पहले ये आन्दोलन संगठित था ,अब इसमें चार पांच धड़े हो गए हैं । ३० ० आदमी दिल्ली जा कर ५ करोड़ जट्टों के लिए आरक्ष्न्न मांगेंगे तो क्या मिलेगा ? आज ९० % जाट आरक्षन्न के खिलाफ हे । बहुत जल्दी आपके आन्दोलन के समानांतर इसके विरोध में ही जट्टों के संगठन आने वाले हैं । अगर ये सभी जाट्टों की मांग बन जाती तो ठीक था । भारत में जाट लगभग ४०,००० गाँव में रहते हैं ,एक गाँव से एक आदमी भी आता तो ४०,००० लोग जुड़ सकते थे । और यहाँ पर आये केवल ३०० । क्यों ? अगर सारा जाट समाज आर्क्षन्न मांगे तो बी,जे.पि. को भी देना पडेगा । फिर कांग्रेस जेसी जन्मजात देशविरोधी पार्टी का साथ लेना क्या जरुरी था । अगर कल केंद्र में बि ज़े.पि. की सरकार आ जाती हे , तो क्या ये मांग छोड़ दो गे ? क्या अगर आरक्षन के लिए कल सशत्र संघर्ष करना पड़े ,और पाकिस्तान हथियार सप्लाई करे ,तो क्या पाकिस्तान की हेल्प लोगे ? मेरे हिसाब से पाकिस्तान की सहायता लेना और कांग्रेस की सहायता लेना एक समान हे ।
मेने पहले भी इस्सी साईट पर लिखा था की या तो ये झुन्जुना मिलना नहीं हे अगर मिल भी गया तो इसका हसर वेसा ही होगा जेसा मुस्लिम आरक्षन्न का हुआ था । जेसा अनिल ने लिखा हे की आरक्षन के बदले यदि दश के दुश्मनों का साथ देना पड़े ,तो हमें आरक्षन नहीं चाहिए । जट्टों के बच्चों को आज भी ढंग से पढने का माहोल नहीं मिल रहा हे । आरक्षन्न से कई गुना अधिक जरुरी हे शिक्षा का स्तर उप्पर उठाना । रिफूजी केवल ५० साल म मिटटी से उठ कर आज देश पर शाशन कर रहे हैं ,केसे ?केवल पढ़ाई के दम पर ,उनको कोई आरक्षन्न नहीं मिला ,फिर भी वे सफल हैं ,क्यों ? इतनी ताकत अगर हम जट्टों के इलाकों में १४ -१५ यूनिवर्सिटी खोलने १०० -१५० इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेज खोलने ,हर जिले में मार्गदर्शक केंद्र खोलने में लगायेंगे तो हर जगह जाट ही पायेंगे ,बिना रिजर्वेशन के । जो की आगे कई सौ साल तक काम आयेगा ,ज्ञान को कोई नहीं छीन सकता मेरे भाई ,पर इस आरक्षन्न की बैशाखी को कभी भी छीना जा सकता हे । कल अगर कोई ऐसी सरकार आ गई जो हर तरह के आराक्स्न्न को ख़तम कर दे तो तुम क्या करोगे ? ये एसा ही हे जेसा कोई ये कहे , की मेरी टांग काट दो ,मुझे अपाहिजों के राष्ट्रीय खेल में गोल्ड मैडल लेना हे ।
में ब्रामणवाद के खिलाफ हूँ । हिन्दू के खिलाफ नहीं । हिन्दू एक संस्कर्ती हे ,जीने की एक पद्धति हे । हिन्दू कोई धर्म नहीं ।
समर, देश ही नहीं बचेगा ,जाट ही नहीं बचेगा ,तो ये आरक्षन किस के काम आयेगा ?