Reservation is our constitutional right

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इस बात फिक्र न करो की कितने धडे हैं कितने दिल्ली जाते हैं , आरक्षण तो खैर मिल कर रहेगा |
रही रिफुजियो वाली तरक्की तो वो हमारे बस की भी नहीं और न ही वो तरीका हम अपना सकते हैं , आप उनको अपना आदर्श मानते हो तो शायद आप अपना सकते हो मैं तो हरगिज नहीं |
और यह देश आज कोई नया नहीं लूट रहा यह तो सदियों से लुटता आया हैं |
पर आपने देशभक्त का नाम नहीं बताया जो इस देश को लूटने से बचा सके !

वो , जो कोई भी कांग्रेस की नीतियों का विरोधी हो ,और कांग्रेस को समूल नष्ट कर सके , देशभक्त हे ।
 
इस बात फिक्र न करो की कितने धडे हैं कितने दिल्ली जाते हैं , आरक्षण तो खैर मिल कर रहेगा |
रही रिफुजियो वाली तरक्की तो वो हमारे बस की भी नहीं और न ही वो तरीका हम अपना सकते हैं , आप उनको अपना आदर्श मानते हो तो शायद आप अपना सकते हो मैं तो हरगिज नहीं |
और यह देश आज कोई नया नहीं लूट रहा यह तो सदियों से लुटता आया हैं |
पर आपने देशभक्त का नाम नहीं बताया जो इस देश को लूटने से बचा सके !

तो क्या लूटेरों में शामिल हो जाना चाहिए ?
 
वैसे तो यह थ्रेयड जाट आरक्षण पर हैं पर यहा जब यह व्यर्थ की बहस छिड़ ही गई हैं तो यह और बता दें की यह संस्कृति क्या हैं ? सभी जगह एक समान हैं ?

जितने सर ,उतनी सोच ।
 
वो तुम भी हो सकते हो ।
डिप्लोमटिक जवाब नहीं भाई साहब |
जहिए जहिए ना चलो सीधा खुढ़ पर आ जाओ |
मैं नहीं हो सकता और ना ही इस देश के काले पिलों का मैंने ठेका , मैं कौमी सोच का आदमी हु अगर देशभक्ति की बात करूंगा तो अपने आप से झूठ बोलूँगा |
मेरी सोच के अनुसार इस देशभक्त की पदवी का सही हकदार शहीद-ए-आज़म भगत सिंह था जिन के लिए न कोई भगवान था न कोई जाति , इन लोगो के बाद आज के समय मे सब स्वार्थी हैं कोई धर्म का स्वार्थी तो कोई जाति का तो कोई कुर्सी का |
 
तो क्या लूटेरों में शामिल हो जाना चाहिए ?
जब हर तरफ लूट मची हो तो लूट मे शामिल होने मे कोई हर्ज नहीं | जब लोग माल लूट ले जाएंगे तो फिर वही बनेगी नंगा नहाएगा क्या निचोड़ेगा क्या .....
इस देश को लोगो ने हमेशा लूटा हैं और जिन लोगो ने लूटेरो का साथ दिया वही लोग राज कर रहे हैं , हमे क्या मिला ...
और वैसे भी हम लोग कर क्या रहे हैं , एक लूटेरे को रोकने के लिए दूसरे लूटेरे पर दाव लगा रहे हैं , लगाते रहे भी हैं |
लूट को रोकना हैं तो पहले सीधा राज मे सेंध लगाने की तरकीब बनाओ , सिर्फ थोथे नारों से व एक को छोड़ दूसरे लूटेरे का साथ देने से लूट नहीं रुकेगी |
 
