उपेंदर तू नाम-नाम का रोला मचा रया था तन्ने दो-तीन उदाहरण दयूंगा :- तेरे फेर भी बात ना समझ में आई ते फेर भाम्ण तेरा रुखाला ।
१) एक नाम स "मिहिर" जो हिन्दू रखते हैं ,इसका बिगड़ा हुआ शब्द स मेहर ,जो जाट और मुसलमान रखते हैं(मेहर सिंह ,मेहर खान ) आर इन् दोनुआ का मतलब स "सूर्य "। इरान का राजा शाह पहलवी अपने आप की आर्य मिहिर के नाम से लिखता था ,पर था वो शिया मुसलमान ।
२) दुसरा नाम स"महताब " यु शब्द संस्कृत के महातप्त =महाताप =महाताब का अप्भारंश स । यु नाम भी मुसलमान आर जट्टों में परयोग होता हे पर हिन्दुओं में नहीं । महताब सिंह महताब खान ।
३) मुसलामानों का एक पैगम्बर हुआ हे "मोहमद " यु संस्कृत के महामत =महामति यानी महा बुद्धि वाला का अपभ्रंश स । अरब में अब भी मोहमद नहीं बोला जाँदा ,उनका उच्चारण "महमत" स। दक्षिन एशिया यानी भारत खंड के मुसलमान ही मोहमद बोलें सें ।
४) पैगम्बर भी संस्कृत का शब्द से इह का मतलब इश्वर का दूत ते । ऊँ ते न्यू कह देवें सें अक जो पैगाम ले के आया वो पैगम्बर होया । पर इह का शाब्दिक मतलब से जिसके पग अम्बर से आये । पग मतलब पाँव ,अम्बर मतलब आसमान ,अन्त्रिक्स । यानी जो आसामन से या अन्त्रिक्स से चल कर आया हो ।
इससे इससे- अपवाद ना सें कड़े तू फेर न्यू कहवे अक ये ते एक आध होंगे । पुरे यूरोप, मध्य एशिया और भारतीय उपखंड की भाषाएँ ,बोलियाँ सब बहने हैं ,इनको भाषाविद "इंडो-युरोपियन लेंग्वेज फेमिली "कह्या करें । ये किहे पण्डे ,भमण आर हिन्दू की बपोती नहीं हैं ,तुमाहरी संस्कृत भी भारतीय भाषा नहीं हे ,ये भी मध्य एसिया से ही आरम्भ हुई थी जिसको जाट जेसी कोमें यहाँ तक लाइ हैं । इसलिए मेरा नाम किहे हिन्दू से या हिन्दू धरम से उधार नहीं लिया हे ये तुम्हारा हिन्दू पाखंडी धर्म हे जो जट्टों का भोत कुछ उधार लिया हुआ हे ।