vp ji..did he make any sin reminding the people that the same thing has been done in delhi before ..and that too without any hue and cry...did you know these things about sahib singh verma before?...
Baaki yeh aapka dhuchkala humor nahi irritable tha...baaki jisne apnp ki izzat ni kari we doosre ke hi taale laagte haande sai aakhir main.....
भाई इसमें इतनी बौखलाहट और झुंझलाहट की क्या बात थी कि जो आप इतने नर्वसा गए i किसी ने साहब सिंह वर्मा जी को बुरा नहीं बताया i यह भी झूठ नहीं कि साहब सिंह वर्मा जी अब जाट समाज की सेवाओं के लिए उपलब्ध नहीं हैं i और अब उनकी अनुपस्थिति में दिल्ली के मुख्यमंत्री की कुर्सी का कोई दूसरा सम्भावी जाट दावेदार इस चुनाव में नहीं था और आने वाले राष्ट्रीय चुनाव में भी नहीं दीख रहा । अब तूं ही बता जाटों को किसके तलै लागणा चाहये (आपकी सभ्य भाषा के अनुसार) i जाहिर सी बात है कि लोगों ने केज़रीवाल में कुछ तो खूबी देखी ही होगी जो उनका समर्थन किया और यहाँ भी काफी लोग उनके बारे में अच्छा लिख रहे हैं i तेरे मेरे न चाहने से सच्चाई तो नहीं बदल जायेगी i वैसे भी प्रजातंत्र में किसी गैर जाति वाले की अच्छाई को अच्छाई बताना कोई ज़ुर्म नहीं है i
देश की राजनीति जातिगत आधार पर हमेशा नहीं चलती रहेगी, समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है i इसके अतिरिक्त, किसी एक जाति के सब लोग फ़रिश्ते तो नहीं होते i हर जाति में बददतमीज़, भ्रष्ट,चोर, बलात्कारी और अपराधी प्रवृति के लोग और अच्छे लोग भी होते हैं और जाट कोई इसका अपवाद नहीं हैं i
संयोगवश, किसी गैर-जाट के लिए तो आप भी यहाँ कई दिन से प्रचार में लगे हुए हैं i आपके इस कार्य को क्या संज्ञा दी जाए ? क्या इसे किसी के तलै लागणा कहेंगे ? मेरे हिसाब से नहीं, क्योंकि यह आपका संवैधानिक अधिकार है i क्या आपको किसी जाट भाई ने कभी कहा कि भाई प्रशांत क्यों किसी गैर जाट के तलै लाग रह्या सै i यह उन की सभ्यता का प्रतीक है और आपको उनसे सीख लेनी चाहिए i वैसे आपने मानना तो नहीं, पर मैं भी यही कहूंगा कि भाषा की मर्यादा से आदमी के अच्छे संस्कार झलकते हैं और अभद्र भाषा न केवल खुद मनुष्य के खानदान पर बल्कि समस्त जातिपर एक बदनुमा दाग लगवा देती है i