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पहले ये आन्दोलन संगठित था ,अब इसमें चार पांच धड़े हो गए हैं । ३० ० आदमी दिल्ली जा कर ५ करोड़ जट्टों के लिए आरक्ष्न्न मांगेंगे तो क्या मिलेगा ? आज ९० % जाट आरक्षन्न के खिलाफ हे । बहुत जल्दी आपके आन्दोलन के समानांतर इसके विरोध में ही जट्टों के संगठन आने वाले हैं । अगर ये सभी जाट्टों की मांग बन जाती तो ठीक था । भारत में जाट लगभग ४०,००० गाँव में रहते हैं ,एक गाँव से एक आदमी भी आता तो ४०,००० लोग जुड़ सकते थे । और यहाँ पर आये केवल ३०० । क्यों ? अगर सारा जाट समाज आर्क्षन्न मांगे तो बी,जे.पि. को भी देना पडेगा । फिर कांग्रेस जेसी जन्मजात देशविरोधी पार्टी का साथ लेना क्या जरुरी था । अगर कल केंद्र में बि ज़े.पि. की सरकार आ जाती हे , तो क्या ये मांग छोड़ दो गे ? क्या अगर आरक्षन के लिए कल सशत्र संघर्ष करना पड़े ,और पाकिस्तान हथियार सप्लाई करे ,तो क्या पाकिस्तान की हेल्प लोगे ? मेरे हिसाब से पाकिस्तान की सहायता लेना और कांग्रेस की सहायता लेना एक समान हे ।


मेने पहले भी इस्सी साईट पर लिखा था की या तो ये झुन्जुना मिलना नहीं हे अगर मिल भी गया तो इसका हसर वेसा ही होगा जेसा मुस्लिम आरक्षन्न का हुआ था । जेसा अनिल ने लिखा हे की आरक्षन के बदले यदि दश के दुश्मनों का साथ देना पड़े ,तो हमें आरक्षन नहीं चाहिए । जट्टों के बच्चों को आज भी ढंग से पढने का माहोल नहीं मिल रहा हे । आरक्षन्न से कई गुना अधिक जरुरी हे शिक्षा का स्तर उप्पर उठाना । रिफूजी केवल ५० साल म मिटटी से उठ कर आज देश पर शाशन कर रहे हैं ,केसे ?केवल पढ़ाई के दम पर ,उनको कोई आरक्षन्न नहीं मिला ,फिर भी वे सफल हैं ,क्यों ? इतनी ताकत अगर हम जट्टों के इलाकों में १४ -१५ यूनिवर्सिटी खोलने १०० -१५० इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज खोलने ,हर जिले में मार्गदर्शक केंद्र खोलने में लगायेंगे तो हर जगह जाट ही पायेंगे ,बिना रिजर्वेशन के । जो की आगे कई सौ साल तक काम आयेगा ,ज्ञान को कोई नहीं छीन सकता मेरे भाई ,पर इस आरक्षन्न की बैशाखी को कभी भी छीना जा सकता हे । कल अगर कोई ऐसी सरकार आ गई जो हर तरह के आराक्स्न्न को ख़तम कर दे तो तुम क्या करोगे ? ये एसा ही हे जेसा कोई ये कहे , की मेरी टांग काट दो ,मुझे अपाहिजों के राष्ट्रीय खेल में गोल्ड मैडल लेना हे ।


में ब्रामणवाद के खिलाफ हूँ । हिन्दू के खिलाफ नहीं । हिन्दू एक संस्कर्ती हे ,जीने की एक पद्धति हे । हिन्दू कोई धर्म नहीं ।


समर, देश ही नहीं बचेगा ,जाट ही नहीं बचेगा ,तो ये आरक्षन किस के काम आयेगा ?

भाईसाहब , आज़ादी के संगर्ष में न जाने कितने धड़े थे ! लक्ष्य तो एक ही था ! सब अपने सामर्थ्य एवं क्षमता से लगे थे ! बहुत सारी जनता को पता भी नहीं था की अँगरेज़ राज़ कर रहे हैं और असंख्य लोग अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी बिता रहे थे ! तो क्या हर जाट का जाना जरुरी है ? जरुरी भी हो तो संभव नहीं है !

