है जिसका कोई अंत नहीं

बालक पैदा हुआ तो नाम राशी से रखो वरना सही भविष्य नहीं होगा, बालक को राशी के अनुसार पत्थर पहनाओ ताकि गृह शांत रहे, बालक के ब्याह के लिए कुंडली मिलाओ वरना वैवाहिक जीवन अशांत रहेगा, कोई भी नयी गाडी लो तो पूजा कराओ , ये सब क्यूँ? सिर्फ डर ले लिए जो अधिकांश लोगो को इन पंडितो के पास ले कर जाता है जिससे इनकी दुकाने चलती रहती है

मैं ऐसे धर्म के धंधे के खिलाफ हूँ.

वैष्णो देवी गए है कभी?? वहां अमीर हो तो आप खुद आरती कर सकते है. केदारनाथ मैं हेलीकाप्टर से जाएँ तो अति तुरंत दर्शन पाए - तिरुपति पर तो शुरू भी न कराईयेगा मुझे और कहीं भी देख लीजियेगा इन संस्थाओ के करता धर्ता आप को या तो ब्राह्मण मिलेंगे या बनिया

अंततः मैं ये कहना चाहूँगा धरम कहो या विश्वाश वो खुद मैं इतना महान है की कोई उसे कलंकित नहीं कर सकता- मैं और हम सब लोग यहाँ उन धरम के ठेकेदारों पर सवाल उठा रहे है जो डर के नाम पर धर्म की दुकान चलाते है
 

मैं आपको मुख्या संपादक कह रहा हूँ इस्ल्ये नहीं की आप का उपहास हो परन्तु इसलिए क्यूंकि एक पत्रकार से ये उम्मीद की जाती है की वो अपनी बात मजबूती से पेश करे सही तथ्य के साथ , आपके पास तथ्य के नाम पर होता है विकिलिक जिसे पत्रकारिता की दुनिया मैं कभी तथ्य नहीं मन जाता ...दूसरा मैंने आप के बारे मैं बड़ा खोज पर मुझे आप के नाम का कोई पत्रकार नहीं मिला, मैं भी इसी क्षेत्र मैं रह चूका हूँ और बड़ी अटपटी बात है न मैंने कभी आपके बारे मैं सुना न अप की पत्रिका के बारे मैं.. खैर मैं क्षमा का पात्र हूँ अगर आपको लगता है मैंने आपके रोज़गार का उपहास उड़ायाहै तो


भाई, जो इलेक्ट्रिक मीडिया है, उसके पत्रकार प्रसिद्ध होते हैं। प्रिंट मीडिया में जाने-माने न्यूजपेपर के कुछ पत्रकार प्रसिद्ध होते हैं। मैं न्यूजपेपर में काम नहीं करता। मैं फ्री लांस बेसिस पर काम करता हूं और मेरी कई पार्टियां हैं। 'क्रिकेट सम्राट' पत्रिका से मैं पिछले साल अप्रैल से जुड़ा हूं। इस पत्रिका में मेरा नाम बतौर कार्यकारी संपादक देखा जा सकता है।
 
भाई, जो इलेक्ट्रिक मीडिया है, उसके पत्रकार प्रसिद्ध होते हैं। प्रिंट मीडिया में जाने-माने न्यूजपेपर के कुछ पत्रकार प्रसिद्ध होते हैं। मैं न्यूजपेपर में काम नहीं करता। मैं फ्री लांस बेसिस पर काम करता हूं और मेरी कई पार्टियां हैं। 'क्रिकेट सम्राट' पत्रिका से मैं पिछले साल अप्रैल से जुड़ा हूं। इस पत्रिका में मेरा नाम बतौर कार्यकारी संपादक देखा जा सकता है।

पर आप ने तो खुद ही एक पोस्ट मैं कहा था की आप मुख्या संपादक है? जितनी मेरी समझ है मीडिया की तो उसमे कोई भी फ्री लांसर कभी संपादक नहीं बनता ... सही कहा न?

फ्री लांस है तो आप के लेख काफी अखबारों मैं छपे होंगे, कुछ लेख ही दिखा दीजिये जो आप की by-line से प्रकाशित हुए हो . मीडिया मैं किसी और जाट को जानते है जो खेल विभाग मैं कार्यरत हो?
 
अब मुद्दे की बात - तकलीफ हवन से नहीं धर्म के नाम पर फैलाये डर से है ...

हिन्दू धर्म के रक्षक प्रचारक अगर कोई मन जाता है तो वो है ब्राह्मण और ब्रह्मंनो की मानो तो हर काम सितारों की दशो के कारन करना चईये वरना वो आप के अनर्थ के ऐसे जाल की कहानी बताते है जिसका कोई अंत नहीं

बालक पैदा हुआ तो नाम राशी से रखो वरना सही भविष्य नहीं होगा, बालक को राशी के अनुसार पत्थर पहनाओ ताकि गृह शांत रहे, बालक के ब्याह के लिए कुंडली मिलाओ वरना वैवाहिक जीवन अशांत रहेगा, कोई भी नयी गाडी लो तो पूजा कराओ , ये सब क्यूँ? सिर्फ डर ले लिए जो अधिकांश लोगो को इन पंडितो के पास ले कर जाता है जिससे इनकी दुकाने चलती रहती है

मैं ऐसे धर्म के धंधे के खिलाफ हूँ.