और संघटन तो आयेंगे ही आखिर आप ही कहते हो की जाटडा और काटडा अपने न ए मारया करे ! ऐसी भी कोई सम्भावना नहीं है की कोई आएगा ! आप अपनी बात उपर रखने के लिए अब मन गडंत तर्क भी दे रहे हो ! कोई आधारभूत सुचना हो तो बताये !

हरयाणा में ये मिल गया है तो इसका हश्र वैसा नहीं हुआ जैसा की आपने कयास लगाया था !

बाकी आपकी ये खोल दो , वो खोल दो वाली बाते हवाई काल्पनिक चीज़े होगी नहीं और यहाँ आरक्षण भी ना मिले तो बस हो लिया काम ! पहली बात तो ऐसी सरकार की कल्पना करना ही शेइख चिल्ली की तरह सोचना है और अगर आ भी गयी तो विपक्षी दल दोबारा उनके सत्ता में आने पैर दे देंगे ! भारतीय जनता इतनी आदर्शवाद नहीं है जितना आप सोच रहे हैं !

कांग्रेस का सफाया मोदी अपने राज्य में अब तो कर नहीं पाया अब तक के शाशन काल में , आगे क्या पता !

रही देश की बात तो मै तो एक क्षेत्रवादी और जातिवादी सोच का आदमी हूँ ! पहले आरक्षण का काम ले लेता , देश सेवा का नंबर मेरी लिस्ट में बहुत नीचे है
!
 
डिप्लोमटिक जवाब नहीं भाई साहब |
जहिए जहिए ना चलो सीधा खुढ़ पर आ जाओ |
मैं नहीं हो सकता और ना ही इस देश के काले पिलों का मैंने ठेका , मैं कौमी सोच का आदमी हु अगर देशभक्ति की बात करूंगा तो अपने आप से झूठ बोलूँगा |
मेरी सोच के अनुसार इस देशभक्त की पदवी का सही हकदार शहीद-ए-आज़म भगत सिंह था जिन के लिए न कोई भगवान था न कोई जाति , इन लोगो के बाद आज के समय मे सब स्वार्थी हैं कोई धर्म का स्वार्थी तो कोई जाति का तो कोई कुर्सी का |

मेरी सोच के अनुसार में खुडां-खुडां सूं । में आरक्षन जीसी माडी सहूलियत खात्र देश ने गर्त में नहीं धकेल सकता । जब रोजगार ही नहीं होवेगा ते आरक्षन के करोगे ? जा तू मोदी का नाम सुनना चाहवे से मेरे तें ,ते इस्सी कोए बात नहीं स ,जा उह तें काम्मल मानस चाहे और कोए भी हो ,जो कांग्रेस ने ख़तम कर सके ,चाहे वो कांग्रेस मांह तें-अ बाहर लिकड़ आवे ,में उसका भी समर्थक सु । अर तू इतना माडा मन क्यूँ कर से ,इतनी कम उम्र में इतनी राजनीती सीख ली ,आगे भतेरे दिन पड़े सें , देश का प्रधानमंत्री बणन खात्र । हो सके से किहे दिन इह आरक्षन के तमगे के कारण तावला-ए मंत्री बण जा ,हाम ते राजी होवांगे ,पर कांग्रेस का बनया ते कोणी होवां राजी ।
 
मेरी सोच के अनुसार में खुडां-खुडां सूं । में आरक्षन जीसी माडी सहूलियत खात्र देश ने गर्त में नहीं धकेल सकता । जब रोजगार ही नहीं होवेगा ते आरक्षन के करोगे ? जा तू मोदी का नाम सुनना चाहवे से मेरे तें ,ते इस्सी कोए बात नहीं स ,जा उह तें काम्मल मानस चाहे और कोए भी हो ,जो कांग्रेस ने ख़तम कर सके ,चाहे वो कांग्रेस मांह तें-अ बाहर लिकड़ आवे ,में उसका भी समर्थक सु । अर तू इतना माडा मन क्यूँ कर से ,इतनी कम उम्र में इतनी राजनीती सीख ली ,आगे भतेरे दिन पड़े सें , देश का प्रधानमंत्री बणन खात्र । हो सके से किहे दिन इह आरक्षन के तमगे के कारण तावला-ए मंत्री बण जा ,हाम ते राजी होवांगे ,पर कांग्रेस का बनया ते कोणी होवां राजी ।
आप खुद अभी भटके हुए हैं , आपको खुद को अभी किसी पर यकीन नहीं की कांग्रेस को कौन खत्म कर सकता हैं , जिसका आप अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं दे पाये |
कांग्रेस का खात्मा व देशभक्ति दोनों अलग अलग बात हैं | कांग्रेस का खात्मा आप किस कीमत पर चाहते हैं और आपके अनुसार देश देशभक्ति क्या हैं यह और बता दे |
 
भाईसाहब , आज़ादी के संगर्ष में न जाने कितने धड़े थे ! लक्ष्य तो एक ही था ! सब अपने सामर्थ्य एवं क्षमता से लगे थे ! बहुत सारी जनता को पता भी नहीं था की अँगरेज़ राज़ कर रहे हैं और असंख्य लोग अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी बिता रहे थे ! तो क्या हर जाट का जाना जरुरी है ? जरुरी भी हो तो संभव नहीं है !

और संघटन तो आयेंगे ही आखिर आप ही कहते हो की जाटडा और काटडा अपने न ए मारया करे ! ऐसी भी कोई सम्भावना नहीं है की कोई आएगा ! आप अपनी बात उपर रखने के लिए अब मन गडंत तर्क भी दे रहे हो ! कोई आधारभूत सुचना हो तो बताये !

हरयाणा में ये मिल गया है तो इसका हश्र वैसा नहीं हुआ जैसा की आपने कयास लगाया था !

बाकी आपकी ये खोल दो , वो खोल दो वाली बाते हवाई काल्पनिक चीज़े होगी नहीं और यहाँ आरक्षण भी ना मिले तो बस हो लिया काम ! पहली बात तो ऐसी सरकार की कल्पना करना ही शेइख चिल्ली की तरह सोचना है और अगर आ भी गयी तो विपक्षी दल दोबारा उनके सत्ता में आने पैर दे देंगे ! भारतीय जनता इतनी आदर्शवाद नहीं है जितना आप सोच रहे हैं !

कांग्रेस का सफाया मोदी अपने राज्य में अब तो कर नहीं पाया अब तक के शाशन काल में , आगे क्या पता !

रही देश की बात तो मै तो एक क्षेत्रवादी और जातिवादी सोच का आदमी हूँ ! पहले आरक्षण का काम ले लेता , देश सेवा का नंबर मेरी लिस्ट में बहुत नीचे है
!

लेकिन कांग्रेस जेसे नकली धड़े भी थे ,जिनोहने आजादी को जितना हो सका उतना लंबा खीन्च्वाया ,ताकि जब उन् के अनुसार माहोल बन जाए तब आजादी लें ( जब तक गरम दल के सारे नेता नहीं मारे गए ,ये लोग इन्तजार करते रहे )। वास्तव में देश को लम्बे समय तक गुलाम रखने में कांग्रेस का हाथ हे । जेसे कांग्रेस एक बिमारी हे ,उस्सी तरह आरक्ष्न भी बिमारी हे । जो इस देश को और इस आरक्षन का फेदा समझ कर, लेने वाली कौम को अकर्मण्य कर के खा रही हे ।
 
आप खुद अभी भटके हुए हैं , आपको खुद को अभी किसी पर यकीन नहीं की कांग्रेस को कौन खत्म कर सकता हैं , जिसका आप अभी तक स्पष्ट जवाब नहीं दे पाये |
कांग्रेस का खात्मा व देशभक्ति दोनों अलग अलग बात हैं | कांग्रेस का खात्मा आप किस कीमत पर चाहते हैं और आपके अनुसार देश देशभक्ति क्या हैं यह और बता दे |
जब इतना लिखें पाछे भी तू नि समझया , ते आगे समझे भी कोणी ।