वैष्णो देवी गए है कभी?? वहां अमीर हो तो आप खुद आरती कर सकते है. केदारनाथ मैं हेलीकाप्टर से जाएँ तो अति तुरंत दर्शन पाए - तिरुपति पर तो शुरू भी न कराईयेगा मुझे और कहीं भी देख लीजियेगा इन संस्थाओ के करता धर्ता आप को या तो ब्राह्मण मिलेंगे या बनिया

अंततः मैं ये कहना चाहूँगा धरम कहो या विश्वाश वो खुद मैं इतना महान है की कोई उसे कलंकित नहीं कर सकता- मैं और हम सब लोग यहाँ उन धरम के ठेकेदारों पर सवाल उठा रहे है जो डर के नाम पर धर्म की दुकान चलाते है

भाई, आप भारत के किसी भी कोने में घर बनाइए, अगर कोई भी पंडा आपके घर पर आकर यह कहे कि आपने मुहूर्त नहीं करवाया, उसे करवाओ तो कह देना। आप नई गाड़ी लो तब भी बताना कि कौन सा पंडा आपको यह कहता है कि मुझसे इस गाड़ी की पूजा करवाओ नहीं तो अनिष्ट हो जाएगा। कोई नहीं आता। यह लोगों का अपना फैसला होता है कि घर का शुभ मुहूर्त करवाना है या नहीं या गाड़ी की पूजा करवानी है या नहीं। कोई भी पंडा-पुजारी किसी के भी घर जाकर यह नहीं कहता कि तुम ये करवाओ, तुम वो करवाओ। हरिद्वार अस्थियां प्रवाहित करनी है तो जाकर कर आओ। पंडे आएंगे पास में तो उन्हें कह दो कि हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। मैं न तो कभी मंदिर जाता, न कभी तीर्थ यात्रा पर गया। न ही मैं पूजा-पाठ करता। लेकिन भगवान में मेरा विश्वास है। कोई साधू आता है कभी घर पर तो उसे भगा देता हूं। मेरे घर किसी पंडे ने आकर ये नहीं कहा कि तू हिंदू नहीं रहा।
 

पर आप ने तो खुद ही एक पोस्ट मैं कहा था की आप मुख्या संपादक है? जितनी मेरी समझ है मीडिया की तो उसमे कोई भी फ्री लांसर कभी संपादक नहीं बनता ... सही कहा न?

फ्री लांस है तो आप के लेख काफी अखबारों मैं छपे होंगे, कुछ लेख ही दिखा दीजिये जो आप की by-line से प्रकाशित हुए हो . मीडिया मैं किसी और जाट को जानते है जो खेल विभाग मैं कार्यरत हो?

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मैं न तो कभी मंदिर जाता, न कभी तीर्थ यात्रा पर गया। न ही मैं पूजा-पाठ करता। लेकिन भगवान में मेरा विश्वास है। कोई साधू आता है कभी घर पर तो उसे भगा देता हूं। मेरे घर किसी पंडे ने आकर ये नहीं कहा कि तू हिंदू नहीं रहा।

फिर आप सनातन हिन्दू कहाँ के रहे - आप तो आर्य समाजी हुए.
खामखा मैं ही सनातन धर्म का बचाव कर रहे थे आप तो
 
फिर आप सनातन हिन्दू कहाँ के रहे - आप तो आर्य समाजी हुए.
खामखा मैं ही सनातन धर्म का बचाव कर रहे थे आप तो

मेरा मूर्ति पूजा में विश्वास है। यह और बात है कि मैं खुद पूजा नहीं करता। मैं सनातनी हिंदू हूं और मैं मंदिर वगैरह इसलिए नहीं जाता, क्योंकि मैं तपस्यारत हूं, मुझे जाने की कोई जरूरत ही नहीं है। मुझे तपस्या करते-करते 16वां साल लग गया है।
 
मेरा मूर्ति पूजा में विश्वास है। यह और बात है कि मैं खुद पूजा नहीं करता। मैं सनातनी हिंदू हूं और मैं मंदिर वगैरह इसलिए नहीं जाता, क्योंकि मैं तपस्यारत हूं, मुझे जाने की कोई जरूरत ही नहीं है। मुझे तपस्या करते-करते 16वां साल लग गया है।


हा हा हा ह। भाई उप्पू भिघन! जमा दिल पे ले गया तू तो बात ने!
भाई तेरे जीसी तपस्या भी सबके बस की बात ना है :)
 
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लगता है भाई चिट्ठी गलत पते पे भेज दी है आप ने, यहाँ लिख दो बाकी भाई भी आप को जानने के लिए उत्सुक होंगे
 
लगता है भाई चिट्ठी गलत पते पे भेज दी है आप ने, यहाँ लिख दो बाकी भाई भी आप को जानने के लिए उत्सुक होंगे


If it is you, then you are wasting both yours and my time. Here are a lot people (Samar, Balhara Sahab, Sandeep Sehrawat, Ravinder Sura), I have met. But now I think you need not to take more interest in me.

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