पर आरक्षन एक बीमारी स ,आर कोए-कोए इह दुनिया में बीमार रह के भी राजी रह्य करे ।
 
लेकिन कांग्रेस जेसे नकली धड़े भी थे ,जिनोहने आजादी को जितना हो सका उतना लंबा खीन्च्वाया ,ताकि जब उन् के अनुसार माहोल बन जाए तब आजादी लें ( जब तक गरम दल के सारे नेता नहीं मारे गए ,ये लोग इन्तजार करते रहे )। वास्तव में देश को लम्बे समय तक गुलाम रखने में कांग्रेस का हाथ हे । जेसे कांग्रेस एक बिमारी हे ,उस्सी तरह आरक्ष्न भी बिमारी हे । जो इस देश को और इस आरक्षन का फेदा समझ कर, लेने वाली कौम को अकर्मण्य कर के खा रही हे ।



कांग्रेस बीमारी है या नहीं , पता नहीं , और अगर है भी तो मै कोई परवाह नहीं करता ! पर आरक्षण निसन्देह बीमारी नहीं है ! वर्तमान सत्र में रोहतक मेडिकल और डेंटल की दाखिला परीक्षा में चालीस सीटों (एस ओ बी सी आरक्षण के तहत) में से कम से कम पच्चीस से तीस जाट बच्चे अतिरिक्त दाखिल हो पाए हैं ! अब ये बच्चे अकर्मण्य है या नहीं, मालूम नहीं पर इनका इस आरक्षण ने इनका भविष्य सुरक्षित कर दिया है ! इनके परिवार से पूछिए की ये इतने गिरे हैं या उठे हैं ?

http://pgimsrohtak.nic.in/MBBS BDS Admission List 2013.pdf
 
समर भाई कॉलेज ने सीट भी बढ़ाई हे या सीट उतनी ही हे?
 
समर भाई कॉलेज ने सीट भी बढ़ाई हे या सीट उतनी ही हे?

कुछ गूगल खोज स्वयम भी कर लो ज्यानी साहब ! और लिंक को खोल कर भी देख लो !
 
भाई बिना खोज करे तो मे कोई बात करा ही नही करता तेरा यो वाक़या के 25 से 30 अतिरिक्त जाट बच्चे दाखिल हो गये बोगस हे
 
भाई बिना खोज करे तो मे कोई बात करा ही नही करता तेरा यो वाक़या के 25 से 30 अतिरिक्त जाट बच्चे दाखिल हो गये बोगस हे

खोज करके बात करना अच्छी बात है ! अतिरिक्त का मतलब अगर आप नयी सीटों से लगा रहे हो तो गलत है ! एस ओ बी सी आरक्षण की वजह से साधरण मेरिट के अलावा अतिरिक्त जाट बच्चे दाखिल हुए हैं ! जाट बच्चों का दाखिला प्रतिशत बढ़ा है ! और अकेले इस एस ओ बी सी में अगर आप बच्चों के नाम के हिसाब से जाओ तो पच्चीस से तीस बच्चे जाट ही है !
 
खोज करके बात करना अच्छी बात है ! अतिरिक्त का मतलब अगर आप नयी सीटों से लगा रहे हो तो गलत है ! एस ओ बी सी आरक्षण की वजह से साधरण मेरिट के अलावा अतिरिक्त जाट बच्चे दाखिल हुए हैं ! जाट बच्चों का दाखिला प्रतिशत बढ़ा है ! और अकेले इस एस ओ बी सी में अगर आप बच्चों के नाम के हिसाब से जाओ तो पच्चीस से तीस बच्चे जाट ही है !

It's good to see so many Jat students have figured in the list.
I'm more happy to see that they have figured in Open/General seats as well.


I have one observation here. I might be wrong, but i see only 1 yadav kid in open list. (Though they rule BC-B) May be the ill effects of reservation over the period of time, that they are loosing grounds on competence.

Also MBBS in iteself is not sufficient anymore in today's world. Sadly, but true PG seats are only a fraction of UG seats, i hope our kids will maintan the momentum, and will not become dud as yadav's.
 
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